10/30/2008

तेरा ख्याल

"तेरा ख्याल"

तेरा ख्याल था जेहन मे या नाम लबों पर,
आँखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गयी

30 comments:

Rakesh Kaushik said...

subhan allah!
first nof all welcome back after a gap

vahi dhaar hai shabdo me. imagination adbhut?

bahut achche


Rakesh Kaushik

मीत said...

khoobsurat...
आँखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गयी

"Arsh" said...

सीमा जी ,
दीवाली की ढेरो शुभकामना के साथ ,
आंखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गई..
बहोत सुंदर लिखा है आपने..

अर्श

ताऊ रामपुरिया said...

तेरा ख्याल था जेहन मे या नाम लबों पर,
आँखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गयी
बहुत लाजवाब ! आपकी शायरी की कमी अखरी पर आज फ़िर तबियत खिल गई ! शुभकामनाएं !

Shiv Kumar Mishra said...

बहुत खूब!

आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.

जितेन्द़ भगत said...

बारि‍क obsevation है। लाजवाब।

MANVINDER BHIMBER said...

तेरा ख्याल था जेहन मे या नाम लबों पर,

आँखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गयी
बहुत खूब!

GS Bisht said...

सीमा जी आपकी रचनाएँ बहुत उम्दा हें, जिनमें दर्द व तड़प अनायास ही उभर आता है. मैं आपकी रचनाओं का नियमित पाठक हूँ आपसे गुजारिश है कि आप कुछ खुशी व उम्मीद जगाने वाली रचनाएं भी करें .

कुन्नू सिंह said...

खूब अच्छा लीखीं हैं। ईन दो लाईनो मे बहुत कूछ छीपा है। दर्द भी बहुत छीपा है

G M Rajesh said...

kal ro rahi thi meri
nanhi padosan
diwaali kaa din tha
dari thi pataakhon ki awaaj se
khayaal me thi damak
achaanak uthi chamak
bharaa thaa pet magar
maa bhi chup na karaa saki
ek choti halchal aur
muskaan ne labo par aakar
chonkaa hi diyaa
bahlaa na sakaa tha koi magar
vo muskaan aaj bhi yaad to rahaa
aapki post padhne par
aur ho kyon na
aakhir
muskaan hai hi cheej esi

Anonymous said...

is lamha mere saath meri jaan too naheen
ehsaas ki shiddat mujhe bejaan kar gayee

ek pyar ka rishta hai jo janmon se hua saa
ye baat meri zindigi aasaan kar gayee

wo din bhi mujhe yaad hamesha hi rahenge
duniya ko berekhi teri weeraan kar gayee

फ़िरदौस ख़ान said...

तेरा ख्याल था जेहन मे या नाम लबों पर,

आँखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गयी

बहुत ख़ूब...अच्छा ख़्याल है...

Birds Watching Group Ratlam (M.P.) said...

happy new year
of indian mythology

Avinash (Admin) said...

nice lines mam,very nice, you always write very maeningfuln touching lines...keep it up
कभी बादलों से जब धूप की कोई किरण झांकती है,
किसी मोड़ पर तुम्हारे फिर मिल जाने की एक आस जागती है ।

एक किरण के दिख जाने से दूर नहीं होगा अन्धकार,
फिर इन्द्रधनुष बन जाने का सपना क्यों कर होगा साकार ।

अपने पैर घसीटते हुए कब तक चल पाऊंगा लगातार,
फट न पड़ें छाले, कहीं बैठ न जाऊं हो कर लाचार ।

मुझे बचा लेना ज़िन्दगी मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर,
मौत से पहले तुम्हें जी लेना चाहता हूँ एक बार ।

भूतनाथ said...

बहुत लाजवाब ! धन्यवाद !

Udan Tashtari said...

वाह!

डॉ .अनुराग said...

kya baat hai.!

जगदीश त्रिपाठी said...

तेरा ख्याल था जेहन में या नाम लबों पर
आंखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गई
इससे बेहतर अहसासबयानी नहीं हो सकती। और न ही इसकी तारीफ के लिए शब्द हैं।
-
पांव थकते नहीं आस क्या वस्तु है
वो मिलेंगे,ये विश्वास क्या वस्तु है
विष औ अमृत में कुछ भेद रखती नहीं
बावली हो गई प्यास क्या वस्तु है
शूलशय्या पे भी कष्ट मिलता नहीं
दर्द सहने का अभ्यास क्या वस्तु है

प्रहार - महेंद्र मिश्रा said...

तेरा ख्याल था जेहन मे या नाम लबों पर,
आँखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गयी .
बहुत खूब!लाजवाब

Avinash (Admin) said...

जीने का भी वक्त नही

हर खुशी है लोगो के दामन में,
पर एक हॅसी के लिए वक्त नही
दिन रात दौडती दुनिया में,
जिंदगी के लिए वक्त नही
मॉ की लोरी का एहसास तो है,
पर मॉं को मॉ कहने का वक्त नही

सारे रिश्तों को तो हम मार चुके,
अब उन्हे दफनाने का भी वक्त नही
सारे नाम मोबाइल मे है,
पर दोस्ती के लिए वक्त नही
गैरों की क्या बात करे,
जब अपनों के लिए ही वक्त नही

ऑंखो में है नींद बडी,
पर सोने के लिए वक्त नही
दिल तो है गमों से भरा
पर रोने का भी वक्त नही
पैसों की दौड में ऐसे दौडे,
की थकने का भी वक्त नही
पराए एहसानो की कदर करें कैसे,
जब अपने सपनों के लिए ही वक्त नही

तू ही बता ए जिंदगी,
इस जिंदगी का क्या होगा
की हर पल मरने वालों को,
जीने का भी वक्त नही

दीपक "तिवारी साहब" said...

लाजवाब !

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही खुब , अति सुन्दर
धन्यवाद

बवाल said...

बस यही तो ख़ास बात है ना. इतनी बेहतरीन बात इतने सधे अंदाज़ में आप से बेहतर और कौन कहेगा ?

dr. ashok priyaranjan said...

बहुत अच्छा िलखा है आपने ।

http://www.ashokvichar.blogspot.com

अनुपम अग्रवाल said...

आँखों की नमी में डूबी हुई मुस्कान का
इंतज़ार था ख्वाब औ लब पे मेरे नाम का
http://aapkesamne.blogspot.com

अनूप शुक्ल said...

आखों की नमी के तार लब की खुशी से जुड़े हैं। जांच करानी पड़ेगी। शानदार!

"SURE" said...

kisi ka khyaal hi ye kamaal kar sakta hai..aansuo ko khushi me badlana isi ki karaamaat ho sakti hai...
well said

प्रशांत मलिक said...

ab mai kya kahun
hamesha late ho jata hun.
:)

bhoothnath said...

जमीं बिछी थी....पैरों में धूल भर गयी...
इक कतरा जो मिला..बीज को फूल कर गई !!
ऐसा गया वो जो,फिर लौट कर ना आया..
रो-रो कर "गाफिल" मेरी आँखें भी निखर गयीं !!

mukesh said...

bahut acche seema ji is too good,

waqii main bahut kuhbsurat linee likhi hai.