tmannayen kahaan kab kisko bahlati hain dost gar wo poori ho bhi jaayen aur aa jaati hain dost haan magar ek hai tamanna usko paa lene ki dost raat aur din jiski yaadein aa ke tadpaati hain dost ab kahaan jaayen ke dil apnaa bahal jaaye kheen eik maayoosi si hasrat bekali laati hai dost
दिल में बेकली हो तभी हर शाम गुनाहगार लगे है तभी.... शिद्दत हो गर दिल में तो...अपने ही यार लगे है सभी...!! यार दो बोल मीठा भी बोल दे तो मान जाऊं मैं अभी... नफरत से लबालब तिरे ये हर्फ़ तो तलवार लगे है सभी....!! भीतर जो देख ले आदम तो ख़ुद को बदल ही दे अभी... बाहर तो इक अपने अपने सिवा खतावार ही लगे है सभी..!! हर कोई हर किसी को माफ़ कर दे तो सब बदल जाए... मन में बोझ लेकर जीने से जीना भी दुश्वार लगे है सभी..!! चन्द साँसे ही सौगात में लेकर आयें हैं हम सब यहाँ... हर नेमत को आपस में बाँट लें,कि यार लगे है सभी....!! मुहब्बत भरा दिल ये जो अपने पास ना हो "गाफिल" चूम कर कलियाँ कहें फूल को,कि खार लगे हैं सभी....!!
सांवली कुछ खामोश सी रात, सन्नाटे की चादर मे लिपटी, उनींदी आँखों मे कुछ साये लिए, ये कैसी शिरकत किए चली जाती है.... बिखरे पलों की सरगोशियाँ , तनहाई मे एक शोर की तरह, करवट करवट दर्द दिए चली जाती है.... कुछ अधूरे लफ्जों की किरचें, सूखे अधरों पे मचल कर, लहू को भी जैसे सर्द किए चली जाती है... सांवली कुछ खामोश सी रात अक्सर...
सीमा आपकी यह कविता भीतर तक झझकोर गई. दो लाइनें हैं-आपके लिए---------- बहुत ठंड होती हैं बरफीली हवाओं की परतें लाल खून भी कम गरम नहीं होता
"आंसू हूँ मैं ढलक जाउंगा , जहाँ चाहोगे दिल की शक्ल मे बदल जाऊंगा....."
मुझे गैर क्यूँ समझा ,,,अपना क्यूँ नहीं समझा
खुशियों का बाजार लुटा, निष्प्राण हुआ मन का मुख्यालय,रीती भावों की गागरिया 'परिचय' क्या सुख-चैन का ?
विवशता का परित्याग कर ,दर्पण मचला जिज्ञासा का,भ्रम की आगोश मे,मनमोहक श्रिंगार किया ...
जवाब न बना , रहा एक उलझा सा सवाल बनके , बहता रहा मुझमे वो हर लम्हा दर्द-ऐ-ख्याल बनके,
हम तो रहते थे,"कहीं"रूह की तहरीरों मे,
कहीं"लिखें थे,तेरी हाथ की लकीरों मे , हमें हैरत है की,तुमने नहीं देखा कैसे....
तुझको है इंतज़ार लफ्जों का,हम तेरा इंतज़ार करते हैं
दिल पे एक बोझ सा हमारे है,कह के कुछ अश्कबार करते हैं
सूरज जब मद्धम पड़ जाये और नभ पर लाली छा जाये
एकांत के झुरमुट में छुप कर मै द्वार ह्रदय का खोलूंगी तुम चुपके से आ जाना झाँक के मेरी आँखों मे एक पल में सदियाँ जी जाना
वहीं पर तुम जहाँ हो काग़जों पर,वहीं मैं आजकल रहने लगा हूँ .......
अपने महबूब की दुनिया में चला आया हूँ , अपना दिल लेके तमन्नाओं की सौगात लिये ,नयी दुनिया की नयी खुशियों की बारात लिये ,हाथ में हाथ लिये साथ में साथ लिये
देखो दिल बेकरार होने लगा जैसे पहला सा प्यार होने लगा ऐसे ही इश्क से हुं बचने लगा जो जूनून सा सवार होने लगा क्या कहूं दिल की कैसी मजबुरी तीर जो दिल के पार होने लगा
बात आयी क्यूँ जो बताई ना गयी
एक लम्हे की रुखसती का समा , दिल मे जैसे उठा धुआं , शोलों की लपक , आँखों में दहक और उम्मीद का बुझता दीया
"जो भी है वो तुम्हारा है"
सीने की दुखन आँखों की जलन , विरह के गीत ग़ज़ल यह भजन,
"इंतज़ार"
"पहाडियों पर धुंद मे रेल की पटरियों के पास बैठे उस मुसाफिर का इंतज़ार करते रहेंगे जिसे आना तो था कुछ अरसा पहले और जिसके आने का वक्त हमेशा यूँही टालता रहेगा......"
अभी जो धुप निकलने के बाद सोया है, वो सारी रात तुजे याद करके रोया है"(स्व. शमीम जयपुरी )
"मेरी बेकरारी ने मुझे आगाह किया , देख फिर उसने है तुझको बहुत ही "याद" किया
जब दिल डूबता हो,जब सब्र का दामन छूटता हो ,मुझे आवाज़ दे देना ............
"विरह का रंग"
"अगर उस पार हो तुम " मैं अभी कश्ती से आता हूँ .....जहाँ हो तुम मुझे आवाज़ दो " मैं दूंढ लाता हूँ"
"प्यार कोई व्योपार नहीं, किसी की जीत या हार नहीं, प्यार तो बस प्यार ही है, रहमो करम का वार नहीं"
YOU MET ME IN THE TIMELESS SPACE------ETERNITY."
"वक्त की गर्द नही थी जिस पर ----उन्ही राहों में तुम मिली होगी मुझे "---------------
"contribution by "chakor"
"आसमान को छू लिया है तेरी एक आवाज़ ने नगमा वो ही बह रहा है तेरे दिल के साज़ मैं, है मुहब्बत की जहाँ गरमी कुछ इस अंदाज़ में, जैसे साँसों का मिलन आगाज़ हो अंजाम में, ज़िंदगी भर की दुआओं का असर आया हो तेरे काम में ".......''
'na sur hai na tal hai, bus bhav hain or junun hai"
"contribution by 'SURE"
"seema ji aapki poetry me sabhi rang hai...jo jivan me hote hai.its very near to life....aapke jivan ke rang ..padne walon ke kivan k rang.. sabhi kuchh to hai yeha....isme "
प्रेम भी है और जीवन भी है, तनहाइयों का यहाँ गुलशन भी है फूलों की सी महक लिए और काँटों शूलों सी चुभन भी है प्रियतम का एक सपना है प्रेम का एक निवेदन भी है सम्पूर्णता से परिपूर्ण है विरह भी है और मिलन भी है कहीं तपन ख्यालों में दिखती कहीं आंखों में सावन भी है रिसता-रिसता दर्द का रिश्ता , मधुर भी है और पावन भी है भावों से भरे ह्रदय की पीड़ा कसमकश एक उलझन भी है आहत मन को राहत देती विरहन भी है जोगन भी है इंतज़ार बरसों का,वादा जन्मो जन्मों का प्यास रूहों की बुझाने को काफी मिलन का एक क्षण भी है आह भरे कोई वाह करे, निर्भर है ये मिजाज़ पर लिखने वाला एक पराया जो तुमसे "अभिन्न" भी है अभिन्न-unseparable
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"ह्रदय के जल थल पर अंकित, बस चित्र धूमिल कर जाओगे"
कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा रात के मुख पर चाँद का सेहरा तुम विराना कर जाओगे याद तो फिर भी आओगे
26 comments:
बहुत खूब आपने अपने विचारों को सुंदर तरीके से व्यक्त किया है आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है
क्यूँ हर शाम गुनाहगार लगे"
कभी कभी..........."
बहुत खूब ! वाह वाह ..शुभकामनाएं !
कभी-कभी तो खुद भी गुनहगार लगने लगता हूं. बहुत खूब क्या लिखा है.
शुक्रिया के साथ साथ आपकी लेखनी को शुभकामनायें सीमा जी !
सुन्दर,हमेशा की तरह्।
बहुत सुन्दरतम भाव ! शुक्रिया !
क्यूँ शै बेजार लगे हमे सभी
कोई तम्मना भी न बहला सकी,
लाजवाब !
Seema,
tmannayen kahaan kab kisko bahlati hain dost
gar wo poori ho bhi jaayen aur aa jaati hain dost
haan magar ek hai tamanna usko paa lene ki dost
raat aur din jiski yaadein aa ke tadpaati hain dost
ab kahaan jaayen ke dil apnaa bahal jaaye kheen
eik maayoosi si hasrat bekali laati hai dost
बहोत बढ़िया लिखा है आपने बहोत खूब..... ढेरो बधाई स्वीकारें
good composition
regards
bahut khub.....
बहुत सूदर कविता। बहुत बढीया।
कविता का एन्ड लाईन भी बहुत अच्छा लगा।
वाह! वाह!
आप की रचनाओं की तारीफ के लिए नए नए शब्द कहाँ से लायें? क्या कहें? बहुत वधिया है जी...हमेशा की तरह...
नीरज
बहुत खूब. शुभकामनाएं !
क्यूँ हर शाम गुनाहगार लगे"
कभी कभी....
धन्यवाद
दिल मे बेकली हो जो,
" कभी कभी"
क्यूँ शै बेजार लगे हमे सभी
कोई तमन्ना भी न बहला सकी,
क्यूँ हर शाम गुनाहगार लगे"
तभी कभी..........."
bahut khoob
दिल में बेकली हो तभी हर शाम गुनाहगार लगे है तभी....
शिद्दत हो गर दिल में तो...अपने ही यार लगे है सभी...!!
यार दो बोल मीठा भी बोल दे तो मान जाऊं मैं अभी...
नफरत से लबालब तिरे ये हर्फ़ तो तलवार लगे है सभी....!!
भीतर जो देख ले आदम तो ख़ुद को बदल ही दे अभी...
बाहर तो इक अपने अपने सिवा खतावार ही लगे है सभी..!!
हर कोई हर किसी को माफ़ कर दे तो सब बदल जाए...
मन में बोझ लेकर जीने से जीना भी दुश्वार लगे है सभी..!!
चन्द साँसे ही सौगात में लेकर आयें हैं हम सब यहाँ...
हर नेमत को आपस में बाँट लें,कि यार लगे है सभी....!!
मुहब्बत भरा दिल ये जो अपने पास ना हो "गाफिल"
चूम कर कलियाँ कहें फूल को,कि खार लगे हैं सभी....!!
Bahut behtar seemajee sach kaha aapne, khoob kaha aapne.
छोटी मगर भावुक रचना!
सांवली कुछ खामोश सी रात,
सन्नाटे की चादर मे लिपटी,
उनींदी आँखों मे कुछ साये लिए,
ये कैसी शिरकत किए चली जाती है....
बिखरे पलों की सरगोशियाँ ,
तनहाई मे एक शोर की तरह,
करवट करवट दर्द दिए चली जाती है....
कुछ अधूरे लफ्जों की किरचें,
सूखे अधरों पे मचल कर,
लहू को भी जैसे सर्द किए चली जाती है...
सांवली कुछ खामोश सी रात अक्सर...
सीमा
आपकी
यह कविता
भीतर तक झझकोर गई.
दो लाइनें हैं-आपके लिए----------
बहुत ठंड होती हैं बरफीली हवाओं की परतें
लाल खून भी कम गरम नहीं होता
bahut sundar.
har sabd kuchh bayan karte hain.
You have a knack of saying volumes in few words. Thank you.
Bahut khub.
बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति! बधाई।
uski hasrat jise dil me samaa bhi naa sakoo....itanaa chaahun hun use ki chaah bhi naa sakoo...
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