9/22/2008

"तसल्ली"



"तसल्ली"

रात भर जागी आँखों को,

ऐ काश वो तसल्ली देता,

"हम सोये क्युं नही" जो

एक बार ही पूछा होता.......

28 comments:

रंजन said...

चन्द शब्दों में ही पूरी बात कह जाते है..

बहुत सुन्दर.. बहुत अच्छी लगी ये लाइने..

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर लिखा है। एक सुन्दर एहसास।

Anil Pusadkar said...

्क्या बात है

मीत said...

कैसे पूछता वो, हालात-ए-रात तेरे....
यादों में तेरी मिट कर,
वो जनाजे पे है लेटा...

खूबसूरत...

डॉ .अनुराग said...

वेल सैड...

डॉ .अनुराग said...

well said.....

ताऊ रामपुरिया said...

अद्भुत !!!
शुभकामनाएं !

G M Rajesh said...

raat me jaagti aankho se soye aadmi ko dekhaa
subah pataa chalaa ki aankhe nakali thi

Nitish Raj said...

चंद शब्दों और दो लाइन में ही पूरी बात समा गई। बधाई।

"SURE" said...

मालूम सबब है हमको
आंखों के उनींदेपन का /
पूछ भी लिया होता
तो कुछ न हुआ होता /
शिकायत भी नही करते
अब आँख न लगने की
जब आदत सी हो गई है
रात रात भर जगने की

COMMON MAN said...

khoobsoorat khayal

makrand said...

good lines

regards

sanjeet said...

पूछना तो दूर
वो तो
हमसे नज़रें भी नही मिलाते
जागी जागी सी आंखें
उनींदी जो दिखती है उन्हें।

u.p singh said...

bahut hi umda likhti hai...bahut achha laga.

सतीश सक्सेना said...

खूबसूरत !

naradmuni said...

soch se bhee pare hai aapke shabd

govind goyal sriganganagar

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

जागती आँखों में किसी का इंतिज़ार ही नींद न आने का बाइस है, बहुत अच्छे!

Udan Tashtari said...

सुन्दर !!

जितेन्द़ भगत said...

nice lines of nice feeling.

shyam kori 'uday' said...

समुद्र से भी ज्यादा गहराई है!

राज भाटिय़ा said...

क्या बात हे दो लाईनो मे सारी बात सारे गिले शिकवे.
धन्यवाद

अनूप शुक्ल said...

अच्छा कहा लेकिन तस्स्ली की जगह तसल्ली नहीं होगा क्या यहां?

Rakesh Kaushik said...

bahut achchi kavita hai. bahut kam shabdo me bahut unchi baat kehne ka madda hai aapme.

ab or main kya kahun oro ne hi bahut kuch keh diya hai.



Rakesh Kaushik

BrijmohanShrivastava said...

मेरा सौभाग्य कि आपका ब्लाग दिखा सुबह से देखना व् पढ़ना शुरू किया दोपहर होगी यह सोचते हुए कि रचनाओं के मुताबिक तस्वीरें चुनी गई है या पहले तस्वीर सेलेक्ट कर फिर रचनाये लिखी गई है =चित्र और कविता का ऐसा सामंजस्य आज तक देखा न था

bavaal said...

Is haseen savaal ka javaab bada mushkil hai !
aur jo ye boojh paye, kahte hain vo kamil hai !!

sachin said...

Tanha Chal Kar Kiya Tay Ye Safar,
Mushkil Tha Kitna Manjil Ko Paana,
Khud Ko Hi Fanaa Kar Liya Aasan Tha,
Aasaan Nahi Tha Utna Tujhe Bhool Paana..

mukesh said...

रात भर जागी आँखों को,

ऐ काश वो तसल्ली देता,

"हम सोये क्युं नही" जो

एक बार ही पूछा होता.......




bahut hi acchi lines hai seema ji,shyad har pyar karne wale ki kismat main yahi likha hota hai.

bhoothnath said...

अगर जो पूछ भी लेता
तो नीद आ जाती ??
इतना मत सोच...
मत सोच !!