Showing posts with label रंगकर्मी. Show all posts
Showing posts with label रंगकर्मी. Show all posts

2/04/2009

"एहसास "

"एहसास"

हर साँस मे जर्रा जर्रा
पलता है कुछ,
यूँ लगे साथ मेरे
चलता है कुछ.
सोच की गागर से
निकल शब्द बन
अधरों पे खामोशी से
मचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
जो मोम बनके मुझमे ,
बर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ

http://vangmaypatrika.blogspot.com/
http://swargvibha.0fees.net/march2009/Kavita/seema%20gupta.html

12/27/2008

"हाल-ऐ-दिल"


"हाल-ऐ-दिल"

पलकों पे आए और भिगाते चले गए,
आंसू तुम्हारे फूल खिलाते चले गए..

तुमने कहा था हाल-ऐ-दिल हम बयाँ करें
हम पूरी रात तुम को बताते चले गए...

मुद्द्त के बाद बोझिल पलकें जो हो रही,,
हम लोरियों से तुम को सुलाते चले गए...

तुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम,
तुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए....

अब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही,
हम तुम पे अपना बोझ बढाते चले गए ........


http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/08/blog-post_27.html

12/15/2008

"दृष्टि "

"दृष्टि"

अनंतकाल से ये दृष्टि
प्रतीक्षा पग पर अडिग ,
पलकों के आंचल से
सर को ढांक ,
आतुरता की सीमा लाँघ
अविरल अश्रुधारा मे
डूबती , तरती , उभरती ,
व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये दृष्टि
प्रतीक्षा पग पर अडिग




12/12/2008

मौन का उपवास



"मौन का उपवास"

अनुभूतियों का आचरण

शालीन सभ्य सह्रदय हुआ,

और भावः भी चुप चाप हैं,

अधरों पे आके थम गया

शब्दों का बढ़ता कारवां,

स्वर कंठ में लुप्त हुए,

क्या "मौन" का उपवास है


http://swargvibhaeditions.t35.com/jan2009/kavita/seema%20gupta.html

12/10/2008

"मायाजाल"

" मायाजाल"

ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे,
यथार्थ को दरकिनार कर
कुछ स्वप्नों ने सांसे भरी...
छलावों की हवाएं बहती रही
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
कायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
द्रढ़निश्चयता का उपहास कर
संकल्प मायाजाल में उलझते रहे,
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...

12/06/2008

"तुम बिन "


"तुम बिन " हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा,
साजों मे भी अब तार नही..
बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
शब्दों मे भी वो सार नही...
जज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
भावों मे मिलता करार नही...
तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
क्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
रोकूँ कैसे अधिकार नही ...
तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
मिलने के मगर आसार नही.....


12/04/2008

शब्दों की वादियाँ



"शब्दों की वादियाँ"

शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण ,
जो सजा सके मनोभावों को,
चाहत के सुंदर साजों को,
लुकती छुपती अभिलाषा को,
नैनो मे दुबकी जिज्ञासा को,
सिमटी सकुचाई आशा को,
निश्चल प्रेम की भाषा को,
शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण............

11/13/2008

"काफी है "

"काफी है "

वफ़ा का मेरी अब और क्या हसीं इनाम मिले मुझको,
जिन्दगी भर दगाबाजी का सिर पे एक इल्जाम काफी है.
बनके दीवार दुनिया के निशाने खंजर से बचाया था,
होठ सी के नाम को भी राजे दिल मे छुपाया था,
उसी महबूब के हाथों यूं नामे-ऐ -बदनाम काफी है ...
यादों मे जागकर जिनकी रात भर आँखों को जलाते थे ,
सोच कर पल पल उनकी बात होश तक भी गवाते थे ,
मुकम-ऐ- मोह्हब्त मे मिली तन्हाई का एहसान काफी है….
कभी लम्बी लम्बी मुलाकतें, और सर्द वो चांदनी रातें,
चाहत से भरे नगमे अब वो अफसाने अधुरें है ,
जीने को सिर्फ़ जहर –ऐ - जुदाई का ये भी अंजाम काफी है

11/03/2008

"वीरानो मे"






"वीरानो मे"

खामोश से वीरानो मे,
साया पनाह ढूंढा करे,
गुमसुम सी राह न जाने,
किन कदमो का निशां ढूंढा करे..........
लम्हा लम्हा परेशान,
दर्द की झनझनाहट से,
आसरा किसकी गर्म हथेली का,
रूह बेजां ढूंढा करे..........
सिमटी सकुचाई सी रात,
जख्म लिए दोनों हाथ,
दर्द-ऐ-जीगर सजाने को,
किसका मकां ढूंढा करें ...........
सहम के जर्द हुई जाती ,
गोया सिहरन की भी रगें ,
थरथराते जिस्म मे गुनगुनाहट,

सांसें बेजुबां ढूंढा करें................



http://rachanakar.blogspot.com/2008/11/blog-post_25.html

9/15/2008

"किसको पता"


"किसको पता"

कोई गोली कहाँ चलेगी , किसको पता,
कोई बम्ब कहाँ फटेगा, किसको पता,

आज अभी तुम मांग सजा लो,
बिंदीया लगा लो,
कब ये मांग सूनी हो जाए किसको पता???

हरी-हरी ये कांच की चूडी जो मन भाए,
गोरे-गोरे हाथों पर तुम इन्हे सजा लो,
कब ये हाथ सुने हो जायें किसको पता???

अपने बाबा की गोदी पर आज ही चढ़कर,
अपने सारी की सारी जिद्द पुरी कर लो,
कब तुम भी लावारिस बन जाओ किसको पता???

नन्ही आँखों से सपना मत देखो ,
की तुम पायलट बनोगे,
कब नीला अम्बर शमशान बन जाए किसको पता???

आओ हम सब मिलकर कुछ ऐसा कर जायें,
हम हिन्दुस्तानी नही झुकेंगे- नही झुकेंगे,
चल जाएगा सब को पता -सब को पता"

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_8542.html

9/11/2008

"आशनाई "






"आशनाई"


'नज़र से नज़र"
कभी मिलाई तो होती....
दिल की बात कभी हमसे भी,
बनाई तो होती....
क्यूँ कर रही शबे-फुरकत से'
आशनाई सारी रात.....
कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "

(शबे फुरकत- विरह की रात )

9/06/2008

सजा


"सजा"

आज ख़ुद को एक बेरहम सजा दी मैंने ,
एक तस्वीर थी तेरी वो जला दी मैंने
तेरे वो खत जो मुझे रुला जाते थे
भीगा के आंसुओं से उनमे भी,
" आग लगा दी मैंने ..."

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_06.html

8/02/2008

कतरा कतरा




"कतरा कतरा"



कतरा कतरा दरया देखा ,
कतरे को दरया में न देखा ,
लम्हा लम्हा जीवन पाया,
जीवित एक लम्हे को न पाया,
आओ हम दोनों मिलकर
एक लम्हे को जिंदा कर दें,
प्रेम प्रणव से जीवन भर दें

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_05.html

7/31/2008

ब्लास्ट्स के बाद और कल की खबर के बाद की सुरत मे कुछ बम बरामद किये गये आज अचानक अपनी ही लिखी पुरानी कुछ पंक्तियाँ याद आ गयी ...........

जिनमे सवाल तो हजार हैं पर शायद जवाव एक का भी नही ,क्या आपके पास .........????????



"आतंकवाद"


आतंकवादीयों को मुह तोड़ जवाब ,
अखीर कब दिया जाएगा,
क्या यूँही देखते रहेंगे हम ???
और वक्त निकल जाएगा...........
भगवान ने तो बस इंसान बनाये ,
फ़िर ये आतंकवादी कहाँ से आए???
इस सवाल का जवाब कब
और किस्से लिया जाएगा .......
गुमराह करके नौजवानों को
आतंक का जहर पिलाते हैं जो
उन्हें प्रेम की धारा का अम्रत
आखिर कब पिलाया जाएगा???
जिस्म पर बम लगाकर,
हमे बर्बाद करते है जो,
उन्हें जिन्दगी का सबक,
आखिर कब दिया जाएगा???
ह्थीयारों हथगोलों से ,
खून की होली खेल रहें है जो,
उन्हें इंसानीयत का मतलब,
कब समझाया जाएगा ???
रोकना होगा हमे
इस बढ़ती हुई बीमारी को
वरना ये आतंकवाद का सांप
हम सबको डस जाएगा ..........

7/29/2008

आँखें




"आँखें "

तुम्हें देखने को तरसती हैं आँखें,
बहोत याद कर के बरसती हैं ऑंखें...........

जब जब ख्यालों में लातें हैं तुमको,
शर्मो हया से लरजती हैं ऑंखें ............

फूलों का तबस्सुम, या पतझड़ का मौसम,
तेरी बाट मे ही सरकती हैं ऑंखें.................

यूँ तन्हाई मे जब बिखरता है दामन,
तेरे साथ को बस सिसकती हैं आंखें...........

चिरागों के लौ मे भी जान ना रहे जब,
ग़म -ऐ-इश्क में फिर दहकती हैं ऑंखें...........




7/26/2008

"दर्द का वादा"





"दर्द का वादा"


जिंदगी का ना जाने मुझसे और तकाजा क्या है ,

इसके दामन से मेरे दर्द का और वादा क्या है ????

एहसान तेरा है की दुःख दर्द का सैलाब दिया ,
मेरी आँखों को तुने आंसुओं से तार दिया..
एक बार भी न समझा मुझे भाता क्या है?????

छीन कर बैठ गयी मेरी मोहब्बत को कभी,
जब भी मिली एक नयी चाल मेरे साथ चली,
मेरी तकदीर से अब तेरा इरादा क्या है??????


जब भी मिलती है कहीं रूठ के चल देती है,
मेरे दिल को तू फिर एक बार मसल देती है
हैरान हूँ मुकदर को मेरे तराशा क्या है ?????

कौन सी खताओं की मुझे रोज सजा देती है,
मुश्किलें डाल के बस मौत का पता देती है ...
तेरा अब मेरी वफाओं मे और इजाफा क्या है ?????

जिंदगी का ना जाने मुझसे और तकाजा क्या है ,

इसके दामन से मेरे दर्द का और वादा क्या है????

http://rachanakar.blogspot.com/2008/11/blog-post_25.html