8/17/2009

जब कश्ती लेकर उतरोगे


"जब कश्ती लेकर उतरोगे "

झील के कोरे दामन पे,

चन्दा की उजली किरणों से

चाहत का अंश है मैंने लिख डाला

थाम के ऊँगली प्रियतम की

दुनिया की नज़रों से छुप कर

मुझे नभ के पार है उड़ जाना

तारो को झोली में भर कर

तेरे प्यार के बहते सागर में

दूर तलक है तर जाना

जब कश्ती लेकर उतरोगे

तुम झील के गहरे पानी में

इन उठती गिरती लहरों को

चुपके से अधरों से छु जाना

51 comments:

विवेक सिंह said...

बहुत सुन्दर भाव !

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बहुत सुंदर परिकल्पना.

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र said...

सीमाजी
सादर अभिवादन
काफी अन्तराल के बाद जब आपकी भाव विभोर कर देने रचना पढ़ता हूँ तो हर लाइने पढ़कर कुछ सोचने को मजबूर हो जाता हूँ की इतनी अच्छी रचनाओं आप कैसे लिखती है . आज की रचना बर्हद भावपूर्ण और अच्छी लगी . आभार.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब रचना. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

Arvind Mishra said...

दिल को छू गयी यह चिरन्तन आस

Pankaj Mishra said...

सुन्दर भाव !

Rakesh Kaushik said...

kitni sundar or nirmal kalpna hai . shayad school life k baad pehli aisi koi kavita hai, jisska bahvarth itna nirmal or ekarthi hai.

Bahut bahut uttam


Rakesh Kaushik

विनोद कुमार पांडेय said...

बेहतरीन शब्दों से सज़ा सुंदर भाव कविता को लाज़वाब बना रही है..
धन्यवाद!!!

AlbelaKhatri.com said...

waah !

Mumukshh Ki Rachanain said...

अति सुन्दर भावों की सुन्दर काल्पनिक उडान से सराबोर सुन्दरतम रचना.

बधाई .

दिगम्बर नासवा said...

बहुत ही मधुर प्रेम के कोमल रंगों से सजी भावनात्मक अभिव्यक्ति है............ दिल में हलके से उतर कर मन मयूर को दूर ले जाती है आपकी रचना ........... ............ तृप्ति की अनुभोती होती है आपकी रचना पढने के बाद............ लाजवाब

रंजन said...

बहुत खुबसुरत..

बधाई..

ओम आर्य said...

बहुत ही खुब्सूरत नज़म ऐसी रचना हमेशा से दिल के गहराई मे उतरती है ............अतिसुन्दर

अनिल कान्त : said...

बेहद खूबसूरत

राकेश कुमार said...

सीमा जी बहुत सुन्दर रचना,

जब कश्ती लेकर उतरोगे
तुम झील के गहरे पानी में
इन उठती गिरती लहरों को
चुपके से अधरों से छु जाना

क्या खूब लिखती है आप,प्यार के सकारात्मक सौन्दर्य को निखारती आपकी मुग्ध कर देने वाली कविता को जब जब मै पढा करता हू मन कह उठता है बेहतरीन, मा सरस्वती आपकी लेखनी को इसी तरह और खूबसूरती प्रदान करे. वैसे मै अभी भी आपकी उस कविता को भूला नही 'धुमिल हुई तुम्हे भुलाने की सभी चेष्टाये... विरह और सौन्दर्य का बेजोड मिश्रण है आपका ब्लोग.

राकेश

Atmaram Sharma said...

सुंदर भाव.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

बस एक नाव हो जो आसमान के उस पार भी ले जाती हो!

'sakhi' 'faiyaz'allahabadi said...

dani bhav vibhor

"अर्श" said...

कहाँ से लाती हैं आप ऐसे शब्द और थिंकिंग मैं जब भी आपको पढता हूँ अचंभित हो उठता हूँ ... हर बार एक नायाब रचना .. और हो भी क्यूँ ना ऐसा सिर्फ आप ही कर सकती है सीमा जी ... सलाम आपकी लेखनी को ...

अर्श

मीत said...

जब कश्ती लेकर उतरोगे
तुम झील के गहरे पानी में
इन उठती गिरती लहरों को
चुपके से अधरों से छु जाना

वाह क्या बात कह दी...
बहुत खूब...
मीत

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

निशब्द कर दिया आपने.

क्रिएटिव मंच said...

बहुत भावपूर्ण कविता
सुन्दर चित्र


-----------------------------------
सूचना :
कल सवेरे नौ बजे से पहली C.M. Quiz शुरू हो रही है.
आपसे आग्रह है कि उसमें भी शामिल होने की कृपा करें.
हमें ख़ुशी होगी.
-----------------------------------
क्रियेटिव मंच

PRAN SHARMA said...

SARAS BHAVABHIVYAKTI KE LIYE MEREE
BADHAAEE AUR SHUBH KAMNA SWEEKAR
KIJIYE.

सतीश सक्सेना said...

बहुत सुंदर सीमा जी !

अर्शिया अली said...

मार्मिक भावों की सफल अभिव्यक्ति।
( Treasurer-S. T. )

जितेन्द़ भगत said...

बहुत मनोरम और प्‍यारे जज्‍बात-
मुझे नभ के पार है उड़ जाना.....

Abhishek Prasad said...

जब कश्ती लेकर उतरोगे
तुम झील के गहरे पानी में
इन उठती गिरती लहरों को
चुपके से अधरों से छु जाना

aapki kavita chupke se dil ko chhu gayi...

bhoootbhooot@gmail.com said...

hmmmmmmmmmmmmmmm.....haan yah baat to phir ik baar dil ko chhoo gayi... jab kashti lekar utroge....aur seema ji aapke samandar men to baadal khud kashti lekar utarte hain....hain naa .....!!

योगेन्द्र मौदगिल said...

बेहतरीन नज़्म के लिये बधाई सीमा जी...

अमिताभ श्रीवास्तव said...

itani komalta he shbdo me ki bs.., bahut salike se navaazati he aap apni rachnao ko..yahi khoobsoorati he aapki/

mukesh said...

bahut hi sunder rachna



ish sunder rachna ke liye dhero badhiya

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर है जी। झील तो आजकल गंदी संदी होती हैं। आपको कोरी किधर से मिल गयी! :)

M VERMA said...

seema jee
सुरेश जी द्वारा दिया रूप देखने आया था. वह रूप तो नायाब है ही. पर आपका रूप जो कविता मे दिखा उसके क्या कहने
इन उठती गिरती लहरों को
चुपके से अधरों से छु जाना
सघन भावनाओ को बखूबी बयान किया है आपने.

अविनाश वाचस्पति said...

कश्‍ती लेकर कैसे उड़ोगी सीमा जी
वायुयान लेकर दूर क्षितिज में जाना
वहां पर आप उड़नतश्‍तरी को घूमता पायें
तो मत चकराना
न ही चक्‍कर खाना
घूम फिर कर
9 बजे परिणाम जानने
बताओ तो जानो पर
अवश्‍य आ जाना।
वे भले ही देर कर दें।

महफूज़ अली said...

तारो को झोली में भर कर


तेरे प्यार के बहते सागर में


दूर तलक है तर जाना


bahut hi khoobsoorat aur realistic lines ......

regards

अभिन्न said...

aapke ashnkhy readers ne aapki aur aapki rachna ki shan me jo bhi kaha hai bahut sach kaha hai.me speachless.
congratulations and regards

raj said...

दुनिया की नज़रों से छुप कर

मुझे नभ के पार है उड़ जाना

तारो को झोली में भर कर

तेरे प्यार के बहते सागर में

दूर तलक है तर जाना.....khoobsurat chaht....amazings words....

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

बहुत उम्दा...बहुत बहुत बधाई....

G M Rajesh said...

bappa morya

कैटरीना said...

रूमानी भावनाओं का सुंदर अभिव्यक्ति।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को प्रगति पथ पर ले जाएं।

रचना त्रिपाठी said...

बहुत सुंदर रचना है और उससे भी अच्छे शब्दकोष हैं। कहाँ से लाती है आप?
बधाई।
दुनिया की नज़रों से छुप कर

मुझे नभ के पार है उड़ जाना

तारो को झोली में भर कर

तेरे प्यार के बहते सागर में

दूर तलक है तर जाना...आभार

सूर्य गोयल said...

सीमा जी, आपके ब्लॉग का चक्कर काट कर आया हूँ. आपके दिल के भावः मन को सुकून पहुंचाते है. आपकी कविताओ से दिल के भावः तो मैं समझ सकता हूँ लेकिन रचना जी ने सही कहा है की इतने सुन्दर शब्द कहा से लाती है आप. वाकई बधाई की पात्र है. हम दोनों में मात्र इतना ही फर्क है की आप शब्दों को पिरो कर कविता लिखती है और मैं गुफ्तगू करता हूँ. आपका भी मेरी गुफ्तगू में स्वागत है. www.gooftgu.blogspot.com

क्रिएटिव मंच said...

आपकी नयी पोस्ट का इन्तजार है
आभार


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C.M. को प्रतीक्षा है - चैम्पियन की

प्रत्येक बुधवार
सुबह 9.00 बजे C.M. Quiz
********************************
क्रियेटिव मंच

विपिन बिहारी गोयल said...

बहुत खूब

Science Bloggers Association said...

Hamesha ki tarah Laajavaab.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अर्शिया said...

Adhbhut bhav.
( Treasurer-S. T. )

niranjan dubay said...

bahut sunder. bus padhne ke baad yahi laga ki harpal bus padhte hi rahe. maine aapke blog per upalabdh shuru ke lagbhag 10-15 rachnaon ko padha. dil ko chhu lene wali rachnayen hain. bahut badhiya.....

Niranjan.

बवाल said...

आसमाँ से नाज़िल हुए अल्फ़ाज़ों का गुलदस्ता है आपकी यह रचना, सीमा जी।

भूतनाथ said...

हाँ...हरेक आता हुआ पल इक पल में ही बीता हुआ हो जाता है....बीता हुआ माने इक याद....प्यारी....या कटु....कैसी भी....!!कभी कोई बात इक कविता बन जाती है...और कभी कोई याद......महज इक याद.....इन्हीं यादों के संग....!!

kshama said...

कोमल अहसासों से परिपूर्ण रचना ...पहली बार आयी हूँ आपके ब्लॉग पे ..!
तसवीर देख याद आया ," कश्ती का ख़ामोश सफर .."

'बिखरे सितारे'पे नज़रे इनायत की चाहत है..

kshama said...

बड़े सर्हिदयता से आप सबको साथ ले चले हैं..अपनी किश्ती में कभी हमें भी जगह दें ! अनुकम्पा होगी...जानती,जानती हूँ...इस काबिल बनना होगा!