6/14/2010

""नर्म लिहाफ" "


"नर्म लिहाफ"

सियाह रात का एक कतरा जब
आँखों के बेचैन दरिया की
कशमश से उलझने लगा
बस वही एक शख्स अचानक
मेरे सिराहने पे मुझसे आ के मिला

मै ठिठक कर उसके एहसास को
छुती टटोलती आँचल में छुपा
रूह के तहखाने में सहेज लेती हूँ
कुछ हसरतें नर्म लिहाफ में
दुबके मचलने लगती हैं
जब वही एक शख्स अचानक
मेरे सिराहने पे मुझसे आ के मिला 

कुछ मजबूरियों की पगडंडियाँ
जो मेरे शाने पे उभर आती हैं,
अपने ही यकीन के स्पर्श की
सुगबुगाहट से हट
चाँद के साथ मेरी हथेलियों में
चुपके चुपके से सिमटने लगती है
सच वही बस वही एक शख्स जब अचानक
मेरे सिराहने पे मुझसे आ के मिल

49 comments:

श्यामल सुमन said...

इस रचना के शब्द शब्द में बातें हैं कुछ खास।
सीमा के निःसीम भाव में सुमन सुखद एहसास।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

अजय कुमार said...

सुंदर भावपूर्ण रचना ।अच्छी अभिव्यक्ति

Smart Indian said...

बहुत बढिया!

Arvind Mishra said...

रोमांचित रूमानी अहसास की कविता !

रंजन said...

जादू है आपके शब्दों में..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अहसासों को खूबसूरती से लिखा है..

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

यह नर्म लिहाफ ... शीर्षक बहुत अच्छा लगा......मै ठिठक कर उसके एहसास को
छुती टटोलती आँचल में छुपा
रूह के तहखाने में सहेज लेती हूँ
कुछ हसरतें नर्म लिहाफ में
दुबके मचलने लगती हैं
जब वही एक शख्स अचानक
मेरे सिराहने पे मुझसे आ के मिला .....

यह lines बहुत भावुक और दिल को टच कर गयीं.....

बहुत सुंदर प्रेज़ेंटेशन .......

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

wah wah wah...seema ji, dil ko chhone wali baat keh di apne..

aafareen!!

P.N. Subramanian said...

Microsoft रचना. आभार

राकेश कुमार said...

सीमा जी, सशक्त प्रस्तुतीकरण ! एक स्त्री के दर्द को महसूस कराती आपकी पन्क्तिया फिर से एक बार मन को छु गयी, उसमे भी लाजवाब शीर्षक ने तो जैसे नि:शब्द सा कर दिया.

sunil kumar said...

शीर्षक बहुत सुंदर है सुंदर अभिव्यक्ति दिल से लिखी गयी रचना

Ria Sharma said...

Wonderful poetry ,page n profile..how come i never been here????

Cheers !!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बेहद मखमली अहसास के साथ..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

लाजबाव...

Vinay said...

बेहतरीन प्रस्तुति

Mrityunjay Kumar Rai said...

very beautiful. nicely composed.

http://madhavrai.blogspot.com/

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

सुंदर भावपूर्ण रचना !

मोहन वशिष्‍ठ said...

hamesha ki tarah behatrin seema ji

वाणी गीत said...

मै ठिठक कर उसके एहसास को
छुती टटोलती आँचल में छुपा
रूह के तहखाने में सहेज लेती हूँ
कुछ हसरतें नर्म लिहाफ में
दुबके मचलने लगती हैं....

ये एहसास , रूह के तहखाने , नर्म लिहाफ में दुबकी हसरतें
बस इस नर्म लिहाफ की नरमी में ही अटके हैं हम तो ...

shikha varshney said...

इस कविता के मनमोहक शीर्षक ने मुझे यहाँ आने पर मजबूर किया ,ओर यहाँ आकर बहुत ही खूबसूरत शब्दों की बुनाई पढ़ने को मिली .खूबसूरत गीत.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

"अर्श" said...

is khubsurat kavita ki tarif ke liye shabd dhudhataa fir rahaa hun sach kahun to seema ji , jaisa ki sabhi ne tarif ki hai iskaa shirshak hi ehsaasaat ko darshata hua hai, shabd shabd bolte huye . kamaal ki adaayagi hai aapki.... bahut bahut badhaayee kubul farmayen...


arsh

राजकुमार सोनी said...

आपने बहुत ही खूबसूरत लिखा है।
अरे भाइयों कोई मुझे भी सिखाओ यारों... अच्छा कैसे लिखा जाता है।

SELECTION - COLLECTION SELECTION & COLLECTION said...

सीमाजी आंटी !
सुंदर कविता पाठ ! एक बात तो पक्की है आपकी कविताओं का कोई सानी नही !
लेडी ग़ालिब को प्रणाम !
sampt

दिगंबर नासवा said...

कुछ मजबूरियों की पगडंडियाँ
जो मेरे शाने पे उभर आती हैं,
अपने ही यकीन के स्पर्श की
सुगबुगाहट से हट
चाँद के साथ मेरी हथेलियों में
चुपके चुपके से सिमटने लगती है

नर्म .. नाज़ुक एहसास लिए खूबसूरत नज़्म ... घुलते हुवे शब्दों जैसी ....

hem pandey said...

सुन्दर.

Amit Verma said...

I felt every word of
"LIHAF" Ultimate level of writing....SEEMA"

प्रदीप मानोरिया said...

हमेशा की तरह भाव भरी रचना

मुकेश कुमार सिन्हा said...

shandaar rachna..........bhawpurn abhivyakti ke saath..:)

waise sach me aapne narm lihaf ke tale bade pyare aur najuk sabdo ko saheja hai.........badhai!!

follow karne ke ko utprerit kar gaya aapka blog.......:)

nimantran: hamare blog pe aane ka...:D

मुकेश कुमार सिन्हा said...

shandaar rachna..........bhawpurn abhivyakti ke saath..:)

waise sach me aapne narm lihaf ke tale bade pyare aur najuk sabdo ko saheja hai.........badhai!!

follow karne ke ko utprerit kar gaya aapka blog.......:)

nimantran: hamare blog pe aane ka...:D

अभिन्न said...

कुछ हसरतें नर्म लिहाफ में
दुबके मचलने लगती हैं
जब वही एक शख्स अचानक
मेरे सिराहने पे मुझसे आ के मिला
नर्म लिहाफ बहुत उत्कृष्ट रचना है खासकर उपरोक्त पंक्तिया
rgards

वन्दना अवस्थी दुबे said...

सुन्दर रचना है सीमा जी.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मंगलवार 22- 06- 2010 को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है


http://charchamanch.blogspot.com/

देवेन्द्र पाण्डेय said...

सुंदर कविता ..सुंदर चित्र ..खूबसूरत एहसास का सृजन करते हैं.

नीरज गोस्वामी said...

शब्दों से भाव के जादू जगाना कोई आपसे सीखे...अद्भुत रचना...वाह...बधाई...
नीरज

निर्मला कपिला said...

कुछ मजबूरियों की पगडंडियाँ
जो मेरे शाने पे उभर आती हैं,
अपने ही यकीन के स्पर्श की
सुगबुगाहट से हट
चाँद के साथ मेरी हथेलियों में
चुपके चुपके से सिमटने लगती है
वाह ये नर्म एहसास ही तो सीमा जी की निशानी हैं बहुत सुन्द्क़--- बधाइ

Unknown said...

नर्म लिहाफ सा नर्ण आहसास जगाती हुई नज्म ।

राज एन.के.वी. said...

'नर्म लिहाफ'..नाम से ही मखमली अहसास होता है..हरेक पंक्ति नर्म अहसासों के बेजोड़ तानेबाने में लिपटी हुई ठंडी-ठंडी रात में नर्म लिहाफ की छुवन से गुदगुदाती हुई, ह्रदय को गरमाती चित्रात्मकता लिए हुवे हुई प्रतीत होती है.. मानो कविता ख़ुद इस लिहाफ को ओढ़कर रात की रानी की खुशबू ले, ठंडी लहर के झोंके की तरह एक सुखद अहसद करा गई...आदरणीया सीमा जी की ये कविता इतनी मन को भाई कि मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता..बस इतना ही कह पाऊंगा... ताजमहल सी ख़ूबसूरत और गुलाबों सी महकती हुई रचना ! साधुवाद सीमा जी.

Parul kanani said...

seema ji sooraj ko deepak kya dikhana...sahbd nahi bas!

ALL INDIA POETESS CONFERENCE said...

Ur poetry as well as d choice of fotos in Ur profile is praiseworthy . AIPC invites u 2 join its 5th International Congress at Cairo , Egypt on 17th July & d Felicitation Session wll b held at Istanbul, Turkey on 25th July 2010 & if possible again in 11th National Mega Convention at Baroda, Gujarat on 1-2-3 January 2011. AIPC promotes d Poetess of ur stature globally, U can spare a little time from ur busy schedules to know about AIPC on logging: www.aipc.weebly.com. & plz send ur books

Dr. Lari Azad said...

It was great to see ur commendable work on d screen.I bless u 4 ur brilliant emotional poems & ur praiseworthy career may be cited as a role model 4 present day talented girls. May God bless u 2 contribute more & more on d Horizon of Literature & Art. - Prof. Lari Azad, www.drlariazad.webs.com

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

मन को भिगो गई शब्दों की यह सुंदर वर्षा।
---------
किसने कहा पढ़े-लिखे ज़्यादा समझदार होते हैं?

Meena C hopra said...

bahut hi badhiya. bahut samaya ke baad itna achha kucch padha.

स्वाति said...

मै ठिठक कर उसके एहसास को
छुती टटोलती आँचल में छुपा
रूह के तहखाने में सहेज लेती हूँ

खूबसूरत एहसास,खूबसूरत रचना !

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर रचना सीमा जी, लेकिन बहुत समय बाद आप दिखाई दी?

G M Rajesh said...

nice

शरद कोकास said...

सुन्दर ... लेकिन सिरहाने या सिराहने .. क्या सही है >?

vandan gupta said...

बहुत ही सुन्दर भावभीनी रचना…………नर्म लिहाफ़ सी।

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

in shabdon men aksar lihaf hi nahin balki dil isase jyada narm ho jataa hai.....jitna ki is vakt mera ho chalaa hai....sach.....seemaa....ji....!!