11/29/2012

स्मृतियों के झरोखे से : भारतीय सिनेमा के सौ साल -25 मैंने देखी पहली फिल्म

http://radioplaybackindia.blogspot.in/2012/11/sahab-biwi-aur-ghulam-first-seen-movie.html

कवयित्री सीमा गुप्ता ने देखी फिल्म 'साहब बीवी और गुलाम'


स्मृतियों के झरोखे से : भारतीय सिनेमा के सौ साल -25

मैंने देखी पहली फिल्म 
भारतीय सिनेमा के शताब्दी वर्ष में ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ द्वारा आयोजित विशेष अनुष्ठान- ‘स्मृतियों के झरोखे से’ में आप सभी सिनेमा प्रेमियों का हार्दिक स्वागत है। गत जून मास के दूसरे गुरुवार से हमने आपके संस्मरणों पर आधारित प्रतियोगिता ‘मैंने देखी पहली फिल्म’ का आयोजन किया है। इस स्तम्भ में हमने आपके प्रतियोगी संस्मरण और रेडियो प्लेबैक इण्डिया के संचालक मण्डल के सदस्यों के गैर-प्रतियोगी संस्मरण प्रस्तुत किये हैं। आज के अंक में हम कवयित्री सीमा गुप्ता का प्रतियोगी संस्मरण प्रस्तुत कर रहे हैं। सीमा जी ने अपने बचपन में देखी, भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित फिल्म ‘साहब बीवी और गुलाम’ की चर्चा की है। 

http://radioplaybackindia.blogspot.in/2012/11/sahab-biwi-aur-ghulam-first-seen-movie.html
फिल्म देख कर औरत का दर्द महसूस हुआ जिसे मीनाकुमारी जी ने परदे पर साकार किया





3 comments:

Mukesh Garg said...

ye baat sach hai ki old is gold, par iske sath ye bhi kahunga ki jo baat old movies me hoti tyhi we aaj kal ki movies me nhi hoti koshish bhale unki rahe wo sab klar gujarne ki par wo baat ban nhi pati or rahi baat meena kumari ji ki to we adakara hi bauht badhiya or kuhbsurat thi jab we bhomika nibhati thi to esa lagta tha jese sach me esa hai un k sath........

हिंदी चिट्ठा संकलक said...

सादर आमंत्रण,
आपका ब्लॉग 'हिंदी चिट्ठा संकलक' पर नहीं है,
कृपया इसे शामिल कीजिए - http://goo.gl/7mRhq

मदन मोहन सक्सेना said...

कितना अच्छा लिखा है आपने।
बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति.हार्दिक बधाई और शुभकामनायें!
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |सादर मदन

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