4/27/2009

"बारिशों ने घर बना लिए "

"बारिशों ने घर बना लिए "


यादे तेरी अश्रुविहल हो
असहाय कर गई
आँखों मे कितनी
बारिशों ने घर बना लिए

गूंजने लगा ये मौन
तुझको पुकारने लगा
व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए

बिखरने लगे क्षण प्रतीक्षा के
अधैर्य हो गये
टूटती सांसो ने
दुआओं मे तेरे ही
हर्फ सजा लिए ............

http://swargvibha.0fees.net/june2009/Kavita/barish%20ko.htm

41 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

गूंजने लगा ये मौन
तुझको पुकारने लगा
व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए


बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति. शुभकामनाएं.

रामराम.

"अर्श" said...

SEEMA JEE AAPKE LEKHAN KE KYA KAHANE USME BAHI SHUDH HINDI KE SHBD JAB PRAYUKT KIYE JAATE HAI KAVITAWON ME TO DIL KO HARDIK KHUSHI HOTI HAI... UPAR SE ITNE KHUBSURAT AUR ACHHE KHAYAALAAT JISME YE KAHAA GAYAA HOKE AANKHON ME KITNE BAARISHON NE APNAA GHAR BANAA LIYAA BAHOT HI UCHI SOCH HAI YE DHERO BADHAAYEEE AAPKO...


ARSH

Rakesh Kaushik said...

व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए.
बिखरने लगे क्षण प्रतीक्षा के

अधैर्य हो गये
टूटती सांसो ने
दुआओं मे तेरे ही

बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति

Rakesh Kaushik

Arvind Mishra said...

चिर प्रतीक्षा की प्राणेर व्यथा !

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

यादे तेरी अश्रुविहल हो
असहाय कर गई
आँखों मे कितनी
बारिशों ने घर बना लिए

बहुत ही उम्दा अभिव्यक्ति. इस रचना कोई जबाब नहीं . आभार

mehek said...

गूंजने लगा ये मौन

तुझको पुकारने लगा

व्यथित हो सन्नाटे ने भी

सुर से सुर मिला लिए

waah seemaji gerai se bhawnao ko bauan karna aapki kalam khub janti hai,behad sunder abhivyaki.

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर भाव, सुन्दर रचना है।बधाई।

गूंजने लगा ये मौन
तुझको पुकारने लगा
व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए

P.N. Subramanian said...

कोयल की कूक सी लगी जो आजकल सुबह से ही सुनाई पद रही है. सुन्दर रचना. आभार.

Anil Pusadkar said...

सुन्दर्।

manoj riadas said...

बहुत लाजवाब

manoj riadas said...

बहुत लाजवाब बहुत सुन्दर

manoj riadas said...

बहुत लाजवाब बहुत सुन्दर

अभिषेक ओझा said...

'व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए'
वाह !

Ashish Khandelwal said...

गूंजने लगा ये मौन
तुझको पुकारने लगा
व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए

बहुत खूबसूरत तरीके से आपने लफ्जों को ये मायने दिए.. आभार

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत सुन्दर संयोजन

डॉ .अनुराग said...

आँखों मे कितनी
बारिशों ने घर बना लिए

bahut khoob....

दिगम्बर नासवा said...

गूंजने लगा ये मौन
तुझको पुकारने लगा
व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए

मोन और सन्नाटे से बोलती हुयी रचना............वाह...........शब्दों को नया अर्थ दे दिया इस रचना नें.......खूबसूरत एहसास

मीत said...

व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए
वाह.. वाह..
ऐसा लगता है जैसे की आप कभी कभी शब्दों से चित्र बनती हो...
बहुत सुंदर...
मीत

Udan Tashtari said...

आँखों मे कितनी
बारिशों ने घर बना लिए


---अद्भुत संयोजन!! बहुत खूब!

अल्पना वर्मा said...

व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए.
बिखरने लगे क्षण प्रतीक्षा के

--बारिशों ने घर बना लिए!
वाह!
-कितना सुन्दर लिखा है!

दर्द को इतनी खूबसूरती से शब्दों में पिरो कर प्रस्तुत करना बहुत खूब लगा!

Birds Watching Group Ratlam (M.P.) said...

ghar banaaya aankon me baarish ne
sannate milaataa rahaa sur
kya kahen pratikshaa me
udaas hain rah rah ke dur

मोहन वशिष्‍ठ said...

गूंजने लगा ये मौन
तुझको पुकारने लगा
व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए

बहुत ही लाजवाब रचना

irdgird said...

बहुत खुबसूरत लिखती हैं आप। बधाई।

Mumukshh Ki Rachanain said...

शब्दों का अद्भुत संयोजन.
अति सुन्दर रचना.

बधाई.

चन्द्र मोहन गुप्त

Rakesh said...

Again a good one....aapka jawab nahi

विनय said...

हृदयस्पर्शी रचना ने मन गीला कर दिया

---
तख़लीक़-ए-नज़रचाँद, बादल और शामगुलाबी कोंपलेंतकनीक दृष्टा

गौतम राजरिशी said...

इस कलम को नमन
"टूटती सांसो ने / दुआओं मे तेरे ही / हर्फ सजा लिए .."

बहुत सुंदर

महामंत्री - तस्लीम said...

अक्सर आपकी रचनाओं को पढकर आश्चर्य होता है कि आप इतनी मार्मिक रचनाएँ कैसे लिख लेती हैं।

----------
S.B.A.
TSALIIM.

अभिन्न said...

"बिछड़ कर आसमान से जब बारिशों ने सोचा
ज़माने में बरसते आ रही हूँ बरसों से लेकिन
क्या पाया ?
कुछ कम बरस गई तो ऐतराज़ उठे
कुछ ज्यादा बरस गई तो इल्जाम लगे
.....नदियों ने किनारों पर कहर बरपा दिए
समंदर में मिली तो सुनामी सी बदनामी लगी होने
तब खुदा ने बारिशों को आप की आँखों का पता दे दिया
ओर उन बारिशों ने उनमे अपने घर बना लिए
.......मौन की गूंज बड़ा ही विरोधाभासी लेकिन प्रभावी शब्द संकलन लगा
धन्यवाद इस कालजयी रचना को प्रेषित करने के लिए
सैदेव आपका( reader )
sure

kavi kulwant said...

bahut khoob..

डॉ. मनोज मिश्र said...

व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए....
बहुत सुंदर .

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

लाजवाब!

अमिताभ श्रीवास्तव said...

aankho me baarish, moun ka pukaarna, sannate ka sur sadhna, pratiksha ke bikhre shan......aour KHOOBSOORAT rachna...WAH,
goutamji ki tarah hi
IS KALAM KO NAMAN

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

बहुत खूब.. बेहतरीन प्रस्तुति.. आभार

रवीन्द्र दास said...

itna vishad! he bhagvan, aankhe kabhi aaine se door jati nahi?

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " said...

sunadr

जितेन्द़ भगत said...

सुंदर कल्‍पना-
सन्नाटे ने भी सुर से सुर मिला लिए

Vijay Kumar Sappatti said...

seema ji ,

main ye soch raha hoon ki , maine ye kavita miss kaise kar diya ...

bahut sundar .. kya shaandar shabdchitr pesh kiya hai aapne apni kavita men..

badhai kabool karen..

regards
vijay
pls visit my blog for new poems
www.poemsofvijay.blogspot.com

mukesh said...

aati sunder rachna

dhero badhiya

डा. श्याम गुप्त said...

वाह सीमा, क्या कहने,

वो न समझ्ता मन्जर सुख का ,
यदि वो झेला दर्द न होता।

दर्द निले तो तडप खुशी से ,
दर्दे जिगर सुहाना होता।

Pradeep Kumar said...

यादे तेरी अश्रुविहल हो

असहाय कर गई

आँखों मे कितनी

बारिशों ने घर बना लिए

wah kya baat hai !
jitnaa sundar blog hai utni hi achchhi rachnaayein