10/20/2008

मौत की रफ़्तार






"मौत की रफ़्तार"

आज कुछ गिर के टूट के चटक गया शायद ..

एहसास की खामोशी ऐसे क्यूँ कम्पकपाने लगी ..

ऑंखें बोजिल , रूह तन्हा , बेजान सा जिस्म ..

वीरानो की दरारों से कैसी आवाजें लगी...

दीवारों दर के जरोखे मे कोई दबिश हुई ...

यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...


http://hindivani.blogspot.com/2008/10/blog-post_23.html

30 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

दीवारों दर के जरोखे मे कोई दबिश हुई ...
यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...
बहुत गहरी मनोदशा का चित्रण ! सफलतम अभिव्यक्ति ! शुभकामनाएं !

रंजना [रंजू भाटिया] said...

एहसास की खामोशी ऐसे क्यूँ कम्पकपाने लगी ..

बहुत खूब .

Anil Pusadkar said...

अद्भुत भाव,सुन्दर रचना,हमेशा कि तरह्।

Rakesh said...

Very nice poem ..... :)

mamta said...

बेहद खूबसूरत रचना ।

संदीप शर्मा Sandeep sharma said...

दीवारों दर के जरोखे मे कोई दबिश हुई
यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी

बेहद उम्दा...

मीत said...

सच कहा है मौत की खामोशी तो आयी और मेरे भाई को ले गई...
१३-अक्टूबर को एक प्लेन ब्लास्ट में उसकी मौत हो गई... वो indian navy में इंजिनियर था...
इस वक्त में बहुत बुरे दौर से गुज़र रहा हूँ...

COMMON MAN said...

wah ke alawa main aur kuchh nahi kah sakta, is wah me ah bhi shamil hai

seema gupta said...

@ Meet jee , its really very very painful to know abt lost of your brothers life. I can feel the time you are facing with pain sorrow and grief as nothing can fulfil this loss in your life. I have no words to express my grief towards this loss. i am with your family in this bad phase and pray to god to give you and your family courage to bear it and peace to the soul of your brother.."

ताऊ रामपुरिया said...

@मीत said...
सच कहा है मौत की खामोशी तो आयी और मेरे भाई को ले गई...
आपके दुःख में हम आपके साथ हैं ! ईश्वर से, भाई की आत्मा की शान्ति की प्रार्थना के साथ २ परिवार को इसे सहन करने की क्षमता दे ! यही प्रार्थना है !

भूतनाथ said...

यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...
बेहतरीन रचना ! शुभकामनाएं !

नीरज गोस्वामी said...

ऑंखें बोजिल , रूह तन्हा , बेजान सा जिस्म ..
वीरानो की दरारों से कैसी आवाजें लगी...
लाजवाब शब्द...एक बहुत उदास रचना....
नीरज

sumansourabh said...

सुंदर विचार

फ़िरदौस ख़ान said...

आज कुछ गिर के टूट के चटक गया शायद ..
एहसास की खामोशी ऐसे क्यूँ कम्पकपाने लगी ..
ऑंखें बोजिल , रूह तन्हा , बेजान सा जिस्म ..
वीरानो की दरारों से कैसी आवाजें लगी...

बेहद उम्दा...

makrand said...

दीवारों दर के जरोखे मे कोई दबिश हुई ...



यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...

again a wonder ful lines
regards

Anonymous said...

kisi ne kaha hai:

zindigi kitni hi sangdil hi sahi
maut aakhir ko meherbaan hogi

'sakhi' 'faiyaz'allahabadi said...

khamoshi guftgu kar rahi hai
maut mein zindigi dekhte hain

ghum ke dariya se bah kar ke aayi
ek nayee hum khushi dekhte hain

जितेन्द़ भगत said...

सुंदर कथन-

दीवारों दर के जरोखे मे कोई दबिश हुई ...
यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...

डॉ .अनुराग said...

दबे पाँव ही आती है.....मौत

सचिन मिश्रा said...

Bahut khub.

Prakash singh "Arsh" said...

आज कुछ गिर के टूट के चटक गया शायद ..


kya gazab ki umda bat kah di seema ji aapne ... gazab ki umda sonch ka parichaya milta hai is rachana se .. aapko dhero badhai ....

meet sahab ke dukh me main v shamil hun... bahot hi dukhad ghatana hai bahot hi dukh bhara..

Arsh

"SURE" said...

एहसास दिला गई फिर कई जुदाइयों का
गम्नीन कर गई फिर से दिल को रुला दिया
आपकी इस रचना ने न जाने क्या हलचल सी पैदा कर दी है ...कई चेहरे आँखों के आगे घूम रहे है जिनका वजूद सिर्फ और सिर्फ अब मेरी यादों में ही है..आज ही अपने किसी सम्बन्धी की चिता को देख कर आ रहा हूँ ....रुदन क्रंदन और फिर आप की ये रचना .........बहुत ही सामयिक लिखा है मेरे लिए तो

राज भाटिय़ा said...

सीमा जी बहुत ही सुन्दर...
यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...
धन्यवाद

bavaal said...

बहुत लाजवाब ! क्या कहना ? रफ़्तार- ऐ- मौत का !

bhoothnath said...

हा-.हा-हा-हा ......मौत की कोई रफ्तार नही होती ../दबे पाव ..चुपचाप आती है ....(हल्ला करने को हम मनुष्य हैं ना !!)
और आते एसा झपट्टा मार कर ले जाती है कि आप उसे देखकर वापस आँख बंद तक नहीं कर पाते.... आप देखना जब मेरी मौत आए ....उसे किसी प्रेयसी कि तरह देखता हुआ ही मरूँगा..सच !!.

G M Rajesh said...

dabe paanv choro ki tarahaa
khamoshi se kuchh alahda

samay bhi gujar jaya kartaa hai
hum haatha malte ,

dekhte rah jaate hain aur vo, gujar jataa hai

maut ki taraah

मोहन वशिष्‍ठ said...

यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...

वाह जी वाह लिखते रहो

mukesh said...

ek dam sach hai ye jiwan main kab kiske pass kab mout aa jaye pata hi nhi . isiliye to kehte hai ki bhali karte chlao na jane kab mout aa jaye or sada ke liye hum gehri nend main so jaye. kaam acche honge to log yaad to karenge or duaee denge.

Avinash (Admin) said...

nicely written
"Chehrey isliye yaad rakhte hai taki Muh pher sakey"

Avinash (Admin) said...

You said before you died,
that I was the key to your heart.
But the truth is you were mine.
I ask the Lord above,
to answer my prayers.
That you would come back.
But, that wouldn't be fair.
I now know that you're happy where you are.
Safe in the arms of Jesus,
without any cares.
But I want you to know,
that I still love you so.
And I'll go on living for Him,
Knowing that His light will never dim.
Someday together we'll be,
But, until then, the Lord will take care of me.
So, keep on watching,
It won't be long.
That from this world,
I'll be gone.
Into your arms once again,
Safe from all the worldly harm.