8/19/2008

"काश"



"काश"


तेरे साथ गुजरे,
" लम्हों"
की कसक,
आज भी
दिल मे बाकी है,
"काश "
वो मौसम
वो समा
फ़िर से बंधे

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/08/blog-post_7837.html

12 comments:

पंगेबाज said...

"थाने मे गुजरी
उस रात
की कसक
आज भी
दिल मे बाकी है
काश
वो
माजरा
फ़िर कभी ना हो "

seema gupta said...

" ah! thane ke raat ka majra aap kaisee jaan gye, humne to sub se chupa ke rekha tha arun jee, kya ye bhee apke khabree sudama kee kareestanee hai ha ha ha , yaad dilane ke liye bhut bhut shukriya"

Regards

'sakhi' 'faiyaz'allahabadi said...

Dear Seema,

Yeh kasak bhi kitnee shadeed hai,lamha lamha iskee yadonn ko lekar aaj tak bechain kar raha hai. Kaash guzra waqt waapas aajaye, lekin ......................kya aisa hosakta hai. Agar ho jaaye aiy 'KAASH'.............

मीत said...

Sahi hai.

Anil Pusadkar said...

sunder

बालकिशन said...

बहुत खूब.
बेहतरीन..... उम्दा
पढ़कर अच्छा लगा.

G M Rajesh said...

nice one

शोभा said...

बहुत सुन्दर लिखा है। पढ़कर आनन्द आगया। बधाई स्वीकारें।

अनुराग said...

bahut khoob......

"SURE" said...

काश ये काश न होता,
यहाँ जमीन न होती
वहां आकाश न होता
कोई आम न होता
कोई खास न होता
बहुत कुछ होता है
और ये काश न होता
मेरी उम्मीदें न टूटती
तेरा दिल हताश न होता
तुम पास मेरे होती
मै उदास न होता
बनती न मूरतें हसीं
गर ज़नूनी संगतराश न होता

Udan Tashtari said...

बढ़िया.

Prakash singh "Arsh" said...

achhi rachana hai .....badhai.....


regards
"Arsh"