11/27/2008

एक दिन हम सब सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दी ब्लॉग पर अपना सम्मिलित आक्रोश व्यक्त करे


एक दिन हम सब सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दी ब्लॉग पर अपना सम्मिलित आक्रोश व्यक्त करे


आज टिपण्णी नहीं साथ चाहिये । इस चित्र को अपने ब्लॉग पोस्ट मे डाले और साथ दे । एक दिन हम सब सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दी ब्लॉग पर अपना सम्मिलित आक्रोश व्यक्त करे । चित्र आभार

15 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

अनुकरणीय कृत्य ! आपकी बात का समर्थन करने का सबसे आग्रह !

रचना said...

ये चित्र लगा कर हम अपनी एक जुटता का परिचय दे रहे हैं , ये शोक हैं आक्रोश हैं , हम एक जुट होगे तभी बदल सकेगे
chitr lagaa kar baat ko aagey badhaa aapne jarurrii thaa

Mumukshh Ki Rachanain said...

सीमा जी,
आपका आग्रह कि
" एक दिन हम सब सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दी ब्लॉग पर अपना सम्मिलित आक्रोश व्यक्त करे ।"
से क्या होगा?
प्रधान मंत्री ने अभी तीन दिन पूर्व ही कहा था कि हम आतंकवाद को और अधिक बर्दाश्त नही कर सकते कि ये हादसा हुवा ही नही बल्कि चौबीस घंटे बीत जाने के बाद भी बदस्तूर जारी है.
हमारे देश के नेता सिर्फ़ आश्वाशन देने, भाषण देने में ही विश्वास रखते हैं, शायद जिम्मेदारी नही लेना चाहते.
आज कहाँ मिलते है वो "लाल बहादुर शास्त्री" जी सरीखे व्यक्तित्व,
१. जो रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी किसे और पर डालने से बेहतर ख़ुद इस्तीफा देने की हिम्मत रखते थे,
२. पाकिस्तान ने गलती की तो उसे सबक सिखाने में सेना के साथ तन -मन से एक होकर सन पैसठ के युद्ध में वह कर के दिखा दिया जो कहते आए.

आज हमारे देश के नेता कोर्ट के आदेश के बावजूद संसद कांड के मुख्य अपराधी अफज़ल गुरू को फांसी देने की हिम्मत नही जुटा पा रहे हैं तो किस मुंह से देश के नागरिको से शान्ति संयम रखने की अपील करते हुवे दोषियों को न बख्सने की बात कहते है.

हमारे देश में अभी तक तो आतंकवाद बम कांड के रूप में ही सामने आता रहा है, और चाँद मिनटों या घंटे भर की दहशत फैला कर गुजर गया पर प्रथम बार गोली कांड के रूप में यह सामने आया है और वह भी चौबीस घंटे बीत जाने के बाद नियंत्रण में न तो आ पा रहा है और न ही आतंकवादी पकड़े जा सके हैं , जो स्वयं में उनके पास भरी मात्र में विस्फोटक होने की बात को और पुख्ता करते हैं.
हमारा आक्रोश मौन में नही विद्रोह में विश्वाश रखता है,
हमारा आक्रोश आश्वाशन में नही तुंरत परिणाम में विश्वाश रखता है,
हमारा आक्रोश सहने में नही ग़लत के विध्वंस में विश्वास रखता है
हमारा आक्रोश मानवता नही आतंकी के विध्वंस में विश्वास रखता है
हमारा आक्रोश अच्छा दिखने में नही कडुवे सच को उजागर करने में विश्वास रखता है .............................

आशा है आप भी मौन को तोड़ हिन्दुस्तानी कौम की आवाज़ बन कर आवाज़ को और गुंजायमान कर अनुग्रहीत करेंगी.
जय भारत, जय भारती
चन्द्र मोहन गुप्त

Akshaya-mann said...

मैंने मरने के लिए रिश्वत ली है ,मरने के लिए घूस ली है ????
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑

आप पढना और ये बात लोगो तक पहुंचानी जरुरी है ,,,,,
उन सैनिकों के साहस के लिए बलिदान और समर्पण के लिए देश की हमारी रक्षा के लिए जो बिना किसी स्वार्थ से बिना मतलब के हमारे लिए जान तक दे देते हैं
अक्षय-मन

राज भाटिय़ा said...

हार्दिक श्रद्धांजली मेरे उन शहीद भाईयो के लिये जो हमारी ओर हमारे देश की आबरु की रक्षा करते शहीद हो गये।लेकिन मन मै नफ़रत ओर गुस्सा अपनी निकाम्मी सरकार के लिये

Arvind Mishra said...

सचमुच बहुत दुखी हूँ -कुछ न कर पाने का आक्रोश ,उससे उत्पन्न क्लैव्यता और हताशा ने किंकर्तव्यविमूढ सा कर दिया है !

नारदमुनि said...

meri shardhanjali to un netaon ke liye jo jinda bhee mare huye ke saman hai. narayan narayan

विवेक सिंह said...

ईश्वर मारे गए लोगों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें . उनके परिजनों को दु:ख सहने की ताकत दें .

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

ॐ शान्तिः।

कोई शब्द नहीं हैं...।
बस...।

रचना said...

अपनी एक जुटता का परिचय दे रहा हैं हिन्दी ब्लॉग समाज । आप भी इस चित्र को डाले और अपने आक्रोश को व्यक्त करे । ये चित्र हमारे शोक का नहीं हमारे आक्रोश का प्रतीक हैं । आप भी साथ दे । जितने ब्लॉग पर हो सके इस चित्र को लगाए । ये चित्र हमारी कमजोरी का नहीं , हमारे विलाप का नहीं हमारे क्रोध और आक्रोश का प्रतीक हैं । आईये अपने तिरंगे को भी याद करे और याद रखे की देश हमारा हैं ।

makrand said...

क्या किसी को सुनाई नही पढ़ता..
क्या दोष था मेरा ....
क्या दोष था इन जीवित आत्माओं का ...
अगर नही, तो फ़िर दोषी कौन....
दोषी कौन, दोषी कौन, दोषी कौन?????

jo tatstha he

G M Rajesh said...

आग्रह
" एक दिन हम सब सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दी ब्लॉग पर अपना सम्मिलित आक्रोश व्यक्त करे ।"
ageed, i have posted my thaughts

मोहन वशिष्‍ठ said...

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वरस मेले

वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा

सत्‍यमेव जयते
वन्‍दे मातरम

जय हिन्‍द

जय भारत
हर हर महादेव

स्वाति said...

anukarniya prayas. hum sab aap ke sath hai , maine bhi apne blog me aapka anukarn kiya hai .

"SURE" said...

हम सब का दुःख और आक्रोश एक सा है ....सीमा जी आपका ये प्रयास सराहनीय है एक भारतीय होने का आपने फ़र्ज़ निभाया है हम सब आपके साथ है