8/09/2015

6/23/2015

SAD URDU POETRY .......Mohabbat Mom Hoti Hai..





Lyrics and Graphics: Seema Gupta

Voice: Zahid Nisar

सुना है उसकी आँखों से

हमेशा बर्फ  गिरती है

वो जब खामोश होती है

क़यामत काँप  जाती है

वो अपने पावं  के छालों पे

मरहम भी नहीं रखती

वो अपने जिस्म -ओ - जां में

इश्क़ की सरहद नहीं रखती

उसे मतलब नहीं

बाम-ए-फ़लक के चाँद तारों से

उसे तो रब्त है

सदियों पुराने ग़म गुसारों  से

कोई तो उसको समझाए

मोहब्बत मोम होती है

कभी ऐसा भी होता है

मोहब्बत में

मोहब्बत से

मोहब्बत टूट  जाती है

मोहब्बत मोम होती है

मोहब्बत मोम होती है ......

12/03/2014

" आगमन तेजस्विनी सम्मान -2014 "

"कनाडा से प्रकाशित होने वाली साहित्यिक पत्रिका " साहित्य कुंज " के दिसम्बर प्रथम अंक में प्रकाशित" : Online link :

http://www.sahityakunj.net/SAMACHAR/India/Seema_Gupta_aagamantejasvinisamman_2014.htm
दिनांक 23/11/2014 को आगमन के संस्थापक पवन जैन और आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा आयोजित पुस्तक लोकार्पण , वार्षिक सम्मान समारोह-2014 , कविसम्मेलन एवं मुशायरा का भव्य आयोजन कैलाश अस्पताल,नोयडा-27 में हुआ. इस अवसर पर " आगमन सम्मान चयन समिति " द्वारा महिला उधमी , सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता ,अंतर्राष्टीय स्तर पर प्रकाशित लेखिका , कवयित्री एवं शायरा सुश्री सीमा गुप्ता ((गुडगाँव हरयाणा)) को " आगमन तेजस्विनी सम्मान -2014 " से सम्मानित किया गया .
सुश्री सीमा गुप्ता को " आगमन तेजस्विनी सम्मान" डॉ केशरी लाल वर्मा (चेयरमैन तकनिकी एवं वैज्ञानिक शब्दावली आयोग एवं निदेशक केन्द्रीय हिंदी निदेशालय भारत सरकार नई दिल्ली) , एवं डॉ मधुप मोहटा (भारीतय विदेश सेवा वरिष्ट सलाहकार ) दवारा प्रदान किया गया

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथिगण श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी (उपमहानिदेशक आकाशवाणी नई दिल्ली ) डॉ हरी सुमन बिष्ट (सचिव हिंदी अकादमी दिल्ली) , डॉ रमा सिंह (सदस्य केंद्रीय हिंदी समिति भारत सरकार नई दिल्ली ) , श्री अलोक यादव ( क्षत्रिय भविष्य निधि आयुक्त बरेली ) और देश के अनेक वरिष्ट साहित्यकारों ने कार्यकर्म की शोभा बढ़ाई।






7/06/2014

Ghazal- मेरे चेहरे पे जो कहानी है

Lyrics/ Graphics: Seema Gupta
Singer / Composer - Naushad Malik
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मेरे चेहरे पे जो कहानी है
मेरे दिल की ही तर्जुमानी है

नींद आँखों में जागती ही रही
गरचे रातों की ख़ाक छानी है

उसकी सूरत ग़ज़ल में ढाली है
उस में तस्वीर अब बनानी है

दो घडी के लिए ही आ जाओ
छोडिये जो भी बदगुमानी है

जोड़ना दिल से दिल नहीं मुश्किल
एक दीवार बस गिरानी है

इस में खुशियाँ बिखेर दे सीमा
चार दिन के ये जिंदगानी है

4/30/2014

"उस रात की बात.... "


"उस रात की बात.... "

चांदनी की सरगोशियाँ में

नहा कर मचलता

सियाह रात का हुस्न

उसपे बेख़ौफ़ होकर तेरे बाजुओं में

रुसवाइयों की थकन का पनाह पा जाना

लबों की चुप्पियों में दफ़न

इश्क का वो अंगारा

अचानक से

जिस्म की सरहदों से

झाँकने लगा है

कब तक छुप सकेगी

जमाने से आखिर

"उस रात की बात.... "

4/23/2014

"दुष्यंत की अंगूठी "


"दुष्यंत की अंगूठी "

मेरी ठिठकी हुई पलकों में 
सदियों से उलझा एक लम्हा 
जिसे अपनी आँखों से छु कर
तुने मेरे नाम कर दिया था
और तेरे अश्क के एक कतरे ने
तुझसे छुप कर
मेरी आँखों में पनाह ली थी
इश्क की अधूरी चांदनी का
हिसाब मांगने ज़िद पे उतर आया है
सिसकने लगा है मेरी हथेली पे
वो बदनसीब कतरा भी
दुष्यंत की अंगूठी की तरह