12/01/2009

" मन की ओस की गर्म बुँदे "

" मन की ओस की गर्म बुँदे "

एक लम्हा जुदा होने से पहले,

उँगलियों के पोरों के

आखिरी स्पर्श का

वही पे थम जाता

तेरा एहसास बन

मुझ में समा जाता
अपनी पूर्णता के साथ


मै कुछ देर और
जी लेती....

34 comments:

शरद कोकास said...

उंगलियों के पोरों का आखरी स्पर्श ..यह अध्भुत अनुभूति है ।

अजय कुमार said...

सुखद अनुभूतियों का एहसास कराती रचना

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

आखिरी स्पर्श का

वही पे थम जाता

तेरा एहसास बन


इन पंक्तियों ने मन मोह लिया ...... बहुत सुंदर कविता..... दिल को छू गई...

Arvind Mishra said...

आह अदम्य संवेदना !

M VERMA said...

तेरा एहसास बन

मुझ में समा जाता
अपनी पूर्णता के साथ
कुछ एहसास होते ही ऐसे है कि ---

बहुत खूबसूरत रचना

Creative Manch said...

bahut naajuk ehsason se bhari panktiyan.

sundar abhivyakti...sundar rachna

aabhar & shubh kamnayen

Alpana Verma said...

wah ek lamha yaadgar hota ..magar...waqt thamta kahan hai!

'OS ki garam boonden!'
adbhut!
bahut sundar abhivyakti!

vandana gupta said...

bahut hi gahre ahsas........ungliyon ke poro ka aakhiri sparsh........uff!

रंजन said...

बहुत सुन्दर रचना..

ताऊ रामपुरिया said...

तेरा एहसास बन

मुझ में समा जाता
अपनी पूर्णता के साथ


मै कुछ देर और
जी लेती...

बहुत सुंदर और लाजवाब अभिव्यक्ति. शुभकामनाएं.

रामराम.

Hiral said...

superb!

दिगम्बर नासवा said...

IUS EK LAMHE MEIN TO POORA JEEVAN JEE LENE KI KSHAMTA HOTI .... BAHUT SUNDAR BHAAV AUR LAJAWAAB ABHIVYAKTI ...

अभिन्न said...

ek ek shabd kisi upnyas se kam nahi lagta.....sirf ehsaas ko sanjo kar padhne ki jarurat hai...great poetry by emotions

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर लगी आप की यह सुंदर रचना

Smart Indian said...

सब इच्छाएं पूरी हो पातीं तो ज़िंदगी में क्या रह जाता? पूर्णमदः पूर्णमिदं...

Rakesh Kaushik said...

it's lovely poem.
with a secret feeling.

Best Wishes

Kaushik

मीत said...

i m word less....
no word for its thoughts
meet

Arshia Ali said...

भावनाओं में डूबी ऐसी रचना मैंने कब पढी, मुझे याद नहीं। बहुत बहुत बधाई।

------------------
सांसद/विधायक की बात की तनख्वाह लेते हैं?
अंधविश्वास से जूझे बिना नारीवाद कैसे सफल होगा ?

मोहन वशिष्‍ठ said...

मुझ में समा जाता
अपनी पूर्णता के साथ


मै कुछ देर और
जी लेती....


BAHUT BEHATRIN SEEMA JI BEHATRIN

नीरज गोस्वामी said...

अद्भुत एहसास जगाती आपकी ये रचना विलक्षण है...वाह
नीरज

डा0 हेमंत कुमार ♠ Dr Hemant Kumar said...

सीमा जी,
खूबसूरत अनुभूतियों को शब्दों से बांधा है अपने---
हेमन्त कुमार

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत सुन्दर, सजीव.

Dileepraaj Nagpal said...

Kaafi Samay Baad Aapke Blog Per Aana Hua...Shirshak Aos Man Ki Aos Ki Garm Boonden...Aos Ki Garam Boonde...

Aapka Man Kitna Vyaapk Sochta Hai...Kaash Main Bhi Etna Accha Likh Paata...

dinesh said...

very nice!

Birds Watching Group said...

jeene ke liye sparsh
kya baat hai?

योगेन्द्र मौदगिल said...

wahwa..achhi rachna...

IMAGE PHOTOGRAPHY said...

सुन्दर रचना।

अमिताभ श्रीवास्तव said...

wah, ye ahsaas, anubhooti..kya gazab likhaa he aapne bahut khoob एक लम्हा जुदा होने से पहले,
उँगलियों के पोरों के
आखिरी स्पर्श का
वही पे थम जाता ...

पूनम श्रीवास्तव said...

Khoobasurat bhavon kee sundar prastuti.
Poonam

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

कडुवासच said...

... sundar rachanaa !!

समय चक्र said...

बहुत सुन्दर पोस्ट. हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार में प्रभावी योगदान के लिए आभार
आपको और आपके परिजनों मित्रो को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये...

Mukesh Garg said...

seema ji namste,

phle to aap se chama chahunga ki itne dino bad aap ki rachna padhi wajha thi kaam ka jada hona .

aapki ye rachna padh kar bahut hi acha laga.

bahut hi sunder rachna lagi sunhkamnaye savikar kare

Akhilesh pal blog said...

aap ka hindi me blog likane ke liye danyavad hindi hamari rastabhasa hai