8/03/2009

"अंतर्मन"

"अंतर्मन"

अंतर्मन की ,

विवश व्यथित वेदनाएं

धूमिल हुई तुम्हे

भुलाने की सब चेष्टाएँ,

मौन ने फिर खंगाला

बीते लम्हों के अवशेषों को

खोज लाया

कुछ छलावे शब्दों के,

अश्कों पे टिकी ख्वाबों की नींव,

कुंठित हुए वादों का द्वंद ,

सुधबुध खोई अनुभूतियाँ ,

भ्रम के द्वार पर

पहरा देती सिसकियाँ..

आश्वासन की छटपटाहट

"और"

सजा दिए मानसपट की सतह पर

फ़िर विवश व्यथित वेदनाएं

धूमिल हुई तुम्हे

भुलाने की सब चेष्टाएँ,

48 comments:

Udan Tashtari said...

सुन्दर रचना!!

इतना कम क्यूँ लिखा जा रहा है आजकल!! सब ठीक तो है?

श्यामल सुमन said...

खूबसूरत भावाभिव्यक्ति।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

वाणी गीत said...

विवश व्यथित वेदनाएं ...
इतनी पीडा क्यों...??
आप चाहें तो हमसे बाँट सकती हैं ..!!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

bahut sundar.

seema gupta said...

आदरणीय समीर जी , यहाँ सब ठीक है बस कुछ काम का बोझ बढ़ गया है आजकल कंपनी मे और समय अभाव के कारण ब्लॉग पर ज्यादा लिखना पढना नहीं हो पा रहा, आपकी इस आत्मीयता के लिए आभार...

regards

Arvind Mishra said...

गहनतम अनुभूतियों को इतने सहज शब्दों में कैसे व्यक्त कर देती है सीमा जी आप ? बहुत खूबसूरत !

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुक्ष्म अनुभुतियों को आपने सुंदर तरीके से इस रचना में पिरो दिया है. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर रचना !!

Vivek Rastogi said...

अति सुन्दर अभिव्यक्ति !

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र said...

अंतर्मन की ,
विवश व्यथित वेदनाएं
धूमिल हुई तुम्हे
भुलाने की सब चेष्टाएँ,
अंतर्मन की ,
विवश व्यथित वेदनाएं बहुत ही भावपूर्ण रचना . आभार.

Mrs. Asha Joglekar said...

पीडा को शब्द दे दिये
दर्द को दिये अक्षर
एक एक शब्द चुभ गया
छलनी कर गया अंतर ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

धूमिल हुई तुम्हे
भुलाने की सब चेष्टाएँ,

Now when the rain is gone
Far-far away from me.

Leaving no drop of water
Anywhere around me.

Not a single cloud in sight
I long for rain, I really long.

Rocky said...

very nice lines......

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

एक बार फिर बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति

मीत said...

बहुत ही उम्दा कविता लिखी है....
चित्र बेहद अच्छा लगा...
keep it up
मीत

Rakesh Kaushik said...

HI,
U have done it again. u made ur style in a very special taste.

Totally Seema Gupta Style Lines.
It's Fantastics. touch our heart continuously.

Rakesh Kaushik

M VERMA said...

अत्यंत प्रभावशाली
एहसास की कविता

RAJIV MAHESHWARI said...

खूबसूरत भावाभिव्यक्ति।
आशा है आगे भी आप ऐसी ही पठनीय रचनाएं लिखती रहेंगी !

राकेश कुमार said...

सीमा जी सचमुच विरह गीतो को बडे सुन्दर ढन्ग से लिखती है आप.

आपकी कविता "अंतर्मन" सचमुच बहुत सुन्दर है , एक विरहन के ह्र्दय के भावो का बडा सुन्दर चित्रण

विवश व्यथित वेदनाएं
धूमिल हुई तुम्हे
भुलाने की सब चेष्टाएँ,

हम जिन्हे भुलाने की चेष्टा करते है, वे हमे बरबस याद हो आते है,

मौन ने फिर खंगाला
बीते लम्हों के अवशेषों को
खोज लाया
कुछ छलावे शब्दों के,
अश्कों पे टिकी ख्वाबों की नींव,
कुंठित हुए वादों का द्वंद ,
सुधबुध खोई अनुभूतियाँ ,



क्या कहू सभी पन्क्तिया बेहद सुन्दर.

बधाई स्वीकारे.

सादर
राकेश

दिगम्बर नासवा said...

सजा दिए मानसपट की सतह पर
फ़िर विवश व्यथित वेदनाएं
धूमिल हुई तुम्हे
भुलाने की सब चेष्टाएँ

सहज शब्दों में कही गहरी बात..........सच में भूलना इतना आसान नहीं होता.............. मन फिर से उन्ही यादों में लोटने को चाहता है........... लाजवाब अभिव्यक्ति है

kabira said...

विवश व्यथित वेदनाएं
bahut hi alankarik shabd.yadi kabhi kisi ne blog jagat ke rachnakaron par koi ek shabd ki paribhasha likhi to aap ke naam ke aage hoga- dard ka dost

महामंत्री - तस्लीम said...

Tatsam sabdaavali men bhi dil ko chhu gavi ye kavita.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }</a

ओम आर्य said...

सजा दिए मानसपट की सतह पर
फ़िर विवश व्यथित वेदनाएं
धूमिल हुई तुम्हे
भुलाने की सब चेष्टाएँ
बहुत कुछ तो ब्यान करती है यह रचना ........इन पंक्तियो मे जो मजबूरी बयान करी है आपने वह सिर्फ एक रुह का दुसरे रुह मे आवस्थित हो जाने कए बाद ही ऐसी हालत होती है लाख मजबूरी हो पर कुछ भी नही हो सकता ......यादे ही यादे होती है .....बहुत ही सुन्दर मन के भावना जहा सिर्फ प्यार होता है .....बहुत ही सुन्दर

श्रद्धा जैन said...

bhaav purn rachna
shabad kosh aapka bahut vishaal hai

‘नज़र’ said...

दिल छू लेने वाली उत्कृष्ट रचना
---
1. चाँद, बादल और शाम
2. विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

mehek said...

behad sunder ,gehre bhav,badhai

जितेन्द़ भगत said...

बहुत सुंदर भाव।
आपकी व्‍यस्‍तता कम हो मेरी शुभकामना:)

somadri said...

शब्द पीडा में ढल गए है.
पढने के बाद आपकी कविता
एक बार फिर से
हम तनहा रह गए है


http://som-ras.blogspot.com

"अर्श" said...

क्या बात है कितनी गहरी बात कही है आपने अपने इस रचना में बेहद ही खूबसूरती से कही है आपने दर्द को आपने ... नतमस्तक हो गया जी....बहोत बहोत बधाई इस नायाब रचना के लिए


अर्श

डॉ. मनोज मिश्र said...

""कुछ छलावे शब्दों के,
अश्कों पे टिकी ख्वाबों की नींव,
कुंठित हुए वादों का द्वंद ,
सुधबुध खोई अनुभूतियाँ ,
भ्रम के द्वार पर
पहरा देती सिसकियाँ..
आश्वासन की छटपटाहट""
इन लाइनों की जितनी तारीफ की जाय कम है.अतीव सुंदर रचना.

योगेन्द्र मौदगिल said...

भावात्मक अभिव्यक्ति..... वाह...

सतीश सक्सेना said...

बहुत सुंदर अभियक्ति ! शुभकामनायें !

बवाल said...

आदरणीय सीमाजी,
आपकी इस बेहद सुन्दर रचना और आपके सम्मान में आज सर नतमस्तक हुआ जाता है। मालिक आपको मसरूफ़ियत से नजात दिलाए ताकि आप और जल्द ब्लाग पर लिख सकें। शुभकामनाओं सहित।

पी.सी.गोदियाल said...

बहुत अच्छी कविता, मस्तिष्क को कुछ पल रुक कर सोचने को मजबूर करती हुई !

Vijay Kumar Sappatti said...

aapki kavita me prem ki ek sacchi gaatha kahi jaa rahi hai ... maun ke apne shbd hote hai aur aapki kavita yahi kah rahi hai ..


regards

vijay
please read my new poem " झील" on www.poemsofvijay.blogspot.com

अर्शिया अली said...

दिल को छू गयी रचना.
{ Treasurer-T & S }

mukesh said...

bahut hi kuhbsurat rachna



badhai

sandhyagupta said...

sammohit sa kar diya.Shubkamnayen.

रचना त्रिपाठी said...

सुंदर अभिव्यक्ति।

महेन्द्र मिश्र said...

कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामना और ढेरो बधाई .

विनय ‘नज़र’ said...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!

विपिन बिहारी गोयल said...

बहुत अच्छी रचना है

तेज धूप का सफ़र

विपिन बिहारी गोयल said...

बहुत अच्छी रचना है

तेज धूप का सफ़र

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

"सजा दिए मानसपट की सतह पर
फ़िर विवश व्यथित वेदनाएं
धूमिल हुई तुम्हे
भुलाने की सब चेष्टाएँ"
वाह... वाह-वाह... वाह-वाह-वाह....लाजवाब

Mumukshh Ki Rachanain said...

विवश व्यथित वेदनाएं
धूमिल हुई तुम्हे
भुलाने की सब चेष्टाएँ,

अति भावपूर्ण पंक्तियाँ.
बधाई सुन्दर रचना पर.

Tosha said...

Wow!! As always mind blowing. I have always loved reading you... and i always will.

Hope you r doing well??

TC

Varun said...

"धूमिल हुई तुम्हे

भुलाने की सब चेष्टाएँ"

Khoobsurat!

aapki ye rachna bhi bahut acchhi lagi! ( ek blog pe aapke comment se li gayee hai)-

" ढूँढ़ा खुदको को दिन रातो में
ख्वाबों ख्यालों जज्बातों में
उलझे से कुछ सवालातों में
खुदको पाया खुदको पाया
तेरी साँसों की लय में बातों में '

अमलेन्दु उपाध्याय said...

Nice