6/29/2008

दुआ करे








"दुआ करे"

तजवीज़ कोई मुझ को वो क्यूँ कर सज़ा करे,

जो बात कहनी हो वो निगाहें मिला करे....

कब तक सुकून -ऐ -दिल के लिये वो मकान करे,

घर को मिटा के मुझ को मगर बे-अमां करे....


है तो सदा बुलंद मगर कियूं सुनाई दे,

दिल से निकल रही हो जो उसके दुआ करे....

दागे फिराक देके वो गुलचीन चला गया,

किसके लिये तू बाग़ अब आशियाँ करे....

'सीमा शहर में हो कोई जो सरफिरा बने ,

होगा वो किस गली में यह कैसे गुमान करे ,

झोली में मेरी डाल के हीरा किया करम,

दानी उसे बचाने की रब से दुआ करे..........

4/07/2008

“ऐसा ना हो जाए ” (http://www.swargvibha.tk)







“ऐसा ना हो जाए ”



कहीं ऐसा ना हो जाए ,


की फ़िर तेरी याद आ जाए ,


पुकारूँ नाम मैं तेरा ,


और तू यूं ही बदनाम हो जाए .


कही ऐसा न हो जाए ,


की फ़िर ये दिल तड़प जाए,


मैं दुंदु हर तरफ तुझको ,


तू कहीं नज़र ही नही आए .


कहीं ऐसा ना हो जाए ,

की तू हर शै मे नज़र आए ,


कहे दुनिया मुझे पागल,


प्यार मे मेरा ये अंजाम हो जाए .


कहीं ऐसा ना हो जाए ,


की फ़िर तेरी प्यास जग जाए ,


मैं जी भी ना सकूं तुझ बिन,


ये जिन्दगी यूं ही तमाम हो जाए .
http://swargvibha.freezoka.com/kavita/all%20kavita/Seema%20Gupta/aisa%20naa%20ho%20jaye.htm (http://www.swargvibha.tk/)


3/31/2008

"बिजली"







खो ना दूँ तुझको इस डर से तुझे कभी मैं पा न सका ,
चाहता रहा शीद्त्त से मगर तुझे कभी जता ना सका.

वीरान आँखों के समुंदर मे अपने आंसुओं को पीता रहा ,
दिल के दर्द की एक झलक भी मगर तुझे दिखा ना सका .

तेरा ख्याल बन कर बिजली और एक तूफान मुझे सताता रहा ,
इश्क मे जलने का सबब मगर तुझे कभी समझा ना सका .

तू बदनाम न हो जाए , मैं जमाने मे गुमनाम सा जीता रहा
लबों पे नाम तो था पर आवाज देकर तुझे बुला ना सका .

तु कभी गैर की न हो जाए ये ख्याल हर पल मुझे डराता रहा
शिकवा आज भी है इस डर से तुझे कभी अपना भी ना सका

उपर वाला बस बेदर्द हो गम की "बिजली" मुझपे ही गीराता रहा,
तुझसे जुदा होके भी अपना आशियाँ झुलसने से मैं बचा ना सका ……-

सीमा गुप्ता
http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_12.html

3/16/2008

"हो जाने दो "


"हो जाने दो "
ना छुपाओ अपने वजूद को इस जमाने से ,
की ,दुनिया मे ख़ुद की पहचान हो जाने दो.

आईना हूँ , तेरा त्स्सब्बुर नज़र आऊंगा ,
की , मुझे अपने अक्स मे एक बार ढल जाने दो.

मोहब्बत गुनाह ही सही, पर खूबसूरत तो है ,
की , इश्क मे आज अपने बदनाम हो जाने दो.

दिल की धड़कन , शोला -ऐ - एहसास ही सही
की , इस आग मे आज मुझको जल जाने दो.

हाँ, मोहब्बत है मुझसे , ये इकरार कर लो
की , अपने आगोश मे मुझको बिखर जाने दो .....
http://swargvibha.freezoka.com/kavita/all%20kavita/Seema%20Gupta/ho%20jaane%20do.htm (http://www.swargvibha.tk/)