1/02/2009

"कैसे तुम्हे भुलाऊ "



"कैसे तुम्हे भुलाऊ "
गर ऐसे याद करोगी मुझको,
कैसे मै जी पाउँगा ? ??

ये शब्द तुम्हारे ....
बाँध तोड़ संयम के सारे , 
बीते लम्हों के कालीन बिछाएं ,

मौन स्वरों के गलियारे मे ,
यादो के घाव पग धरते जायें,

सानिध्य का एहसास तुम्हारा
विचलित कर मन को भरमाये ,

संकल्प तुम्हारे नृत्य करे और ,
बोल गूंज कर प्रणय गीत सुनाये
"कैसे तुम्हे भुलाऊ "


http://hindivangmay1.blogspot.com/2009/01/blog-post_02.html

32 comments:

Amit said...

बहुत ही अच्छी कविता है....सही में कुछ यादें भुला कर भी हम नही भूल सकते...

Arvind Mishra said...

संकल्प तुम्हारे नृत्य करें
बोल गूंज कर प्रणय सुनाये
भावभीना ,शुक्रिया !

नारदमुनि said...

bhulane kee koshish bekar hai. koi kisi ko nahi bhula sakta. bas vakt hai jo kabhee kabhee kisi ki yad dhundhali kar deta hai.

ताऊ रामपुरिया said...

गर ऐसे याद करोगी मुझको,
कैसे मै जी पाउँगा ? ??

बहुत सुन्दरतम भावाभिव्यक्ति।

रामराम।

रंजन said...

बहुत अच्छी!

Rakesh Kaushik said...

Bahut hi Behtareen Likha hai. Aap DHeere Dheere magar bade solid tareeke se dil me ghar karte ja rahe ho?
u r just atulaniya

Rakesh Kaushik

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

गर ऐसे याद करोगी मुझको,
कैसे मै जी पाउँगा ? ??
"कैसे तुम्हे भुलाऊ "

naye saal ki shruaat behtreen klaam se . dhnybaad

मीत said...

गर ऐसे याद करोगी मुझको,
कैसे मै जी पाउँगा ? ??
ये शब्द तुम्हारे ....
बाँध तोड़ संयम के सारे ,
बीते लम्हों के कालीन बिछाएं
intrusting...
like it...
---meet

COMMON MAN said...

शब्दों के साथ आप चित्रों का खजाना कहां से लाती हैं.

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

मौन स्वरों के गलियारे मे,
यादो के घाव पग धरते जायें,
अच्छी कविता है.

हिमांशु said...

अच्छी कविता.
धन्यवाद.

मोहन वशिष्‍ठ said...

बहुत खुबसूरत कविता है सीमा जी बेहतरीन कविता के साथ नया साल मुबारक हो

अक्षय-मन said...

गर ऐसे याद करोगी मुझको,
कैसे मै जी पाउँगा ? ??
बिल्कुल सही कहा भुला नही सकते वो याद करेंगे तो,,,, कुछ ऐसे ही तार जुड़े होते हैं दो चाहने वालों के बीच फ़िर भी मजबूरियां आ जाती हैं.......
बहुत ही अच्छी काव्य रचना है .......

अक्षय-मन

विवेक सिंह said...

बहुत सुन्दर कविता . शाबाश !

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर रचना, नये साल मै तो आप की कलम कुछ अलग रंग मै आई है.
धन्यवाद

डा. फीरोज़ अहमद said...

बहुत खुबसूरत कविता

hem pandey said...

मौन स्वरों के गलियारे मे ,

यादो के घाव पग धरते जायें,
"कैसे तुम्हे भुलाऊ "

बढिया भाव. साधुवाद.

"अर्श" said...

सीमा जी नव वर्ष की ढेरो शुभकामनाएं ... बहोत ही सुंदर कविता लिखी है आपने बहोत ही दर्द छुपा है इसमे ....एक गीत याद आगई ...
तुझे भुलाना तो चाहा,लेकिन भुला न पाये ..
जितना भुलाना चाहा, तुम उतना याद आए.....


अर्श

विनय said...

सुन्दर अति सुन्दर, सीमा जी बहुत बढ़िया!

creativekona said...

Seema ji,
Bahut sunar aur bhavuktapoorna panktiyan hai.Badhai.
Nav varsh apke jeevan men karodon foolon kee khushboo le aye is mangal kamna ke sath.
Hemant Kumar

अनूप शुक्ल said...

गर ऐसे याद करोगी मुझको,
कैसे मै जी पाउँगा ? ??

भला ऐसे भी किसी को पूछना चाहिये?

G M Rajesh said...

bhoolne ki bhool na karo
avgun chit naa dharo
yaaden hi to saharaa hai
bhool ke paanaa chahoge kyaa aakhir?

makrand said...

संकल्प तुम्हारे नृत्य करे और ,

बोल गूंज कर प्रणय गीत सुनाये

"कैसे तुम्हे भुलाऊ "

well compsed lines and exploreing the horizon of thoughts too.
regards

डॉ .अनुराग said...

ये शब्द तुम्हारे ....
बाँध तोड़ संयम के सारे ,
बीते लम्हों के कालीन बिछाएं ,

मौन स्वरों के गलियारे मे ,
यादो के घाव पग धरते जायें,


bahut khoob....hindipar bhi aapka adhikaar prshansa ka paatr hai...aor haan neeche tasveer behad khoobsurat hai...

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाकई ............. सुंदर अभिव्यक्ति.... सीमा जी...

amit verma said...

Kaise tumhe bhulayega, koi?
Tum unme se nahi, jinhe bhula diya jaye
A very good piece of work, from your pen, again.
Beautifully written

बवाल said...

ख़ूबसूरत अहसास !

jahhan said...

nice one

jahhan said...

nice one

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) said...

"कैसे तुम्हे भुलाऊ "..............मगर भुलाना भी क्यूँ है..........हाँ.........??

mukesh said...

"कैसे तुम्हे भुलाऊ "


bahut hi sunder bhaw


sach me kisi ko buhla pana kitna muskil hota hai..

VIJUY RONJAN said...

Wah..bahut khoob...aapki bhavuk bhari soch kavita aur nazm me aisi dhali ki...raat aankhon se aansu ban para para pighli...

likhte rahiye ...is se behtar koyi dawa nahin.