7/08/2008

मृगतृष्णा





कैसी ये मृगतृष्णा मेरी
ढूँढ़ा तुमको तकदीरों में
चन्दा की सब तहरीरों में
हाथों की धुँधली लकीरों में
मौजूद हो तुम मौजूद हो तुम
इन आखों की तस्वीरों में


कैसी ये ......................

अम्बर के झिलमिल तारों में
सावन में रिमझिम फुहारों में
लहरो के उजले किनारों में
तुमको पाया तुमको पाया
प्रेम-विरह अश्रुधारों मे

कैसी ये.........................

ढूँढ़ा तुमको दिन रातो में
ख्वाबों ख्यालों जज्बातों में
उलझे से कुछ सवालातों में
बसते हो तुम बसते हो तुम
साँसों की लय में बातों में
कैसी ये..........................

ढूँढी सब खमोश अदायें
गुमसुम खोयी खोयी सदायें
बोझिल साँसें गर्म हवायें
मुझे दिखे तुम मुझे दिखे तुम
हर्फ बने जब उठी दुआऐं

कैसी ये मृगतृष्णा मेरी

कैसी ये.....................

13 comments:

Anonymous said...

Excellent!!

Superb, Dil Bagh Bagh Ho Gaya!!!

Wonderful Wordings Seema

"amit verma"

Anonymous said...

harf banay jab utheen duaayen
rahmat kee dehleez pay jakar
sajday kartee meri nawaayen
aasmaan kay takht ko pakday
harfon kee bay awaaz sadaayen
lagtaa hai woh sun lee gayeen hain...............

Seema say aaj roobaroo ho raha hoon aisa lag raha hai ..................justujoo thee yehi aisa lag raha hai ................
...............'pardarsh'

Anonymous said...

harf bane jab utthi duvayen.......

kitna touching vivrnn hai ,,,what an absolute dynamism of searching His existance in different segments of being.
mrigtrishna nahi hai ye.... its the right path to find the lost part of being....only this is the only way..to go there.......
bahut paripakv vicharon ka tana bana ....
perfect poetry.....
"surender Kumar"

महेंद्र मिश्रा said...

कैसी ये मृगतृष्णा मेरी.
bahut badhiya abhivyakti. abhaar

Rocky said...

तुमको पाया तुमको पाया
प्रेम-विरह अश्रुधारों मे
Very nice seema , really touching....

मोहन वशिष्‍ठ said...

सीमा जी very very nice thanx to you and all readers too बहुत अच्‍छा लिखा और आज वाजपेयी जी भी बहुत याद आ गए वाकई कोई सानी नहीं है आपका इस दर्द की महफिल में बधाई हो आपको

advocate rashmi saurana said...

seemaji. aapki rachana har bar ki tarha bhut badhiya hai. aapki rachana ki tarif ke liye mere paas sabd hi nahi hai. likhati rhe. aap ne jis gaane ke liye likha tha vo mene kal post kar diya tha. aap use http://thodasasukun.blogspot.com par sun sakti hai.

vipinkizindagi said...

Breathtaking……. marvelous

बाद मुद्दत के वो आया होगा,
मेरी आँख मैं जो आँसू आया होगा,
तेरे ग़म में तो शामिल ना था,
मगर तेरे ग़म में मेरा ग़म तो आया होगा

योगेन्द्र मौदगिल said...

मृगतृष्णा से पार ना पाया जग में कोई सीमा जी.
इसके आगे वृथा कहानी-किस्सागोई सीमा जी.
मन को समझाना-सुलझाना सब के बस की बात नहीं,
कब तक ऐसे गीत लिखोगी खोई-खोई सीमा जी.

बहुत सुन्दर है आपकी अभिव्यक्ति, साधुवाद स्वीकारें.

Udan Tashtari said...

ढूँढी सब खमोश अदायें
गुमसुम खोयी खोयी सदायें
बोझिल साँसें गर्म हवायें
मुझे दिखे तुम मुझे दिखे तुम

हर्फ बने जब उठी दुआऐं


कैसी ये मृगतृष्णा मेरी



--बेहतरीन रचना!! बधाई.

प्रभाकर पाण्डेय said...

सुंदरतम रचना।

advocate rashmi saurana said...

ढूँढी सब खमोश अदायें
गुमसुम खोयी खोयी सदायें
बोझिल साँसें गर्म हवायें
मुझे दिखे तुम मुझे दिखे तुम
bhut achhe. jari rhe.

mukesh said...

कैसी ये मृगतृष्णा मेरी
ढूँढ़ा तुमको तकदीरों में
चन्दा की सब तहरीरों में
हाथों की धुँधली लकीरों में
मौजूद हो तुम मौजूद हो तुम
इन आखों की तस्वीरों में



wounderful seema ji,

fir se dher sari badhiya