7/06/2009

"तेरे जाने के बाद"

"तेरे जाने के बाद"

आँखों मे जलजले ,
मरुस्थल दिल की जमीन .
भावनाओ की साजिश ,
संभावनाओ का जलना .
धधकते अंगारों से पल,
दर्द का विकराल रूप ,
म्रत्यु से द्वंद ,
पथराये जिस्म का गलना . 
तेरे जाने के बाद......

http://latestswargvibha.blog.co.in/
http://vangmaypatrika.blogspot.com/2009/07/blog-post_20.html

52 comments:

रंजन said...

हमें तो आपके आने से बहुत अच्छा लगा...:)

Nirmla Kapila said...

म्रत्यु से द्वंद ,
पथराये जिस्म का गलना .
तेरे जाने के बाद......
मार्मिक मगर सुन्दर अभिव्यक्ति आभार्

अशोक पाण्डेय said...

सुंदर अभिव्‍यक्ति। इस कविता में तो गागर में सागर भरा है।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सुंदर.

M Verma said...

bhavnao kee sazis.
vaah bahut khoob

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सुन्दर रचना . बधाई .

विवेक सिंह said...

आपकी रचना पढ़े हुए बहुत समय बीत गया था . आज पढ़कर अच्छा लगा .

मार्मिक !

डॉ. मनोज मिश्र said...

भावपूर्ण रचना .

प्रदीप मानोरिया said...

sundar bahavabhivyakti

karuna said...

म्रत्यु से द्वंद ,पथराये जिस्म का गलना ,
तेरे जाने के बाद ......
एक मार्मिक सत्य कहा है ,भावात्मकता के साथ ही इसमें एक दार्शनिक अभिव्यक्ति है बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सीमा गुप्ता जी!
भावप्रणव पोस्ट के लिए,
बधाई।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सच, किसी जाने के बाद ही उसकी महत्‍ता का एहसास होता है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ताऊ रामपुरिया said...

पथराये जिस्म का गलना .
तेरे जाने के बाद.....


बहुत ही सुंदर भावप्रवण अभिव्यक्ति. लाजवाब.

रामराम.

हिमांशु । Himanshu said...

इस खूबसूरत रचना का आभार । उपस्थिति अच्छी लग रही है ।

दिगम्बर नासवा said...

गहरी नज्म है .............. बहुत दिनों बाद कुछ लिखा है आपने और दिल को हिलाने वाला .............. जाने कितने एहसास सिमटे हुवे लिखा है ................ सच मच किसी के जाने के बाद ही सब्र का बाँध टूटता है .............. इतना............... की जिसमें जिस्म भी गल जाए.......... स्तब्ध करती रचना

‘नज़र’ said...

बहुत दिनों बाद आपकी रचना पढ़ने का अवसर मिला, बहुत अच्छा लगा। अब आपकी तबीयत कैसी है?

मीत said...

म्रत्यु से द्वंद ,
पथराये जिस्म का गलना .

तेरे जाने के बाद......
वाह!!
बहुत मार्मिक
मीत

राज भाटिय़ा said...

दर्द का विकराल रूप ,
म्रत्यु से द्वंद ,
पथराये जिस्म का गलना .
तेरे जाने के बाद......
सीमा जी यह पक्तियां बहुत खुब लगी, मेरे पास शव्द नही केसे कहूं, लेकिन यह एक सच है....
धन्यवाद

ओम आर्य said...

पत्थ्राराये जिस्म का गलना तेरे जाने के बाद ...........बहुत ही सुन्दर .....सिधे गहरे उतरी ये पंकतियाँ

जितेन्द़ भगत said...

सचमुच कि‍सी का जाना इतना त्रासद लगता है, बहुत सुंदर भावाभि‍व्‍यक्‍ति‍।

Science Bloggers Association said...

किसी के जाने के बाद ही उसकी कमी महसूस होती है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अभिन्न said...

किसी के जाने के बाद उत्पन्न विरह ओर बर्बादी का जो मंजर आपने प्रस्तुत किया वह अपने आप में अद्वितीय है सचमुच ऐसा मैंने कहीं नहीं पढ़ा .....
भावनाओ की साजिश ,
संभावनाओ का जलना .
जैसे वाक्य आपकी काव्य क्षमता ओर त्रासद चित्रण की अभिव्यक्ति .....
आपके इस लेखन में जो melodramatic element नजर आता है इतना तो जॉन वेबस्टर के नाटक Duchess Of Malfi में भी नहीं लगा

anil said...

सुन्दर व भावपूर्ण रचना आभार !

कंचन सिंह चौहान said...

badhiya likha hai aap ne

नीरज गोस्वामी said...

बहुत दिनों बाद लौटी हैं लेकिन हमेशा की तरह बहुत प्रभावशाली रचना के साथ सीमा जी...बधाई...उम्मीद है अब पूर्ण रूप से स्वस्थ होंगी....
नीरज

अभिषेक ओझा said...

घोर विरह अभिव्यक्ति !

mukesh said...

kiya kuhb likha hai aapne ,

seema ji apki har rachna sach me adhbuht hoti hai , kaha se chun kar lati hai itne pyare sabd or fir unko ek dhage me piro kar unko jivant karna , realy you are to good

badhiya savikar kare

श्रद्धा जैन said...

म्रत्यु से द्वंद ,
पथराये जिस्म का गलना .

तेरे जाने के बाद......

kitni ghari dard bhari nazm hai

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

आपने एक बार फिर दिमाग सुन्न कर दिया। कहाँ से लाती हैं ऐसे दर्द की बानगी?

Nirmla Kapila said...

seemaji mere blog par aapke liye ek award hai please accept it thanx

Udan Tashtari said...

बहुत भावापूर्ण रचना!!

Mumukshh Ki Rachanain said...

सुन्दर भावव्यक्ति.
'तेरे जाने के बाद' संवेदनाओं की सच्ची अभिवक्ति पर उनका क्या जो रहते हुए भी जिन्दगी इससे भी बदतर बन देते हैं, आशा है इस विषय पर भी एक कविता शीघ्र ही पढने को मिलेगी.

आभार

चन्द्र मोहन गुप्त

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

वापसी शानदार कविता के साथ, आशा है कि अब लगातार कवितायें पढ़ने को मिलेंगी.

अल्पना वर्मा said...

'पथराये जिस्म का गलना'
बहुत ही marmik chitran!
कुछ ही panktiyon में एक कहानी सी कह गयी कविता!

Anonymous said...

I like all your rachnayen.I am a fan of yours. Each & every line has its life in original.Your creation has its own beauty.
Excellant,Beautiful rachna. it touched my heart.sadar

काजल कुमार Kajal Kumar said...

Welcome to .tk world :-/)

Dhiraj Shah said...

हौसला अफजायी के लिये धन्यबाद
खुबसुरत मंजर तेरे जाने के बाद

G M Rajesh said...

tuk bandi me gaya kaun yah mukhrit nahi magar ehsaas sabhi ko kisi ke jaane ke baad hone wale ehsaas ka
thanks

Vijay Kumar Sappatti said...

amazing poem seema ji

very expressive words with deep thoughts of philosphical approch to life,.,.

Aabhar

Vijay

Pls read my new poem : man ki khidki
http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/07/window-of-my-heart.html

भूतनाथ said...

जीवन तो ऐसा ही है.....और दर्द भी गुजरने के बाद गोया कविता बन जाता है...और कविता होकर मरहम भी....और मरहम.....जीवन.....!!!!

भूतनाथ said...

aap acche ho gaye....jaankar behad acchha lagaa....dil men ik phool phir se nikhartaa saa lagaa....!!

raj said...

tere jane ke baad...wow!etne se shabdo me kitna kah diya....really g8...

बवाल said...

वाह वाह सीमाजी आप बेहतरीन कविता लिखिए और हमसे कहिए ...कृपया दाद न दें ---
ये अत्याचार नहीं तो और क्या है ?

आखों में ज़लज़ले
मरुस्थल दिल की ज़मीन
अल्फ़ाज़ों का इतना संजीदा इस्तेमाल सिर्फ़ हमारी सीमाजी ही कर सकती हैं। बहुत बधाई और आभार इस बेहतरीन रचना के लिए।

hem pandey said...

विछोह का मार्मिक चित्रण. साधुवाद.

awaz do humko said...

bhavnao kee sazis.
vaah bahut khoob

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

पथराये जिस्म का गलना .
तेरे जाने के बाद.....

कितनी भावपूर्ण एवं मार्मिक अभिव्यक्ति!!!!!!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आजकल काफी सुस्‍त लग रही हैं आप। काफी समय से आपकी नयी पोस्‍ट नहीं आई है।
क्‍या बात है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

राकेश said...

सीमा जी,

विरह वेदना का सम्पूर्ण चित्रण मात्र चन्द पन्क्तियो मे करने की सफल कोशिश.

भावनाओ की साजिश ,
संभावनाओ का जलना
बहुत शानदार, शायद विरह वेदना मे जलते किसी व्यक्ति की पीडा ीइन्ही शब्दो के ीइर्द गिर्द ही होती होगी.
आँखों मे जलजले ,

दर्द का विकराल रूप ,
म्रत्यु से द्वंद ,
पथराये जिस्म का गलना .

तेरे जाने के बाद......

बहुत बहुत सुन्दर

सादर
राकेश

राकेश said...

सीमा जी,

विरह वेदना का सम्पूर्ण चित्रण मात्र चन्द पन्क्तियो मे करने की सफल कोशिश.

भावनाओ की साजिश ,
संभावनाओ का जलना
बहुत शानदार, शायद विरह वेदना मे जलते किसी व्यक्ति की पीडा इन्ही शब्दो के इर्द गिर्द ही होती होगी.
आँखों मे जलजले ,

दर्द का विकराल रूप ,
म्रत्यु से द्वंद ,
पथराये जिस्म का गलना .

तेरे जाने के बाद......

बहुत बहुत सुन्दर

सादर
राकेश

vishnu-luvingheart said...

kammal ka kalam...lage rahiye...

डॉ. मनोज मिश्र said...

आज की पोस्ट का पेज नहीं खुल रहा है,मैं आपकी रचना ""बरसात ""नहीं पढ़ पा रहा हूँ ,कृपया देंखे.

Mrs. Asha Joglekar said...

क्या खूब बयानी है जुदाई की ।