9/05/2008

"मंजिल"




" मंजिल"

मंजिल नहीं थी कोई मगर गामज़न हुए
ख़ुद राह चुन के तेरी तमन्ना लिए हुए

फिर साया मेरा देके दगा चल दिया किधर
हम आईने को तकते रहे जाने किस लिए

दिलदार ने भुला दिया पर हमने उसको यूँ
सजदे सुकून-ऐ-दिल के लिए कितने कर लिए

अल्फाज़ धोका दे गए जब आखिरश हमें
हमने भी उम्र भर के लिए होंठ सी लिए




24 comments:

Anonymous said...

it seems a lot to go ....everyday a finest one....how u maintain it......very nice yaar

Rakesh Kaushik said...

अल्फाज़ धोका दे गए जब आखिरश हमें
हमने भी उम्र भर के लिए होंठ सी लिए

i think this is the heart of this n it had lots of pain .

beautiful


Rakesh Kaushik

जितेन्द़ भगत said...

फिर साया मेरा देके दगा चल दिया किधर
हम आईने को तकते रहे जाने किस लिए

बेहतरीन बात लि‍ख दी यहॉं आपने।

संगीता पुरी said...

बहुत ही अच्छा।

डॉ .अनुराग said...

मंजिल नहीं थी कोई मगर गामज़न हुए
ख़ुद राह चुन के तेरी तमन्ना लिए हुए
well said.....

ज़ाकिर हुसैन said...

फिर साया मेरा देके दगा चल दिया किधर
हम आईने को तकते रहे जाने किस लिए

behtreen lines!!!!!!!!!

Vinay said...

अल्फाज़ धोका दे गए जब आखिरश हमें
हमने भी उम्र भर के लिए होंठ सी लिए

very heavy sh'er!

मीत said...

मंजिल नहीं थी कोई मगर गामज़न हुए
ख़ुद राह चुन के तेरी तमन्ना लिए हुए

फिर साया मेरा देके दगा चल दिया किधर
हम आईने को तकते रहे जाने किस लिए
bahut hi behtreen likha hai....
bdhai ho

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

hamesha ki tarah sundar lafz, sundar chayan

ताऊ रामपुरिया said...

दिलदार ने भुला दिया पर हमने उसको यूँ
सजदे सुकून-ऐ-दिल के लिए कितने कर लिए

वाह ! किसी सूफी फकीर की याद आगई ताऊ को !
शुभकामनाएं

दीपक "तिवारी साहब" said...

बहुत सुंदर और भावमयी रचना !
धन्यवाद !

अभिन्न said...

अल्फाज़ धोका दे गए जब आखिरश हमें
हमने भी उम्र भर के लिए होंठ सी लिए
bahut umda aur bahut hi achchhi shayari pesh ki hai aapne,humne bhi umr bhar ke liye hoth si liye....bahut hi sundar bahut hi achchha.
thanx for such a heart twisting creation

Hemant Pandey said...

sabhi posts me painting ka chayan kabile tarif he.

Birds Watching Group said...

hoth chup hue
to nigahon ne kiya bayan
armaa dil ke khatam to n hue

समय चक्र said...

अल्फाज़ धोका दे गए जब आखिरश हमें
हमने भी उम्र भर के लिए होंठ सी लिए.
Alfaaj behatareen lage.badhai.

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन!!!

राज भाटिय़ा said...

अल्फाज़ धोका दे गए जब आखिरश हमें
हमने भी उम्र भर के लिए होंठ सी लिए
अरे वाह ! क्या बात हे

धन्यवाद सुन्दर शेरॊ के लिये

Satish Saxena said...

बेहतरीन ग़ज़ल है सीमा जी ! धन्यवाद

बवाल said...

Priy Seema jee, mere janmdin 4th september aur aajkee aapkee rachnayain padhkar dil bahut khush hua. Aapne bahut sunder rachnayain prastut kee. Bahut badhai aur dheron shubhkaamnayain.

Smart Indian said...

मंजिल नहीं थी कोई मगर गामज़न हुए
ख़ुद राह चुन के तेरी तमन्ना लिए हुए

फिर साया मेरा देके दगा चल दिया किधर
हम आईने को तकते रहे जाने किस लिए

बहुत सुंदर!

"अर्श" said...

seema ji me aapka blog lagatar padhata aaya hun magar is ghazal me mukhada aur antare me thora samanjasya kam dikha muje isliye maine esa kaha wese hamesha ki tarah isme bhi bejor prastuti di hai aapne.like.......
फिर साया मेरा देके दगा चल दिया किधर
हम आईने को तकते रहे जाने किस लिए

ese umda rachana ke liye badhai.......


regards
Arsh

शोभा said...

बहुत अच्छा लिखा है। बधाई

The Campus News said...

सीमा जी आप की गज़लों में एक दर्द दिखाई देता है। मुझे लगता है कियह दर्द केवल अकेले का नही हो सकता है यही सभी का हालहै। बहुत अच्छी है आप कि ग़ज़लें

Mukesh Garg said...

अल्फाज़ धोका दे गए जब आखिरश हमें
हमने भी उम्र भर के लिए होंठ सी लिए



seema ji hoth see sakte hai par hatho ko kesse roka ja sakta hai. we to dil ki baat hotho se na keh kar apni baat likh hi dete hai..