3/07/2011

अश्को के घुंघरू




"अश्को के घुंघरू "

धडकनों के अनगिनत जुगनू
कहाँ सब्र से काम लेते हैं
चारो पहर खुद से उलझते हैं
तेरे ही किस्से तमाम होते हैं
लम्हा लम्हा तुझको दोहराना
यही एक काम उल्फत का
हवाओं के परो पर लिखे
इनके पैगाम होते हो
कभी बेदारियां खुद से
कभी शिकवे शिकायत भी
तेरी यादो की शबनम में
मेरे अश्को के सब घुंघरू
तबाह सुबह शाम होते हैं
धडकनों के अनगिनत जुगनू
कहाँ सब्र से काम लेते हैं

23 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

कभी कभी अश्कों के घुन्घरी बेआवाज़ भी होते हैं ...

सुन्दर भावपूर्ण रचना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर नज़्म!

ताऊ रामपुरिया said...

तेरी यादो की शबनम में
मेरे अश्को के सब घुंघरू
तबाह सुबह शाम होते हैं
धडकनों के अनगिनत जुगनू
कहाँ सब्र से काम लेते हैं


अत्यंत प्रभावशाली रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

अभिन्न said...

तेरी यादो की शबनम में
मेरे अश्को के सब घुंघरू
तबाह सुबह शाम होते हैं
धडकनों के अनगिनत जुगनू
कहाँ सब्र से काम लेते हैं
......dhadkanon ke jugnoo.ashqon ke ghunghroo...kya lazawab shabd chyan hai...its great love lyric.your style...your brand.advitiy.

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुन्दर रचना

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत ही खूबसूरत और भावपूर्ण नज़्म...

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

seema ji,
bohat hee wadiyaa wali nazm..!!

सतीश सक्सेना said...

खूबसूरत रचना के लिए शुभकामनायें आपको ! !

दिगम्बर नासवा said...

लम्हा लम्हा तुझको दोहराना
यही एक काम उल्फत का
हवाओं के परो पर लिखे
इनके पैगाम होते हो ...

बहुत खूब ... सच है धड़कन पर किसी का बस नहीं होता ... ख़ास कर जब धड़कन प्यार में धड़कती है ...
लाजवाब रचना है ...

डॉ. मनोज मिश्र said...

बेहद सुन्दर और भावपूर्ण रचना,आभार.

: केवल राम : said...

कभी शिकवे शिकायत भी
तेरी यादो की शबनम में
मेरे अश्को के सब घुंघरू
तबाह सुबह शाम होते हैं
धडकनों के अनगिनत जुगनू
कहाँ सब्र से काम लेते हैं


वाह ..सब कुछ समझा गयी आपकी यह पोस्ट .

Udan Tashtari said...

क्या बात है, बहुत सुन्दर.

संतोष पाण्डेय said...

सुन्दर भावपूर्ण रचना.

हरीश सिंह said...

आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा.......... यहाँ भी आये.....www.upkhabar.in

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीया सीमा गुप्ता जी
सादर सस्नेहाभिवादन !

धडकनों के अनगिनत जुगनू
कहां सब्र से काम लेते हैं …
चारो पहर खुद से उलझते हैं
तेरे ही किस्से तमाम होते हैं


वाह वाऽऽह ! क्या बात है !

तेरी यादो की शबनम में
मेरे अश्को के सब घुंघरू
तबाह सुबह शाम होते हैं



काश ! इस रचना को आपने अपनी मखमली आवाज़ में यहां लगाया होता
आपकी एक रचना सुन कर गया था , अभी तक गूंज रही है कानों में …

चार दिन पहले आ'कर जा चुके नारी शक्ति को समर्पित
विश्व महिला दिवस की हार्दिक बधाई !
शुभकामनाएं !!
मंगलकामनाएं !!!

♥मां पत्नी बेटी बहन;देवियां हैं,चरणों पर शीश धरो!♥


- राजेन्द्र स्वर्णकार

Vijay Kumar Sappatti said...

shaandar kavita seema ji

amazing words, very expressive..


badhayi sweekar kare..

---------

मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html

Kunwar Kusumesh said...

हफ़्तों तक खाते रहो, गुझिया ले ले स्वाद.
मगर कभी मत भूलना,नाम भक्त प्रहलाद.
होली की हार्दिक शुभकामनायें.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

होली के पर्व की अशेष मंगल कामनाएं। ईश्वर से यही कामना है कि यह पर्व आपके मन के अवगुणों को जला कर भस्म कर जाए और आपके जीवन में खुशियों के रंग बिखराए।
आइए इस शुभ अवसर पर वृक्षों को असामयिक मौत से बचाएं तथा अनजाने में होने वाले पाप से लोगों को अवगत कराएं।

डॉ० डंडा लखनवी said...

करुणा के स्वर में रची-बसी बेहतरीन
गजल के लिए बधाई।
===================
"हर तरफ फागुनी कलेवर हैं।
फूल धरती के नए जेवर हैं॥
कोई कहता है, बाबा बाबा हैं-
कोई कहता है बाबा देवर है॥"
====================
क्या फागुन की फगुनाई है।
डाली - डाली बौराई है॥
हर ओर सृष्टि मादकता की-
कर रही मुफ़्त सप्लाई है॥
=============================
होली के अवसर पर हार्दिक मंगलकामनाएं।
सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

Hadi Javed said...

कभी बेदारियां खुद से
कभी शिकवे शिकायत भी
तेरी यादो की शबनम में
मेरे अश्को के सब घुंघरू
तबाह सुबह शाम होते हैं
Adarniya Seema ji
aapke Blog per pahli baar aane ke liye Kshma Chahta hun. Aaj main apne aap ko dhanay mahsus kar raha hun.
Seema ji
Waqai aapki lekhni man ke andar halchul karti hui Bhavnaon ko ukerne ka kaam karti hai.
"Ashqon ke ghunghru" kahi na kahi aapki bhavnaon ko vyaqt kar rahe hain. Behad bhavpurn shabdon ke duara rachi gayi is kavita ke liye aapko hardik badhai.
Hadi Javed

राजेन्द्र राठौर said...

bahut sundar

Arvind Mishra said...

सुन्दर रचना

mukesh said...

abhut hi badhiya likha hai seema ji humari taraf se dhero badhiya savikar kare