8/21/2008

"नहीं"







"नहीं"

देखा तुम्हें , चाहा तुम्हें ,
सोचा तुम्हें , पूजा तुम्हें,
किस्मत मे मेरी इस खुदा ने ,
क्यों तुम्हें कहीं भी लिखा नहीं .
रखा है दिल के हर तार मे ,
तेरे सिवा कुछ भी नही ,
किस्से जाकर मैं फरियाद करूं,
हमदर्द कोई मुझे दिखता नही.
बनके अश्क मेरी आँखों मे,
तुम बस गए हो उमर भर के लिए ,
कैसे तुम्हें दर्द दिखलाऊं मैं ,
अंदाजे बयान मैंने सीखा नही.
नजरें टिकी हैं हर राह पर ,
तेरा निशान काश मिल जाए कोई,
कैसे मगर यहाँ से गुजरोगे तुम,
मैं तुमाहरी मंजील ही नही,
आती जाती कोई कोई अब साँस है ,
एक बार दिल भर के काश देखूं तुझे,
मगर तू मेरा मुक्कदर नही ,
क्यों दिले नादाँ ये राज समझा नही ..............

http://kavimanch.blogspot.com/

8/19/2008

"काश"



"काश"


तेरे साथ गुजरे,
" लम्हों"
की कसक,
आज भी
दिल मे बाकी है,
"काश "
वो मौसम
वो समा
फ़िर से बंधे

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/08/blog-post_7837.html

8/14/2008

प्यार आता है




"प्यार आता है"


तेरी बातों पे ना जाने मुझे क्यों प्यार आता है,
तुझे देखूं ना मैं जब तक नही करार आता है.

तेरी आँखों से यूं लगता है जैसे कोई जाम पीता हूँ,
खुले होठों से गिरते फूलों को मैं थाम लेता हूँ.

नींद आती नही मुझको तो हर पल ख्वाब आतें हैं,
ख्वाबों मे मैं तुझे हर पल अपनी बाँहों मे पाता हूँ.

मिलन के बाद एक पल बिछड़ने का भी आता है,
वो घडी ऐसी होती है जैसे तूफान आता है.

मेरी चाहत की हद कितनी है ये दिखलाना चाहता हूँ,
जीते जी ही नही मर कर भी तुझको पाना चाहता हूँ...


http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/08/blog-post_21.html

8/11/2008

रात,


"रात"

"क्या हुआ जो ये रात,
"कुछ"
शिकवो शिकायतों के साथ गुजरी ,
क्या हुआ जो अगर ये रात,
आंसुओ के सैलाब से बह कर गुजरी ,
"गौर -ऐ -तलब" है के ये रात,
आप के ख्यालात के साथ गुजरी

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/08/blog-post_9244.html

8/10/2008

तू रहती है




"तू रहती है"


मेरे एहसास में तू रहती है,
मेरे जज्बात में तू रहती है
आँखों मे सपना की जगह
मेरे ख़यालात में तू रहती है
लोग समझते हैं के वीराना है
पर मेरे साथ में तू रहती है
दम घुटता है जब रुसवाई मे ,
मेरी हर साँस मे तू रहती है
दुख का दर्पण , विरहन सा मन
मेरे हर हालात मे तू रहती है

8/09/2008

“ऐतबार”



“ऐतबार”


वो पूछते हैं मुझसे किस हद तक प्यार है,
मैंने कहा जहाँ तक ये अनंत नीला आकाश है,

वो पूछते हैं किसका तुम्हारे दिल पे इख्तियार है ,
मैंने कहा जिसका दर्द मेरे दिल मे शुमार है

वो पूछते हैं किस तोहफे का तुमको इन्तजार है ,
मैंने कहा उसका तसुब्ब्र्र जिसके लिए दिल बेकरार है

वो पूछते है मेरा साथ कहाँ तक निभाना है ,
मैंने कहा जहाँ तक चमकते सितारों का संसार है

वो पूछते है , मैं किस तरह ऐतबार करू तुम पर ,
मैंने कहा मेरा वजूद ख़ुद मे एक ऐतबार है...!

8/08/2008

"अदा"




"अदा"

फिर वही आतिशफिशानी कर रही उसकी अदा
फिर वही मदिरा पिला डाली है उसके जाम ने ..........

जब भी गुज़रा वो हसीं पैकर मेरे इतराफ़ से

दी सदा उसको हर एक दर ने हर एक बाम ने......

एक अजब खामोश सा एहसास था दिल में मेरे

उसका नज़ारा किया है पहले हर इक गाम ने...


http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_4097.html

8/07/2008

"बेखबर"



अचानक चुप हो जातें हैं
"वो इस कदर यूँ",
"की'
"बेखबर" को
हमारी रुकी साँसों का
"ख्याल तक नही रहता"

8/06/2008

"सुकून है"



"सुकून है"

एक अजब खुमार है , एक अजब जूनून है,
तुम अगर नही मिले ,मेरे दिल का खून है
तू ही बता मेरे मन हो क्या अब ऐसा जतन,
हम तुम थोडी देर के लिये कह सकें होके मगन
"सुकून है" "सुकून है" "सुकून है" "सुकून है"

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_1958.html

8/04/2008

"याद किया तुमने या नही "




"याद किया तुमने या नही "

यूँ ही बेवजह किसी से, करते हुए बातें,
यूँ ही पगडंडियो पर सुबह-शाम आते जाते
कभी चलते चलते रुकते, संभलते डगमगाते.
मुझे याद किया तुमने या नही जरा बताओ..


सुलझाते हुए अपनी उलझी हुई लटों क
फैलाते हुए सुबह बिस्तर की सिलवटों को
सुनकर के स्थिर करतीं दरवाजी आहटों को
मुझे याद किया तुमने या नही जरा बताओ..

बाहों कर करके घेरा,चौखट से सर टिकाके
और भूल करके दुनियाँ सांसों को भी भुलाके
खोकर कहीं क्षितिज में जलधार दो बुलाके
मुझे याद किया तुमने या नही जरा बताओ.

सीढ़ी से तुम उतरते , या चढ़ते हुए पलों में
देखुंगी छत से उसको,खोकर के अटकलों में
कभी दूर तक उड़ाकर नज़रों को जंगलों में
मुझे याद किया तुमने या नही जरा बताओ..

बारिश में भीगते तो, कभी धूप गुनगुनाते
कभी आंसुओं का सागर कभी हँसते-खिलखिलाते
कभी खुद से शर्म करते कभी आइने से बातें
मुझे याद किया तुमने या नही जरा बताओ..

तुमसे दूर मैने, ऐसे हैं पल गुजारे .
धारा बिना हों जैसे नदिया के बस किनारे..
बिन पत्तियों की साखा बिन चाँद के सितारे..
बेबसी के इन पलों में...
मुझे याद किया तुमने या नही जरा बताओ....

8/03/2008

"जरूरी तो है"










"जरूरी तो है"
मुझको मिले तेरा प्यार ये जरूरी तो है,
तेरे दिल पे हो मेरा इख्त्यार ये जरूरी तो है,
दर्द कितना भी सताये है, मुझे पर वो तेरा है,
तेरे गम मे हो मेरा दामन तार तार ये जरूरी तो है.
कोई भी एक पल तेरे बगैर सोचु भी तो मैं कैसे,
हर घड़ी हो तेरा मेरा साथ ये जरूरी तो है
जिसकी झलक पाने को सदयीओं से ये ऑंखें थमी हैं,
मैं करू उसका जिन्दगी भर इंतजार, ये जरूरी तो है.
तू है मेरी सांसों मे मुझे हर नब्ज कहती है,
मैं करूं तुझे हर पल टूट के प्यार ये जरूरी तो है.
ये इंतजार भी तेरा, ये आंसू भी तेरा, ये गम भी तेरा.....
ये प्यार भी तेरा , ये ऐतबार भी तेरा ये.............
फिर क्यों न करूं किस्मत से तकरार ,
"ये जरूरी तो है"

8/02/2008

कतरा कतरा




"कतरा कतरा"



कतरा कतरा दरया देखा ,
कतरे को दरया में न देखा ,
लम्हा लम्हा जीवन पाया,
जीवित एक लम्हे को न पाया,
आओ हम दोनों मिलकर
एक लम्हे को जिंदा कर दें,
प्रेम प्रणव से जीवन भर दें

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_05.html

"अच्छा था"










"अच्छा था"

तेरी यादों में जल जाते तो अच्छा था,
शबनम की तरह पिघल जाते तो अच्छा था.

इन उजालों में मिले हैं वो दर्द गहरे,
हम अंधेरों में बदल जाते तो अच्छा था.

मेरी परछाईं से भी था शिकवा उनको,
ये चेहरे ही बदल जाते तो अच्छा था.

क्यों माँगा था तुझे उमर भर के लिए,
अपना ही सहारा बन जाते तो अच्छा था.

यूं बरसा के भी सावन प्यासा ही रहा,
हम ही समुंदर बन जाते तो अच्छा था.

क्यों संभाला था ख़ुद को एक मुकाम के लिए,
हम यूं ही टूट के बिखर जाते तो अच्छा था.

चाँद और सितारे तो नहीं मांगे थे हमने,
काश अपने भी मुकद्दर सँवर जाते तो अच्छा था

7/31/2008

ब्लास्ट्स के बाद और कल की खबर के बाद की सुरत मे कुछ बम बरामद किये गये आज अचानक अपनी ही लिखी पुरानी कुछ पंक्तियाँ याद आ गयी ...........

जिनमे सवाल तो हजार हैं पर शायद जवाव एक का भी नही ,क्या आपके पास .........????????



"आतंकवाद"


आतंकवादीयों को मुह तोड़ जवाब ,
अखीर कब दिया जाएगा,
क्या यूँही देखते रहेंगे हम ???
और वक्त निकल जाएगा...........
भगवान ने तो बस इंसान बनाये ,
फ़िर ये आतंकवादी कहाँ से आए???
इस सवाल का जवाब कब
और किस्से लिया जाएगा .......
गुमराह करके नौजवानों को
आतंक का जहर पिलाते हैं जो
उन्हें प्रेम की धारा का अम्रत
आखिर कब पिलाया जाएगा???
जिस्म पर बम लगाकर,
हमे बर्बाद करते है जो,
उन्हें जिन्दगी का सबक,
आखिर कब दिया जाएगा???
ह्थीयारों हथगोलों से ,
खून की होली खेल रहें है जो,
उन्हें इंसानीयत का मतलब,
कब समझाया जाएगा ???
रोकना होगा हमे
इस बढ़ती हुई बीमारी को
वरना ये आतंकवाद का सांप
हम सबको डस जाएगा ..........

7/30/2008

"क्यों है"








"क्यों है"
तेरे बगेर तनहा जिन्दगी मे मेरी कुछ कमी सी क्यों है ,
तेरी हर बात मेरे जज्बात से आज फ़िर उलझी सी क्यों है...

तु मुझे याद ना आए ऐसा एक पल भी नही संवारा मैंने,
गुजरते इन पलों मे मगर आज फ़िर बेकली सी क्यों सी है......

बेबसी के लम्हों मे आंसुओं का वो मंजर गुजारा मैंने ,
उठती गिरती पलकों मे मगर आज फ़िर कुछ नमी सी क्यों है.........
मोहब्बत मे तेरा नाम लेकर तेरी बेरुखी को भी रुतबा दिया मैंने
हर आहट पे तेरे आने की उम्मीद फ़िर बंधी सी क्यों है.....

गिला तुझसे नही बेवफा सिर्फ़ अपनी मज्बुरीयों से किया मैंने,
वक्त से करके तकरार सांसों की रफ्तार्र

"फ़िर थमी सी क्यों है......"


7/29/2008

आँखें




"आँखें "

तुम्हें देखने को तरसती हैं आँखें,
बहोत याद कर के बरसती हैं ऑंखें...........

जब जब ख्यालों में लातें हैं तुमको,
शर्मो हया से लरजती हैं ऑंखें ............

फूलों का तबस्सुम, या पतझड़ का मौसम,
तेरी बाट मे ही सरकती हैं ऑंखें.................

यूँ तन्हाई मे जब बिखरता है दामन,
तेरे साथ को बस सिसकती हैं आंखें...........

चिरागों के लौ मे भी जान ना रहे जब,
ग़म -ऐ-इश्क में फिर दहकती हैं ऑंखें...........