10/22/2008

ख्वाब








''ख्वाब"

बिलख्ती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं,
गोया कांच के टुकड़े हैं जो आंख मे चुभे जाते हैं...

30 comments:

Rakesh Kaushik said...

bahut umda likha hai aapne?


Rakesh Kaushik

'sakhi' 'faiyaz'allahabadi said...

jane hum khwab ko ya khwab humein dekhta hai,
Aankh khultay hi naa jaanay kahaan jaata hai
khwab lagta hi naheen usmein jo tum aate ho
aankh khultee hai to ye khwab hi tadpaata hai
aao ab khwaab ki ek aisee si duniya mein chalein
waqt thum jaaye useelamhe mein jab tumsay milaein
aise soyein ki kabhi aankh na phir se khulay

merakamra said...

बिख्लती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं,
गोया कांच के टुकड़े हैं जो आंख मे चुभे जाते हैं...

seema ji kaisi hain aap?
sher khoob hai bahut umda, agar main galat nahi hoon to yeh bilakhti hone chahiye, shayad typing mistake hui hai, bikhalti ho gaya hai.

seema gupta said...

@ Manuj Mehta jee, ya u are right, it was typing error and i have corrected it. Thanks for making it correct"

Regards

makrand said...

बिख्लती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं,
गोया कांच के टुकड़े हैं जो आंख मे चुभे जाते हैं...

regards
it is easy to see u r post on blogwani

ताऊ रामपुरिया said...

बिलख्ती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं,
गोया कांच के टुकड़े हैं जो आंख मे चुभे जाते हैं...

लाजवाब ! शुभकामनाएं !

Anonymous said...

Bahut hi umda kalpana ki he tumne!
Ek aisi kalpana, ki aankhon me sachmuch kirkiri feel ho..

Only you can do this..
Getting better and better with the time..

भूतनाथ said...

बिलख्ती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं,
गोया कांच के टुकड़े हैं जो आंख मे चुभे जाते हैं...

निहायत खूबसूरत !

रंजन (Ranjan) said...

गुनगुनातें रहें..

Vinay said...

बिलख्ती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं,
गोया कांच के टुकड़े हैं जो आंख मे चुभे जाते हैं...

वाह-वाह!

महेंद्र मिश्र.... said...

गोया कांच के टुकड़े हैं
जो आंख मे चुभे जाते हैं.

behad samvedanasheel...sundar abhivyakti. age kuch kahate hi nahi ban raha hai .abhaar

दीपक "तिवारी साहब" said...

सुन्दरतम अभिव्यक्ति ! तिवारी साहब का सलाम !

manvinder bhimber said...

बिलख्ती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं,
गोया कांच के टुकड़े हैं जो आंख मे चुभे जाते हैं...
सुन्दरतम अभिव्यक्ति

रंजू भाटिया said...

शेर बहुत पसंद आया यह आपका लिखा हुआ ..पूरा लिखे इस पर

Smart Indian said...

बिलख्ती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं,
गोया कांच के टुकड़े हैं जो आंख मे चुभे जाते हैं...

It's different!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

wahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

siddheshwar singh said...

सीमा जी ,
आप नीचे लिखी पंक्तियों को चाहें तो अपने रचना पर टिप्पणी मान सकती हैं , या फ़िर उसकी पुनर्प्रस्तुति-

'कुछ काँच की किरचे हैं,
जो आँखों में बसती हैं.
ये अपनी ही दुनिया में ,
रोती हैं - हँसती हैं !'

कुन्नू सिंह said...

बहुत बढीया, "बिलखती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूं टिमटिमाते हैं"

बहुत बढीया कवीता है।

और आपने एक ईमेज पोस्ट कीया है जीसमे
एक फोटो मे कई फोटो हैं। उसे देख लगा की लगता है ईसे ध्यान से देखना पडेगा।

और 30-40 सेकेंड मे एक फोटो के अंदर कई चेहरे दीख गै।

G M Rajesh said...

kwaabo ki duniyaa hai kuchh esi
aasmaan ko patkhni dun

kirche kanch ke nahi ho sakte aankhon me

are maskhare karega kaise
sirf ultaa hone ki der jo hai

बवाल said...

बहुत ख़ूब सीमाजी ! बहुत कामयाब लिखा है आपने !! अहा ! क्या कहना ?

श्रीकांत पाराशर said...

Seemaji, Kewal do linon men bhi gazab dhaya ja sakta hai, yah sabit karti hain aapki panktiyan.

"अर्श" said...

chand lafzon me bejod bat kahne ki umda chhamata hai aapme seema ji..

aapko dhero badhai iske liye...


regards
Arsh

जितेन्द़ भगत said...

sunder kalpana.

राज भाटिय़ा said...

सीमा जी सच मै आप के शेर पढ कर हमारी टिपण्णियो की सीमा ही खत्म हो जाती है, यानि हमारी तारीफ़ भी फ़ीकी लगती है, बहुत ही उम्दा.
धन्यवाद

योगेन्द्र मौदगिल said...

बहुत बेहतर
साधुवाद

डा. अमर कुमार said...

बेहतरीन ख़्यालात

प्रशांत मलिक said...

lajvaab hai ji

or unka kya jo edhar udhar likhi hui hain

jaise
बनके अश्क मेरी आँखों मे,
तुम बस गए हो उमर भर के लिए ,
कैसे तुम्हें दर्द दिखलाऊं मैं ,
अंदाजे बयान मैंने सीखा नही

en pe kaise comments kiya jaye...

नारदमुनि said...

hara jagat duhai dekar,dai aakhar kee har bar,radha ka yadi nam likhe to meera bhee diwani likh.

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

kabhi sunaa thaa.......
aankho men jo bhar loge to kaanton se chubhenge....ye khwaab to palkon pe sajaane ke liye hain....

Mukesh Garg said...

very nice seema ji


mujhe kuch adhura -adhura si line lag rahi hai gar aap isko pura karde to ye or bhi umdda ho jayengi