
"कभी किसी रोज""कभी किसी रोज"
सुनना चाहता हूँ तुम्हे
बैठ खुले आसमान के नीचे सारी रात
चुनना चाहता हूँ रात भर
तुम्हारे होठों से झरते मोतियों को
अपनी पलकों से एक एक कर
भरना चाहता हूँ अपनी हथेलियों में
चाँदनी से धुले तुम्हारे चेहरे की स्निग्धता
महसूस करना चाहता हू
तुम्हारे बालों से ढके अपने चेहरे पर
तुम्हारे साँसों की उष्णता सारी रात
वह रात जो समय की
सीमाओं से परे होगी
और फिर किसी सूरज के
निकलने का भय न होगा.
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42 comments:
बहुत ख़ूबसूरत चाह है!
---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम
लगता है आपके वेदना,आंसू और व्यग्रता का कारवां प्रेम के बगीचे में विश्राम के लिए रुक गया है और झूल रहा है श्रृंगार के झूले पर.
वाह यह हुयी न कोई बात -बात संयोग की हो तो भला क्यों लगे भला ! रच बस गयी मन में रचना !
वह रात जो समय की, सीमाओं से परे होगी
और फिर किसी सूरज के, निकलने का भय न होगा.
न तद्भासयते सूर्यो, न शाशांको न पावकः
यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धामम परमम् ममः (गीता)
बहोत ही बढ़िया लिखा है आपने ढेरो बधाई स्वीकारें ....
अर्श
बहुत खूबसुरत.
शुभकामनाएं.
tes. i like the spirit.
u done wht i think.
tht's superb.
u write n i feel.
full marks to u.
congratulation !
Rakesh Kaushik
वह रात जो समय की
सीमाओं से परे होगी
बेहद खूबसुरत अल्फ़ाज. शुभकामनाएं.
रामराम.
बहुत सुंदर कविता है...बहुत ही सुंदर खयालात हैं...
वाह!! बहुत शायराना ख्याल!! उम्दा भाव, उत्तम शिल्प. बधाई.
बहुत सुन्दर शब्द चित्र, वाह.
बेहद खूबसूरत लिखा है आपने
बहुत खूबसूरत!
बहुत बढ़िया लिखा है।
वाह वाह सीमा जी, एक सम्पूर्ण हिन्दी ग़ज़ल. कितनी सुन्दर अभिव्यक्ति है ये आपकी. अद्भुत.
बहुत खूबसूरत रचना....ओस की बूँद सी निर्मल...
नीरज
chah yahi
ke
har dil me
jana jaun
chah yahi
asmaan par
dhroov sa
dikhlayaa jaaun
chah yahi ke
bas
kahun jo manki
log samjhen
nishabdataa ko bhi
और फिर किसी सूरज के
निकलने का भय न होगा.
touch my heart again
---meet
वाह यह हुयी न कोई बात -बात संयोग की हो तो भला क्यों न लगे भला ! रच बस गयी मन में रचना !
सुन्दर - न सूरज निकलने का भय हो, न छिपने का। अनंत हो समय।
कभी कभी खराब भी लिखिए . बढिया लिखते लिखते बोर हुए जाते है :)
bahut khubsurat rachana
no comment.fully spechless,wordless,nishabd
वह रात जो समय की
सीमाओं से परे होगी
और फिर किसी सूरज के
निकलने का भय न होगा...........वह रात कित्ती गहरी होगी....इस कविता में समाई है जिसकी गहराई....सीमाजी आपकी इस कविता पर हमारा दिल उमड़ आया.... कुबूल करें....!!
Aap itna badhiya kaise likh sakti hain? mujhe jagjeet singh mil jayen to unhe kahun ki in alfaajon ko apni aawaj den...
हमेशा की तरह से अति सुंदर.
धन्यवाद
Superb
I loved this one, in particular . you are always a mistry....
Very nice, i simply love it, keep writing.
Apne hotho per sajna chata hon,
Aa tujhe mai gungunana chata hon,
Koi ansoo tere damen pe giraker,
Boond ko moti banana chata hon.
wishes
प्यार की एक सुंदर अभिव्यक्ति , आपकी कविता प्यार के सात रंगों से रंगी मन को प्यार क रंगों से रंग देती है
आपकी कविता पढ़ कर आपके प्यार के गहराई को सागर से तुलना करने को मन करता है
सीमाओं से परे होगी
और फिर किसी सूरज के
निकलने का भय न होगा.
bahut khubsurat rachana
बेहद खूबसूरत..
"और फिर किसी सूरज के
निकलने का भय न होगा."
बहुत सुंदर !! बहुत खूब !!
सस्नेह -- शास्त्री
और फिर किसी सूरज के...
bahut badhiya..
really..
thanks..
तुम्हारे बालों से ढके अपने चेहरे पर
तुम्हारे साँसों की उष्णता सारी रात
वह रात जो समय की
सीमाओं से परे होगी
और फिर किसी सूरज के
निकलने का भय न होगा.
कोई asmanjas नहीं है
चाहत और सिर्फ़ चाहत.
बेहतरीन .
wonderful poem seema, the undertone is touching ..and specially this line " seemaon se pare hongi " is your signature line ...
aap bahut acha likhti hai ...
meri badhai sweekaren ..
maine kuch nayi nazmen likhi hai , padhiyenga..
vijay
Pls visit my blog for new poems:
http://poemsofvijay.blogspot.com/
बेहतरीन हर बार की तरह सुंदर अभिव्यक्ति बधाई
"chaandni se dhule tumhare chehre ki snighd`ta mehsoos karna chaahta hooN..."
mun ki bahot hi sundar bhaavnaaoN, aur un ki karvatoN se bahot hi khoobsurat saakhshaatkaar...
bahot hi umda aur nafees nazm...!
mubarakbaad qubool farmaaeiN.
---MUFLIS---
वाकई, प्यार के इस अहसास में सब कुछ थम सा जाता है। सुंदर अभिव्यक्ति।
बेहद सुंदर मनमोहनी
बधाइयां
bahut hi kuhbsurat
badhiya
Wah seema ji behtar bhavabhivyakti
अद्वित्तीय है आपका रचना संसार .
अत्यंत सुखद .
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