3/30/2009

अश्कों का दीया

"अश्कों का दीया"

रात गमगीन रही
दिल वीरान रहा
कितना खामोश ये आसमान रहा
सिसकियों की सरगोशियाँ उफ़
"अश्कों का दीया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा

http://vangmaypatrika.blogspot.com/

41 comments:

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " said...

"अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा
Superb ji

आवारा प्रेमी said...

आपकी पंक्तियां कुछ इस तरह से रसमसा गईं.
फागुन के होंठ पर जैसे भादों की घटाएं छा गईं.

ताऊ रामपुरिया said...

भावनाओं का सैलाब उमड आया है. शानदार अभिव्यक्ति. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

अल्पना वर्मा said...

"अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा

दर्द में डूबी हुई भावभरी रचना!
सुन्दर अभिव्यक्ति!

Rakesh Kaushik said...

How pathetic it is?it's always lovely feeling to read ur lines!!!!

Science Bloggers Association said...

गागर में सागर का एहसास कराती कविता।

-----------
तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

योगेन्द्र मौदगिल said...

Behtreen Bhavabhivyakti....Wah

Mumukshh Ki Rachanain said...

"अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा

गागर में सागर का एहसास कराती कविता।

शानदार अभिव्यक्ति. बहुत शुभकामनाएं.

Vijay Kumar Sappatti said...

seema ji .. ekdum sahi hai .. " ashqo ka diya andhero me meharbaan raha '' bahut kuch kah diya aapne is choti si baat me ..

words are truly representing the emotions .

very good work of words.

dil se badhai sweekar karen ...

"अर्श" said...

AB AAPKE NAZMO KE BAARE ME KYA KAHNE... ISTARAH KI NAZME AAPKE KALAM SE HI PADHNE KO MIL SAKTI HAI ... DHERO BADHAAEE AAPKO SEEMA JI..


REGARDS
ARSH

मीत said...

चंद शब्दों में सब कुछ कह दिया आपने...
सुंदर रचना..
मीत

मोहन वशिष्‍ठ said...

एक एक शब्‍द को दर्द रूपी स्‍याही में डुबोकर चस्‍पा किया लगता है बहुत ही सुंदर रचना के लिए ढेरों बधाई

अभिन्न said...

अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा
ek chhoti si kavita....sundarta se paripurn,
ise kya kahe
gagar me sagar
ya Naino Epic
.......superb

mukesh said...

tarif kiski kari jaye uski jisne ye likhi hai ya us waqt ki jisne usee likhne par majbur kar diya............



very nice seema ji

my wishish aap uuhi likhti rahe ,

hume pyar se isshe bhejti rahe,taki hum labhi pyar ki gehaiyo se bahar na aa sake

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

"अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा

चंद पंक्तियों में भावों का समंदर बहा दिया आपने

PN Subramanian said...

यह कविता है या महाकाव्य? कितना wonderful. आभार.

मा पलायनम ! said...

"अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा ......
सुन्दर भावाभिब्यक्ति.

अनिल कान्त : said...

दिल तक पहुँच गयी ...बहुत खूबसूरत

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

बवाल said...

वाह वाह वाह वा सीमाजी,
ये तो एकदम नया ही अंदाज़ रहा आपका। बख़ुदा ख़ूब रहा, ख़ूब रहा। आपका कोई मुक़ाबला नहीं है सीमाजी। आपके आदर में जिबीं ख़ुद-ब-ख़ुद झुक जाती है।

Syed Akbar said...

खूबसूरत....

गौतम राजरिशी said...

"अश्कों का दिया / अंधेरों मे मेहरबान रहा"

शब्दों से ऐसे बयान बस आपके वश की बात है सीमा जी

बहुत खूब

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर कहा ...

राज भाटिय़ा said...

शव्दो ने बहुत कुछ कह दिया, बहुत ही सुंदर ...
धन्यवाद

दिगम्बर नासवा said...

कुछ ही शब्द, कुछ ही लाइने बहा ले गयीं पूरी सोच को अपने एहसास में...........
अश्कों का दिया बहा ले गया ..........
ग़मगीन रात और वीरान दिल की दास्ताँ बहूत लम्बी........बहूत दूर तक कह दी है आपकी रचना ने

बहोत सुन्दर

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

"कितना खामोश ये आसमान रहा"
आसमान की खामोशी मानो शब्दों में बंधी चली आयी, बहुत खूब!

Amit verma said...

In khuli band ankhon ka ek aur behtreen nagma he ye panktiyan..
Wonderful seema does wonders again..

Amit verma

mehek said...

ashq ka diya waah sunder gehre komal ehsaas se jal utha,behtarin waah

रंजन said...

बहुत खुब..

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत खूब सुन्दर अभिव्यक्ति

bhootnath( भूतनाथ) said...

aap bhi naa seema ji....kabhi-kabhi to acchha majaak kar deti hain...ab dekho naa...ashkon ke baadal....ashkon kee baarish...ashkon kee nadiya to khoob suni thi...ab ye ashkon kaa diyaa naa mujhe pareshaan kiye de raha hai...!!bujhaane vali cheez se aap kuchh jalana chaahate ho..??baap re baap to phir aap to jaadugar ho...!! haan panktiyaan phir bhi acchhi ban padi hain...sach....!!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

क्या बात है "अश्कों का दिया" आपने तो मार दिया.

omsherryom said...

padne per mujhe khamoshi ki awaaz aayi aur siskiyaaan angraiyaan lete hue lagi.....
reading your blogs was a relaxing experience. assan shabdon mein lehrate hue shabd....
baaki taarif baad ke liye...

Science Bloggers Association said...

अश्‍कों की उपमा दिये से देकर आपने कविता को और ज्‍यादा प्रभावी बना दिया है।

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तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

ज़ाकिर हुसैन said...

"अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा
Great lines!!!!
great!!!! great!!!!

ajit.irs62 said...

ITS BEAUTIFUL !
KEEP IT UP.
WITH WELL WISHES .
--- AJIT PAL SINGH DAIA

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

bahut badhiya . apki chiththi ki charchaa aaj samayachakr par.
समयचक्र: चिठ्ठी चर्चा : माता तेरे रुप हजार तू ही करती बेङा पार

muskan said...

अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा

दर्द में डूबी हुई भावभरी रचना!
बहुत सुंदर

hem pandey said...

अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा

- सुन्दर.

Dileepraaj Nagpal said...

ashk aur diya dono hi to jalte hain. aapki panktiyan Dil ko choo jati hain. badhayi...

G M Rajesh said...

ujaala kar sake ashk
meharbaani unki

dr.bhoopendra singh said...

अश्क सरताज रहे,दर्द खिजाबार रहा ,
तमाम उम्र हमें तेरा इन्तेजार रहा ,
आपने तो kamaal कर दिया लफ्जों से भी औ अदाकारी se bhi .आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें ,धन्यवाद
with regards
डॉ.भूपेन्द्र