1/22/2011

"कोई इस चाँद से पूछे"



"कोई इस चाँद से पूछे"

पहाड़ियों , घाटियों के ऊपर
बादलों की धारा में बहता
झील की
डबडबाती आँखों में तैरता
चुप सा तन्हा चाँद का टुकड़ा
सितारों की जगमगाहट ओढ़
रात और दिन के बीच का सफ़र
निरंतर तय कर रहा है
एकांत में जीना कैसा होता है
कोई इस चाँद से पूछे....

11 comments:

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

seema ji...
nav varsh mubaarak...
chaan se poochhti ek hridaysparshi rachna!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब ... सच कहा है ... तनहा चाँद सब चुपचाप सहता है ... मूक रहता है ... खूबसूरत सी नज़्म ..

अभिन्न said...

एकांत में जीना कैसा होता है
कोई इस चाँद से पूछे....
kavy ki khubsurti shabdon me nahi bandh sakti...uprokt do antim panktiyan jahan khatm hoti hai vahi se kavita ka prarambh hota hai jo padhne vale ko ek lambi soch tak pa hunchane me sahayak hai.चुप सा तन्हा चाँद का टुकड़ा
khud tanha hote hue bhi premiyon ke premsafar me hamsafar ki tarah chalaymaan hai.adbhut lekhan ke liye badhai Seema ji

SAMEER said...

DI PHIR CHAAND SE PUCHO ..
CHALO BICHARA NANHA SA CHUPCHAP CHAAND KYA KAHEGA ...ACCHA HAI

Pradeep said...

seema ji...
चाँद एकांत में जीता है.......मैं तो इसे एकांत रातों का साथी समझता था.....ये तो खुद अकेला निकला....
बहुत ही सुन्दर ख्याल ......

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चाँद के साथ सितारे भी होते हैं ...चाँद खुद अकेला हो कर भी बहुत से लोगों का साथ निबाहता है

amrendra "aks" said...

डबडबाती आँखों में तैरता
चुप सा तन्हा चाँद का टुकड़ा
सितारों की जगमगाहट ओढ़
रात और दिन के बीच का सफ़र
निरंतर तय कर रहा है
एकांत में जीना कैसा होता है
कोई इस चाँद से पूछे....


Bahut Khoob.....

Arvind Mishra said...

चाँद यूँ ही गुम सुम ही क्यों रह जाए कभी बताये भी तो कुछ !

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब कहा आप ने , धन्यवाद

"अर्श" said...

आज कहीं पढ़ रहा था की एकांत में खडा पेड़ जीने का तरीका सिखाता है .... और इधर आपका चाँद ... अछि लगी रचना .!

अर्श

Hadi Javed said...

Seema ji
"Koi is chand se puchhe"......... behtreen nazm jisme'n zidagi ki un sachchaiyon ko aapne chhune ka prayas kiya jo na sirf haqeeqat hain balki kadwa sach bhi hain waqai insaan ki zindagi tanha shuru hoti aur ant bhi tanha hota hai puri zindagi insaan tamam rishton ko samet'ta hua aakhir mein tanha hi jata hai.....Bahut Khubsurat kavita ... Dil ko chhute hue ahsaas....Badhai