8/30/2008

दस्तक



"दस्तक"
अपने ही साये से ,
"आज"
खौफजदा से हैं,
फ़िर किसी तूफ़ान ने,
दस्तक दी होगी..............दिले - मुजतर के दाग की,

"रोशनी गहरी"

हाजत कहाँ सियाह रात मे ,

महे- ताबां ठहरी
(दिले - मुजतर - बेचैन दिल, हाजत - जरूरत ,

महे- ताबां - चमकते चाँद )

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_02.html

19 comments:

Rakesh said...

फ़िर किसी तूफ़ान ने,
दस्तक दी होगी...............
wah wah , kya kahne .......aaj kal shayariyo par meharbani hain ........

VIRENDER JAIN said...

seemaji, bhut khub
Aaj kaif bhopali ki gazal ke kuchh sher-

KAUN AAYEGA YAHAN KOI NAA AAYA HOGA
MERA DARWAZA HAWAON NE HILAAYA HOGA
GUL SE LIPATEE HUYEE TITALEE KO UDHA KAR DEKHO
AANDHIYO TUMANE DARKHTON KO GIRAYA HOGA

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत खुबसूरत .. बधाई !

makrand said...

अपने ही साये से ,
"आज"
खौफजदा से हैं,
फ़िर किसी तूफ़ान ने,
दस्तक दी होगी...............


नमन है आपको ! सुन्दरतम !

Rakesh Kaushik said...

it's nice but i think u can add something more in atleast one passage.

Rakesh Kaushik

Anil Pusadkar said...

kyaa baat hai.

Rakesh Kaushik said...

ya now it look like complete. n meaning full. thnx for considering my advise.

seema gupta said...

"thanks to all the readers for their valuable comments, Rakesh kaushik jee thanks for your suggestion"

Regards

मीत said...

दिले - मुजतर के दाग की,
"रोशनी गहरी"
हाजत कहाँ सियाह रात मे ,
महे- ताबां ठहरी
bahut hi acha likha hai

G M Rajesh said...

fine

नीरज गोस्वामी said...

हमेशा की तरह...बहुत अच्छी रचना...
नीरज

अनुराग said...

अपने ही साये से ,
"आज"
खौफजदा से हैं,
फ़िर किसी तूफ़ान ने,
दस्तक दी होगी.............


bahut khoob.......

apurn said...

baap re ab aap humri samjh ke upar ke level pe ho
sirf wah he kar sakte hain
achha hai jo aapne shabdo ke saral arth bhi likh diye hain warna hume to samjh nahin aata

"SURE" said...

अपने ही साये से ,
"आज"
खौफजदा से हैं,
फ़िर किसी तूफ़ान ने,
दस्तक दी होगी...............
बहुत प्रभावशाली पंक्तियाँ है,उर्दू अल्फाजों का हिंदी में तुरजुमा पाकर बात कुछ आसां लगी ,

महेंद्र मिश्रा said...

अपने ही साये से ,
"आज"
खौफजदा से हैं,
फ़िर किसी तूफ़ान ने,
दस्तक दी होगी.
बहुत अच्छी रचना...बधाई.

राज भाटिय़ा said...

अपने ही साये से ....
बहुत ही सुन्दर भाव
धन्यवाद

Advocate Rashmi saurana said...

bhut sundar. badhai ho.

hemant said...

painting ka chayan kabile tarif hai.

mukesh said...

very nice it's to good

kiya khub likha hai



अपने ही साये से ,
"आज"
खौफजदा से हैं,
फ़िर किसी तूफ़ान ने,
दस्तक दी होगी...