12/24/2008

'मन की अभिलाषा"



"मन की अभिलाषा"

मन की अभिलाषा
दिशाहीन , आवारा
कभी किसी पथ
कभी उस डगर
चंचल चपल निर्भीक
बेबाकी की चुनर ओढ़
इतराती, इठलाती
अनुशासन की देहरी लाँघ
दायरों की हँसी उडा
अधीरता को निमंत्र्ण दे
"ना जाने"
क्या पाने को मचल रही...
मन की अभिलाषा
दिशाहीन , आवारा

33 comments:

विवेक सिंह said...

मन की अभिलाषा
दिशाहीन , आवारा

वाह वाह ....

'sakhi' 'faiyaz'allahabadi said...

Seema,
ek saath kitnee yadon ko sote se jaga diya.aawargee,deewanapan---yeh sab nateeja hai dishaheenta ka-----------poori na huyee abhilashshayen, tamannnayen,khwaahishen............hazaaron khwaahishen aisee ki har khwaahish pe dum niklay..............kitna tajurba hogaya.............phir bhi yeh karvaan abhlaashaaon ka rukta hi naheen.................
............ye dil ye pagal dil mera........awara...........dishaheen.
abhvyakti "man ki abhlasha" ki bahut sashakt hai. badhaayee.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

मन की अभिलाषा का सुंदर चित्रण.

ताऊ रामपुरिया said...

"ना जाने"
क्या पाने को मचल रही...
मन की अभिलाषा
दिशाहीन , आवारा


कितनी लाजवाब अभिव्यक्ति है ! इन अनन्त अभिलाषाओ को आपने दिशाहीन और आवारा नाम दे कर इनको सही मकाम दे दिया !

रामराम !

Amit said...

सीमा जी...बहुत हे अच्छा लिखा है आपने...मन की अभिलाषा होती ही है ऐसी ....
जहाँ ना कोई बंधन होता है ना कोई रोक टोक....बस अपने कल्पनाओं के घोडे पर सवार होकर उन्मुक्त विचरण करता रहता है..

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" said...

सीमा जी
नमस्कार
मन की अभीलाशा,
रचना बहुत अच्छी लगी,
बधाई
आपका
विजय

'sakhi' 'faiyaz'allahabadi said...

कैसे अब यह प्यास बुझेगी
चक्छु साक्ष जितना पीलो
हाँ यादों के कोप भवन में
कुछ बीते लम्हे जी लो

प्रेम प्रतीक्षा प्रति छण है
किसे ढूंढता विचलित व्याकुल मन है
मत फैलाओ समक्ष किसी के
विरह विलीन दामन सी लो

मीत said...

"ना जाने"
क्या पाने को मचल रही...
मन की अभिलाषा
दिशाहीन , आवारा
सच है...
---मीत

Rakesh Kaushik said...

बहुत हे अच्छा लिखा है आपने- दिशाहीन , आवारा
रचना बहुत अच्छी है

Arvind Mishra said...

यही तो कशिश है मन न जाने क्या पाना चाहता है और यही चाहत जीजिविषा बन जिलाए चलती है ! बेहतरीन रचना !

रंजन said...

ये ही है मन की अभिलाशा!!

COMMON MAN said...

raymonds' man ki tarah perfect.

Gyan Dutt Pandey said...

मन की अभिलाषा तो निश्चय ही दिशाहीन आवारा होती है। उस पर संयम की लगाम से जो परिणाम निकलता है - वह अभूतपूर्व होता है। जैसे यह पोस्ट।

रश्मि प्रभा said...

bahut hi achhi lagi mann ki abhilashaa........

Pyaasa Sajal said...

cchoti chhoti panktiyo mein keh di badi baat :)

ek ghazal aapke sujhaav aur maargdarshan chahti hai..
http://pyasasajal.blogspot.com/2008/12/blog-post_23.html

sidheshwer said...

फ़िल्म रजनीगंधा का गीत -'कई बार यूँ भी देखा है''..याद आ गया.
बहुत अच्छा!!

विनय said...

एक याद रह जाने वाली सुन्दर कविता

"अर्श" said...

सीमा जी आपका ये नया अंदाज भी खूब भाया बहोत ही बढ़िया शब्दों के प्रयोग से बनी बेहतरीन कविता ढेरो बधाई स्वीकारें...


अर्श

राज भाटिय़ा said...

मन की अभिलाषा का बहुत सुंदर चित्रण.
आप का आभार

जी.के. अवधिया said...

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति!!!

सीमा जी,

कृति निर्देशिका में ढेर सारी रचनाएँ देने के लिये कोटिशः धन्यवाद!

मोहन वशिष्‍ठ said...

मन की अभिलाषा
दिशाहीन , आवारा

वाह सीमा जी अच्‍छी कविता साथ में चित्र भी बहुत अच्‍छे हैं

बवाल said...

आदरणीय सीमाजी,
’मन की अभिलाषा’ एक बहुत ही उम्दा अभिव्यक्ति हुई आपकी. इस अतिसार्थक कविता पर ढेरों बधाइयां स्वीकार करें जी.

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

बड़े दिन की शुभ कामनायें....

रविकांत पाण्डेय said...

अच्छी प्रस्तुति। मन की अभिलाषा को शब्दों में बाँध पाना कितना मुश्किल है फ़िर भी आपने सफल प्रयास किया है।

creativekona said...

Seemaji,
Man Kee Abhilasha men to ...apne poore ek jeevan darshan ko chitrit kar diya hai.Hamara ye chanchal man...to tamam ikshaon,abhilashaon ke peechhe bhagta hai..par use niyantrit karta hai hamara hridaya.
Bhav poorna kavita ke liye badhai.
Hemant Kumar

Vijay Kumar Sappatti said...

man ki abhilaasha ka shaandar chitran .. shabdo ka bhaavpoorn istemaal ...

bahut si badhai ...

bahut dino se aap mere blog par nahi aayi .. kuch nayi rachnaaye aapke bahumulya comments ka intjaar kar rahi hai ..

vijay
pls visit my blog :
http://poemsofvijay.blogspot.com/

mukesh said...

bahut kuhb likha hai seema ji ,kitne sunder sabdo main aapne abhiviyaqt kiya hai aapne....


"ना जाने"
क्या पाने को मचल रही...
मन की अभिलाषा
दिशाहीन , आवारा


ek baar fir se dhero badhiya savikar karee

Pankaj said...

लाजवाब सोच है आपकी अनुरोध है मेरे भी ब्लॉग पर पधारे

vipinkizindagi said...

बहुत सुंदर भाव

G M Rajesh said...

jordaar

Pyaasa Sajal said...

fursat mein ispe gaur famaaye...
vyang mein meri pehli koshish ko yahaan padhe:

http://pyasasajal.blogspot.com/2008/12/blog-post_26.html

प्रकाश बादल said...

सुन्दर है मन की अभिलाषा। वाह वाह।

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) said...

"ना जाने"
क्या पाने को मचल रही...
मन की अभिलाषा
दिशाहीन , आवारा...........इक तृप्ति भर ही तो चाहती है...... इसे क्यूँ आवारा कहतीं हैं....!!