8/31/2009

"याद तो फिर भी आओगे "


"याद तो फिर भी आओगे "

ह्रदय के जल थल पर अंकित
बस चित्र धूमिल कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे

हंसना रोना कोई गीत पुराना
सुर सरगम का साज बजाना
शब्द ताल ले जाओगे
याद तो फिर भी आओगे
सुनी राहे, दिल थाम के चलना
साथ बिताये पलो का छलना
सब खाली कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे


http://vangmaypatrika.blogspot.com/2009/09/blog-post_13.html

53 comments:

श्यामल सुमन said...

याद तो फिर भी आओगे -

खूबसूरत भाव समेटे अच्छी रचना बन पड़ी है सीमा जी।

अनूप शुक्ल said...

याद तो फ़िर भी आओगे/बच के किधर जाओगे। :)

kimuza creations said...

waah waah waah.

Udan Tashtari said...

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे


-bahut jabardast!! behtarin!!

Arvind Mishra said...

सुन्दर मनोभावों की कविता -प्लीज फाँट छोटा कर देगीं ?

वाणी गीत said...

इतनी मुहब्बत से भावनाएं जो यूँ बुलाएंगी ...याद कौन नहीं आयेगा ..याद किसे नहीं आयेगी ..!!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

स्वपनिल

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

जीवन में तो यादें,
आती जाती रहती हैं।
कितनो को सरसाती हैं,
कितनो को तड़पाती है।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

बहुत भावुक कर देती हैं आप। एक बार फिर आँखे नम हो गयीं।

seema gupta said...

आदरणीय अरविन्द जी ध्यान दिलाने का आभार शायद अब फाँट ठीक है....

regards

अल्पना वर्मा said...

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे

sundar kavita ..
yaaden hi to rah jaati hain!

Rakesh Kaushik said...

That is fantastic.

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे
These lines are the heart of the poem.

ताऊ रामपुरिया said...

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे

बहुत खूबसूरत भाव और उतनी ही सुंदर अभिव्यक्ति.

रामराम.

mehek said...

bahut sunder ehsaas liye hai rachana,sach yaad bahut aaoge tum,

Nirmla Kapila said...

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे
बहुत सुन्दर दिल को छू गयी कुछ एहसास ऐसे ही होते हैं शुभकामनायें

संगीता पुरी said...

खूबसूरत भावों के साथ खूबसूरत रचना !!

मीत said...

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे
वाह... और आह... दोनों निकला रहे हैं...
मीत

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

सम्मोहक अल्फ़ाज़ में पिरोई गई शानदार अभिव्यक्ति..

हैपी ब्लॉगिंग.

दिगम्बर नासवा said...

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे

bahoot ही khoobsoorat ehsaas है इस rachna में ........... lajawaab लिखा है
सच much याद तो फिर भी aaoge .........

विनय ‘नज़र’ said...

गीत की सरलता ही गीत की सुन्दरता है!

महफूज़ अली said...

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे
waaqai mein yaaden hi rah jaatin hain......


----------------------------

plz zara yeh bataiyega ki aapne cursor ko kaise change kiya hai?

Atmaram Sharma said...

सुंदर भाव.

परमजीत बाली said...

बहुत ही बढिया रचना है।बधाई।

मोहन वशिष्‍ठ 9988097449 said...

वाह जी वाह सीमा जी हमेशा की तरह बेहतरीन लेकिन थोडा समय अंतराल को कम करो पहले की तरह बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए बधाई


नोट : आजकल समस्‍त ब्‍लाग जगत के ब्‍लागर मुझसे पता नहीं किस बात पर नाराज हैं कि कभी मेरे मन की बात जानने की कोशिश भी नहीं करते खासकर बहुत सारे हैं नाम नहीं लूंगा अपने आप जान जाएंगे अगर इस नाचीज से कोई चूक हो गई हो तो माफी चाहूंगा और तनिक हमारे मन की गली में आकर हमारा मार्गदर्शन कर दें आप सभी

ओम आर्य said...

वाकई बेहद खुब्सूरत होती है यादे .......यादे मिटती नही है .....बहुत ही खुबसूरत रचना

नीरज गोस्वामी said...

हंसना रोना कोई गीत पुराना
सुर सरगम का साज बजाना
शब्द ताल ले जाओगे
याद तो फिर भी आओगे

लाजवाब रचना...बधाई...
नीरज

अर्चना तिवारी said...

सुन्दर लाजवाब कविता....

राज भाटिय़ा said...

याद तो फिर भी आओगे... बहुत सुंदर जी

Apoorv said...

नितान्त अपनी तो सिर्फ़ यादें ही होती है..शाश्वत..भावस्पर्शी रचना

गजेन्द्र बिष्ट said...

...... याद तो फिर भी आओगे !!

आदरणीय सीमा जी, खूबसूरत भाव व सुंदर अभिव्यक्ति युक्त रचना बहुत अच्छी लगी, धन्यवाद ।

क्रिएटिव मंच said...

गहरे अहसास समेटे बहुत सुन्दर रचना
आभार !



********************************
प्रत्येक बुधवार
सुबह 9.00 बजे C.M. Quiz

********************************
क्रियेटिव मंच

Apoorv said...

seema ji..blog par aa kar itna encouraging comment dene ke liye dil se shukriya..naya hun yanha par..ummeed hai aage bhi aapke sujhaav milte rahenge.!!
Thanks

SACCHAI said...

bahut khub sima ...

----- eksacchai.{ AAWAZ }

http://eksachhai.blogspot.com

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति. गिनी चुनी रचनाओं में से एक.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

aadarniya,
kaafi arse baad aap mere blog par aai, sukoon mila aapki chhoti kintu hradaysparshi tippani se.
YAAD hoti hi esi mansik upaj he jo kisi bhi haal me insaan ko udvelit karti rahti he/ bhavnao ke saagar me YAAD aapki rachna ki tarah dimaag ko tarbatar karti he/ aour vah bhi khoobsoorati se.
aapme bhav ko vyakt karne ki adbhut pratibha he/

बवाल said...

याद तो फिर भी आओगे।
सीमा जी, हम आपसे पहले भी अर्ज़ कर चुके हैं, के आप जो कह जाती हैं उसकी तारीफ़ लफ़्ज़ों में बयाँ की ही नहीं जा सकती। बेमिसाल!

Anonymous said...

aap ka likha ek ek shabd sach hai sach ke siva kuchh nahi.
lekin aesa bhi to ho sakta hai ki kaun kis ko yaad karta hai....shyad koi kisi ko yad nahi karta.yaden to matr chhlava hai

शरद कोकास said...

रूमानियत से भरे सारे बिम्ब मौज़ूद हैं -शरद कोकास दुर्ग,छ.ग.

अर्शिया said...

जज्बों को शब्दों में पिरोना कोई आपसे सीखे।
( Treasurer-S. T. )

Dileepraaj Nagpal said...

Yaad Aane Waale Kyon Yaad Aate Hain...

mukesh said...

bahut hi sunder or dil ko chuu lene wali rachna.....


badhiya

Pramod Kumar Kush 'tanha' said...

याद तो फिर भी आओगे

-- Yahi such hai.

G M Rajesh said...

very true

कविता said...

मन को छू गये आपके भाव।
Think Scientific Act Scientific

amlendu asthana said...

जीवन में यादों को सहेजता कौन है, सभी अवसरवादी हो गए हैं ऐसे में भावुक लोगों की जरूरत है। आपकी भावना को सलाम।
माकूल कविता है, अच्छा बिम्ब गढ़ा है, विचारणीय है।

क्रिएटिव मंच said...

*******************************
C.M. is waiting for the - 'चैम्पियन'
प्रत्येक बुधवार
सुबह 9.00 बजे C.M. Quiz
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क्रियेटिव मंच
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रचना त्रिपाठी said...

सुंदर कविता बधाई!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Yahi to pyaar ki nishaani hai.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

प्रेम भरे भावों की सुन्दर प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

महफूज़ अली said...

dekhne aaya tha ki aapne kuch naya likha hai ki nahi? phir dekha ki 49 hain to 50th main complete kar deta hoon..... hehehehe....

hope u will be fine....


Regards.......

अभिन्न said...

49 कमेन्ट औए एक बेहद खुबसूरत रचना ....उम् चलो आपके कमेंट्स की गोल्डन जुबिली मना लेते है 50 वां कमेन्ट मेरी तरफ से .......
याद आओगे ..
खुद भी आओगे
बेशक अरसे बाद आओगे
कश्तियाँ
पलट जाएँगी
झील के गहरे पानी में तो
सिर्फ और सिर्फ
आत्मा ही जा पायेगी

SURINDER RATTI said...

कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा
रात के मुख पर चाँद का सेहरा
तुम विराना कर जाओगे
याद तो फिर भी आओगे
Seema Ji, Bahut sunder rachna hai ... badhai swikaren.
Surinder

भूतनाथ said...

अरे अरे....अरे यहाँ से मेरा कमेन्ट कहाँ गया....!!शायद उसे जगह नहीं मिल पायी....
कोई बात नहीं जब बुकिंग फूल हो तो आदमियों को जगह ही नहीं मिल पाती....भूतों को तो क्या मिलेगी.....!!!!!