6/21/2017

कोई दरमान नहीं मिलता

Koi DarmaN Nahi Milta"
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Suno jaana

Bahut kuch tum say kehna Hai... 

Nahi ab chup sa rehna Hai.....

Ajab jazbat hain dil men

Naye naghmat hain dil men

Ajab si ek tamanna jo

Hamare dil me palti hai.

Machalti hai chalakti hai

Homak kar banheen phailati

Wo jaise..

Koi nadaan bachchi ho

Kabhi aansu chalakte haIn

Kabhi ek khowf taari hai

Kisi ko Kia batayein ham

hamara dil nahi lagta.

Hamaray man k sagar men

nai mowjeen obharti hain.

Naiy toofan atay hain.

Hamaray dil k aaNgan men

Yahi mehman atay hain

Hua hai Kia ajab ham ko

Hai dil me zakhm bhi aisa

Koi marham nahi jiska

Asar ki be- yaqeeni say

Dua bhi kaNp jati hai

Koi darmaN nahi milta

Koi chara nahi milta
(Seema)
कोई दरमान नहीं मिलता
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सुनो जाना
बहुत कुछ तुमसे कहना है
नहीं अब चुप सा रहना है
अज़ब जज़्बात हैं दिल में
नये नगमात हैं दिल में
अज़ब सी एक तमनना जो
हमारे दिल में पलती है
मचलती है छलकती है
हुमक कर बाहें फैलाती
वो जैसे....
कोई नादान बच्ची हो
कभी आँसु छलकते हैं
कभी एक खोफ़ तारी है
किसी को क्या बताएँ हम
हमारा दिल नहीं लगता
हमारे मन के सागर में
नई मोंजें उभरती हैं
नए तुफ़ान आते हैं
हमारे दिल के आँगन में
यही मेहमान आते हैं
हुआ है क्या अजब हम को
है दिल में ज़ख्म भी ऐसा
कोई मरहम नहीं जिसका
असर की बे यकीनी से
दुआ भी कांप जाती है
कोई दरमान नहीं मिलता
कोई चारा नहीं मिलता

6/06/2017

5/31/2017

"इश्क़-मंतर"

"ISHQ MANTAR"
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Jism ki deewaroN se
Mit'ti khroNch kar
Rooh dariya ke kinaron par
Khanakte saazoN ki raftaar par
Ujle chaaNd ke libaas par
Sehra ki bilakhti pyaas par
Siyah raat ki azaab sanson ki
Parwaaz par
Likha hai ishq mantar
Isi tilism ko padh kar
RasmoN ki deewaroN ko yaksar dhaa kar
Sochti huN kuchh likhuN
Or
Ishq ki bunyaad se phuti
HarsuN phaili mit'ti ki soNdhi khushbu
Mere shabdoN ko lobaan bana de....
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"इश्क़-मंतर"
जिस्म की दीवारों से
मिट्टी खरोंच कर
रूह-दरिया के किनारों पर
खनकते साज़ों की रफ़्तार पर
उजले चाँद के लिबgास पर
सहरा की बिलखती प्यास पर
सियाह रात की अज़ाब साँसों की
परवाज पर
लिखा है इश्क़-मंतर..
इसी. तिलिस्म को पढ़ कर...
रस्मों की दीवारों को यक्सर ढा कर
सोचती हूँ ..कुछ लिखूँ
और
इश्क की बुन्याद से फूटी
हर सूं फैली मिट्टी की सोंधी खुश्बू....
मेरे शब्दों को लोबान बना दे..
(Seema)

3/05/2017

Sanson mein mehkti hai- Urdu Poetry

Dil or dharkta kiyon hai ...Seema Gupta ...Vineet Pandit





Lyrics and Graphics: Seema Gupta
Music Composition and Singing : Vineet Pandit
Ghazal:
usko dekhoon toh ye dil or dharkta kiyon hai
aks iska meri aankhon meiN bikharta kiyoN hai...
vo na izhaar kare baat alag hai lekin
Dekh kar mujhko bhala or sanwarta kiyon hai
raat bhar chand ne choomi hai teri peshaani
usko afsos hai sooraj ye nikalta kiyoN hai
guftugu mein jo tera zikr kabhi aa jaaye
dard toofaN ki tarah dil meiN machalta kiyoN hai
sochti rehti hooN fursat mei yehi maiN"Seema"
kaam jo hona hai aakhir wohi tal-taa kiyoN hai

7/12/2016

Ghazal- मेरे चेहरे पे जो कहानी है

Lyrics/ Graphics: Seema Gupta
Singer / Composer - Naushad Malik
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मेरे चेहरे पे जो कहानी है
मेरे दिल की ही तर्जुमानी है

नींद आँखों में जागती ही रही
गरचे रातों की ख़ाक छानी है

उसकी सूरत ग़ज़ल में ढाली है
उस में तस्वीर अब बनानी है

दो घडी के लिए ही आ जाओ
छोडिये जो भी बदगुमानी है

जोड़ना दिल से दिल नहीं मुश्किल
एक दीवार बस गिरानी है

इस में खुशियाँ बिखेर दे सीमा
चार दिन के ये जिंदगानी है

6/30/2016

SAD URDU POETRY .......Mohabbat Mom Hoti Hai..





Lyrics and Graphics: Seema Gupta

Voice: Zahid Nisar

सुना है उसकी आँखों से

हमेशा बर्फ  गिरती है

वो जब खामोश होती है

क़यामत काँप  जाती है

वो अपने पावं  के छालों पे

मरहम भी नहीं रखती

वो अपने जिस्म -ओ - जां में

इश्क़ की सरहद नहीं रखती

उसे मतलब नहीं

बाम-ए-फ़लक के चाँद तारों से

उसे तो रब्त है

सदियों पुराने ग़म गुसारों  से

कोई तो उसको समझाए

मोहब्बत मोम होती है

कभी ऐसा भी होता है

मोहब्बत में

मोहब्बत से

मोहब्बत टूट  जाती है

मोहब्बत मोम होती है

मोहब्बत मोम होती है ......