9/11/2008

"आशनाई "






"आशनाई"


'नज़र से नज़र"
कभी मिलाई तो होती....
दिल की बात कभी हमसे भी,
बनाई तो होती....
क्यूँ कर रही शबे-फुरकत से'
आशनाई सारी रात.....
कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "

(शबे फुरकत- विरह की रात )

26 comments:

Rakesh Kaushik said...

शबे-फुरकत it's really nice
thought is unlimited in ur post.
keep it on as u r doing up to now.
our best wishes with u

Rakesh Kaushik

manvinder bhimber said...

hi , kitna achahca likha hai....dil mai utrta chla ja raha hai....sunder

नीरज गोस्वामी said...

"आईने से आंख लडाई तो होती "
waah...kitne khoobsurat lafz...behtareen.
neeraj

ज़ाकिर हुसैन said...

कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "

behtreen lines!!!!

जितेन्द़ भगत said...

wah, maza aa gaya. acchey sher.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

अच्छी है यह पंक्तियाँ

ताऊ रामपुरिया said...

कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "


बहुत खूब ! शुभकामनाएं !

ताऊ रामपुरिया said...

कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "



बहुत खूब ! शुभकामनाएं !

दीपक "तिवारी साहब" said...

बेहतरीन रचना ! धन्यवाद !

मीत said...

क्यूँ कर रही शबे-फुरकत से'
आशनाई सारी रात.....
कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "
सुंदर

संगीता पुरी said...

छोटी , लेकिन बेहतरीन।

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

bahut badhiya dilakash rachana . behatareen likhati hai aap . badhai.

फ़िरदौस ख़ान said...

'नज़र से नज़र"
कभी मिलाई तो होती....
दिल की बात कभी हमसे भी,
बनाई तो होती....

बहुत ख़ूब...

मोहन वशिष्‍ठ said...

'नज़र से नज़र"
कभी मिलाई तो होती....
दिल की बात कभी हमसे भी,
बनाई तो होती....
क्यूँ कर रही शबे-फुरकत से'
आशनाई सारी रात.....
कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "

very fine bahut khub

शोभा said...

बहुत अच्छा लिखा है. बधाई.

Advocate Rashmi saurana said...

kya kahe seema ji aapki rachanaye bhut hi badhiya hai. or sabse alag bhi.

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

नज़र से नज़र मिलाई तो होती, वाह!

COMMON MAN said...

कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "

wah taj

ALOK KUMAR said...

शब्दों और चित्रों का मनोहारी मिलन :)

Udan Tashtari said...

बहुत खूब ! बधाई.

राज भाटिय़ा said...

सीमा जी, क्या गजल हे धडकता हुआ दिल खोल के रख दिया हे आप ने...
दिल की बात कभी हमसे भी,
बनाई तो होती....
धन्यवाद

"SURE" said...

कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "
..........
खूबसूरती की भी हद्द होती है ,

vinay k joshi said...

अंधेरों मे, "आईने से आंख लडाई तो होती "
bahut khub, acchi abhivyakti,
saadar,
vinay

bavaal said...

Seemajee aap kee tareef yahan n ho sakegee iske liye lal-n-bavaal.blogspot.com padh dalen.

डा. अमर कुमार said...

.लगता है, गलत डिब्बे में आ गया हूँ,
यह शायद रूमानियत क्लास है..
दिल की बात कभी हमसे भी,
नेटवर्क बिज़ी था सीमा जी.. ख़ैर छोड़िये

तीर की तरह कलेज़े को बेधती यह कतरात बहुत दिनों तक याद रहेंगे..
अब मैं सीरियस हो गया... वाक़ई बहुत ही अच्छी लाइनें हैं, मुबारिक़ हो

mukesh said...

very nice seema ji,

isse jada ab kuch likha nhi jata likhe bhi to kiya likhe sare sabd fir se dohrate huee lagte hai.