
"जब कश्ती लेकर उतरोगे "
झील के कोरे दामन पे,
चन्दा की उजली किरणों से
चाहत का अंश है मैंने लिख डाला
थाम के ऊँगली प्रियतम की
दुनिया की नज़रों से छुप कर
मुझे नभ के पार है उड़ जाना
तारो को झोली में भर कर
तेरे प्यार के बहते सागर में
दूर तलक है तर जाना
जब कश्ती लेकर उतरोगे
तुम झील के गहरे पानी में
इन उठती गिरती लहरों को
50 comments:
बहुत सुन्दर भाव !
बहुत सुंदर परिकल्पना.
सीमाजी
सादर अभिवादन
काफी अन्तराल के बाद जब आपकी भाव विभोर कर देने रचना पढ़ता हूँ तो हर लाइने पढ़कर कुछ सोचने को मजबूर हो जाता हूँ की इतनी अच्छी रचनाओं आप कैसे लिखती है . आज की रचना बर्हद भावपूर्ण और अच्छी लगी . आभार.
बहुत लाजवाब रचना. बहुत शुभकामनाएं.
रामराम.
दिल को छू गयी यह चिरन्तन आस
सुन्दर भाव !
kitni sundar or nirmal kalpna hai . shayad school life k baad pehli aisi koi kavita hai, jisska bahvarth itna nirmal or ekarthi hai.
Bahut bahut uttam
Rakesh Kaushik
बेहतरीन शब्दों से सज़ा सुंदर भाव कविता को लाज़वाब बना रही है..
धन्यवाद!!!
waah !
अति सुन्दर भावों की सुन्दर काल्पनिक उडान से सराबोर सुन्दरतम रचना.
बधाई .
बहुत ही मधुर प्रेम के कोमल रंगों से सजी भावनात्मक अभिव्यक्ति है............ दिल में हलके से उतर कर मन मयूर को दूर ले जाती है आपकी रचना ........... ............ तृप्ति की अनुभोती होती है आपकी रचना पढने के बाद............ लाजवाब
बहुत खुबसुरत..
बधाई..
बहुत ही खुब्सूरत नज़म ऐसी रचना हमेशा से दिल के गहराई मे उतरती है ............अतिसुन्दर
बेहद खूबसूरत
सीमा जी बहुत सुन्दर रचना,
जब कश्ती लेकर उतरोगे
तुम झील के गहरे पानी में
इन उठती गिरती लहरों को
चुपके से अधरों से छु जाना
क्या खूब लिखती है आप,प्यार के सकारात्मक सौन्दर्य को निखारती आपकी मुग्ध कर देने वाली कविता को जब जब मै पढा करता हू मन कह उठता है बेहतरीन, मा सरस्वती आपकी लेखनी को इसी तरह और खूबसूरती प्रदान करे. वैसे मै अभी भी आपकी उस कविता को भूला नही 'धुमिल हुई तुम्हे भुलाने की सभी चेष्टाये... विरह और सौन्दर्य का बेजोड मिश्रण है आपका ब्लोग.
राकेश
सुंदर भाव.
बस एक नाव हो जो आसमान के उस पार भी ले जाती हो!
dani bhav vibhor
कहाँ से लाती हैं आप ऐसे शब्द और थिंकिंग मैं जब भी आपको पढता हूँ अचंभित हो उठता हूँ ... हर बार एक नायाब रचना .. और हो भी क्यूँ ना ऐसा सिर्फ आप ही कर सकती है सीमा जी ... सलाम आपकी लेखनी को ...
अर्श
जब कश्ती लेकर उतरोगे
तुम झील के गहरे पानी में
इन उठती गिरती लहरों को
चुपके से अधरों से छु जाना
वाह क्या बात कह दी...
बहुत खूब...
मीत
निशब्द कर दिया आपने.
बहुत भावपूर्ण कविता
सुन्दर चित्र
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सूचना :
कल सवेरे नौ बजे से पहली C.M. Quiz शुरू हो रही है.
आपसे आग्रह है कि उसमें भी शामिल होने की कृपा करें.
हमें ख़ुशी होगी.
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क्रियेटिव मंच
SARAS BHAVABHIVYAKTI KE LIYE MEREE
BADHAAEE AUR SHUBH KAMNA SWEEKAR
KIJIYE.
बहुत सुंदर सीमा जी !
मार्मिक भावों की सफल अभिव्यक्ति।
( Treasurer-S. T. )
बहुत मनोरम और प्यारे जज्बात-
मुझे नभ के पार है उड़ जाना.....
जब कश्ती लेकर उतरोगे
तुम झील के गहरे पानी में
इन उठती गिरती लहरों को
चुपके से अधरों से छु जाना
aapki kavita chupke se dil ko chhu gayi...
hmmmmmmmmmmmmmmm.....haan yah baat to phir ik baar dil ko chhoo gayi... jab kashti lekar utroge....aur seema ji aapke samandar men to baadal khud kashti lekar utarte hain....hain naa .....!!
बेहतरीन नज़्म के लिये बधाई सीमा जी...
itani komalta he shbdo me ki bs.., bahut salike se navaazati he aap apni rachnao ko..yahi khoobsoorati he aapki/
bahut hi sunder rachna
ish sunder rachna ke liye dhero badhiya
सुन्दर है जी। झील तो आजकल गंदी संदी होती हैं। आपको कोरी किधर से मिल गयी! :)
seema jee
सुरेश जी द्वारा दिया रूप देखने आया था. वह रूप तो नायाब है ही. पर आपका रूप जो कविता मे दिखा उसके क्या कहने
इन उठती गिरती लहरों को
चुपके से अधरों से छु जाना
सघन भावनाओ को बखूबी बयान किया है आपने.
कश्ती लेकर कैसे उड़ोगी सीमा जी
वायुयान लेकर दूर क्षितिज में जाना
वहां पर आप उड़नतश्तरी को घूमता पायें
तो मत चकराना
न ही चक्कर खाना
घूम फिर कर
9 बजे परिणाम जानने
बताओ तो जानो पर
अवश्य आ जाना।
वे भले ही देर कर दें।
तारो को झोली में भर कर
तेरे प्यार के बहते सागर में
दूर तलक है तर जाना
bahut hi khoobsoorat aur realistic lines ......
regards
aapke ashnkhy readers ne aapki aur aapki rachna ki shan me jo bhi kaha hai bahut sach kaha hai.me speachless.
congratulations and regards
दुनिया की नज़रों से छुप कर
मुझे नभ के पार है उड़ जाना
तारो को झोली में भर कर
तेरे प्यार के बहते सागर में
दूर तलक है तर जाना.....khoobsurat chaht....amazings words....
बहुत उम्दा...बहुत बहुत बधाई....
bappa morya
रूमानी भावनाओं का सुंदर अभिव्यक्ति।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को प्रगति पथ पर ले जाएं।
बहुत सुंदर रचना है और उससे भी अच्छे शब्दकोष हैं। कहाँ से लाती है आप?
बधाई।
दुनिया की नज़रों से छुप कर
मुझे नभ के पार है उड़ जाना
तारो को झोली में भर कर
तेरे प्यार के बहते सागर में
दूर तलक है तर जाना...आभार
सीमा जी, आपके ब्लॉग का चक्कर काट कर आया हूँ. आपके दिल के भावः मन को सुकून पहुंचाते है. आपकी कविताओ से दिल के भावः तो मैं समझ सकता हूँ लेकिन रचना जी ने सही कहा है की इतने सुन्दर शब्द कहा से लाती है आप. वाकई बधाई की पात्र है. हम दोनों में मात्र इतना ही फर्क है की आप शब्दों को पिरो कर कविता लिखती है और मैं गुफ्तगू करता हूँ. आपका भी मेरी गुफ्तगू में स्वागत है. www.gooftgu.blogspot.com
आपकी नयी पोस्ट का इन्तजार है
आभार
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C.M. को प्रतीक्षा है - चैम्पियन की
प्रत्येक बुधवार
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क्रियेटिव मंच
Hamesha ki tarah Laajavaab.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
Adhbhut bhav.
( Treasurer-S. T. )
bahut sunder. bus padhne ke baad yahi laga ki harpal bus padhte hi rahe. maine aapke blog per upalabdh shuru ke lagbhag 10-15 rachnaon ko padha. dil ko chhu lene wali rachnayen hain. bahut badhiya.....
Niranjan.
आसमाँ से नाज़िल हुए अल्फ़ाज़ों का गुलदस्ता है आपकी यह रचना, सीमा जी।
हाँ...हरेक आता हुआ पल इक पल में ही बीता हुआ हो जाता है....बीता हुआ माने इक याद....प्यारी....या कटु....कैसी भी....!!कभी कोई बात इक कविता बन जाती है...और कभी कोई याद......महज इक याद.....इन्हीं यादों के संग....!!
कोमल अहसासों से परिपूर्ण रचना ...पहली बार आयी हूँ आपके ब्लॉग पे ..!
तसवीर देख याद आया ," कश्ती का ख़ामोश सफर .."
'बिखरे सितारे'पे नज़रे इनायत की चाहत है..
बड़े सर्हिदयता से आप सबको साथ ले चले हैं..अपनी किश्ती में कभी हमें भी जगह दें ! अनुकम्पा होगी...जानती,जानती हूँ...इस काबिल बनना होगा!
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